गुरदयाल बताएं कौन बेचता है अफीम : सुरजीत
इलाके में नशा मुक्ति अभियान चलाएंगे
बिल्ला सुरजीत की जोड़ी से घबरा गए हैं विरोधी
जमशेदपुर। टीनप्लेट गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी प्रधान पद के उम्मीदवार सरदार सुरजीत सिंह खुशीपुर ने इलाके के मतदाताओं से शेर चुनाव चिन्ह पर वोट डालने की अपील की है। उन्होंने दावा किया कि मतदाताओं का भरपूर समर्थन मिल रहा है और एकतरफा उनकी जीत है।
उनके अनुसार इलाके की संगत और मतदाता जानते हैं कि गुरदयाल सिंह के परिवार का अफीम विक्रेता के साथ क्या रिश्ता है। उन्होंने कहा कि अब ऐसे लोग प्रधानगी करेंगे, जिनका संबंध गैरकानूनी नशा व्यापार से है जबकि सिख पंथ में नशा पूरी तरह से वर्जित है। सुरजीत सिंह ने कहा कि अब तो पुलिस के साथ मिलकर इलाके में नशा मुक्ति अभियान चलाया जाएगा। वहीं उन्होंने विरोधियों को निशाने पर लेते हुए कहा कि नवरात्र जैसे पवित्र मौके पर भी इनके चुनाव शिविर में शराब पानी की तरह बहाया जा रहा है, जबकि मंदिर पचास गज की दूरी पर है।
विरोधियों द्वारा गबन लगाए आरोप के जवाब में सुरजीत सिंह ने कहा कि तब गुरचरण सिंह बिल्ला उनके विरोधी थे और तब उन्होंने एफ आई आर दर्ज कराई थी और पुलिस जांच में वे बेदाग साबित हुए। यही कारण है कि आज गुरचरण सिंह बिल्ला उनके साथ हैं । फिर चुनाव के समय में ही यह गबन का मामला कहां से आ गया है जबकि वह पिछले कई सालों से गुरुद्वारा कमेटी के महासचिव है। किसी प्रधान ने उनके खिलाफ किसी तरह का आरोप नहीं लगाया है। वास्तव में बिल्ला और उनकी जोड़ी से विरोधी घबरा गए हैं और अनाप-शनाप आरोप लगा रहे हैं। रही बात गुरचरण सिंह बिल्ला की तो उन पर किसी प्रकार की देश विरोधी गतिविधियों का आरोप नहीं लगा है और ना ही कोई मामला उनके खिलाफ है।
सुरजीत सिंह ने कहा कि चुनाव बाद स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव करेंगे। इलाके के बच्चे अंग्रेजी स्कूल में अच्छी पढ़ाई हासिल कर सके इसका पूरा प्रयास टीम के साथ मिलकर करेंगे। वहीं उन्होंने कहा कि संगत को गुरु घर से जोड़ा जाएगा और इसके लिए सामाजिक एवं पंथिक कार्य किए जाएंगे और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की बेटियों की शादी तथा बच्चों की पढ़ाई की व्यवस्था की जाएगी।
दारू बेचने वाले मंजीत पंथ विरोधी : बिल्ला
जमशेदपुर। टीनप्लेट गुरुद्वारा कमेटी के पूर्व प्रधान गुरचरण सिंह बिल्ला ने विरोधियों द्वारा एक करोड रुपए हेराफेरी का आरोप लगाए जाने का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि वे अपना पूरा हिसाब दे चुके हैं। यह हिसाब उन्होंने उस समय के साकची गुरुद्वारा कमेटी के उपाध्यक्ष सुखविंदर सिंह राजू के सामने दिया था।
रही बात मनजीत सिंह गिल द्वारा आरोप लगाने की तो वह एक नंबर का झूठा इंसान है। वह पंथ विरोधी सिख विरोधी है। उसके नाम से बीयर बार का लाइसेंस चलता है और दारू बेचने वाला गुरु घर का भला कैसे सोच सकता है?
सिख पंथ में जातिवाद का कोई स्थान नहीं है और यदि कोई जातिवादी है तो वह गुरु गोविंद सिंह का खालसा नहीं हो सकता है।
असल में शेर चिन्ह पर चुनाव लड़ रहे सुरजीत सिंह खुशीपुर की जीत तय होने और गुरदयाल सिंह की हार देखकर उनके संगीसाथी घबरा गए हैं और इस तरह के घटिया आरोप लगाने लगे हैं।

