विधायक सरयू राय ने भाजपा जिला महामंत्री राकेश सिंह के 1-1 आरोपों का जवाब के साथ सलाह भी दिया
स्वनामधन्य पूर्व मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास जी ने अपने लोगों से मेरे विरूद्ध मामला उठवाया है कि मेरे मंत्रित्वकाल में ‘आहार पत्रिका और आउट-बाउंड काॅलिंग’ कराने में भारी भ्रष्टचार हुआ है। उनका आरोप है कि उस समय आहार पत्रिका के मुद्रण आदेश में गड़बड़ी हुई और उस पत्रिका का संपादन मेरे तत्कालीन निजी सहायक श्री आनन्द कुमार कर रहे थे।
उन्हें बताना चाहता हूँ कि 24 नवम्बर, 2017 को खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने पीआरडी की छपाई दर पर और वित्त विभाग की सहमति से आहार पत्रिका का मुद्रण का आदेश जमशेदपुर के झारखण्ड प्रिंटर्स को दिया। अक्टूबर 2017 से मार्च, 2018 तक आहार पत्रिका के छः अंक पीआरडी दर पर मुद्रित हुए। इसी बीच पत्रिका के मुद्रण के लिए आॅनलाईन निविदा प्रकाशित की गई। निविदा प्रतिस्पर्धियों में राँची के सेतु प्रिंटर्स और नेशनल प्रिंटर्स जैसे मुद्रकों ने भी भाग लिया। विभाग के निदेशालय ने अपै्रल, 2018 में निविदा का निष्पादन किया और उस दर पर आहार पत्रिका का मुद्रण हुआ। पीआरडी का मुद्रण दर निविदा में आई दर से अधिक था। इसका समायोजन मुद्रक से किया गया और इसके बिल में से पीआरडी दर पर भुगतान की गई अधिक राशि की कटौती कर ली गई।
मुझपर आरोप लगाने वाले रघुवर दास के लोगों को बताना चाहिए कि उस समय पीआरडी का मंत्री कौन था। मेरी जानकारी में उस समय पीआरडी के मंत्री स्वयं मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास थे। मेरे तत्कालीन विभाग ने तो पीआरडी दर और निविदा में आई दर के अंतर का समायोजन कर अधिकाई भुगतान को मुद्रक से वापस करा दिया। परन्तु पीआरडी में यह दर चलता रहा। वे बतायेे कि मैंने सरकार का अधिक खर्च कराया था या श्रीमान रघुवर दास जी सरकार का अधिक खर्च करा रहे थे।
इनका एक अन्य आरोप है कि मेरे निजी सहायक श्री आनन्द कुमार आधार पत्रिका के संपादक बनाये गये थे। चुंकि श्री आनंद कुमार मेरे साथ निजी सहायक का काम करना शुरू करने के कुछ समय पहले तक प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र ‘हिन्दुस्तान’ के जमशेदपुर संस्करण के संपादक थे और संपादक होने की योग्यता रखते थे। किसी अन्य को पत्रिका का संपादन का भार देकर विभाग से अतिरिक्त व्यय कराने के बदले श्री आनंद कुमार ने अवैतनिक काम किया और सरकार से कोई अतिरिक्त पारिश्रमिक नहीं लिया। रघुवर दास के लोगों को बताना चाहिए कि इस निर्णय से सरकार का खर्च बचा या खर्च अधिक हुआ।
इनका दूसरा आरोप है कि उस समय के मेरे विभाग में आउट-बाउंड काॅलिंग पर अधिक खर्च किया गया। उन्हें बताना चाहता हूँ कि आउट बाउंड काॅलिंग की व्यवस्था करने वाले को मेरे तत्कालीन विभाग से 24 नवम्बर, 2016 को 81 पैसे प्रति काॅल की दर से आदेश दिया गया। इसके लिए खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशालय द्वारा खुली निविदा प्रकाशित की गई थी। जिसमें चार प्रतिस्पर्धियों ने भाग लिया था। इसके बाद नगर विकास विभाग ने 16 नवम्बर, 2017 को निविदा के आधार पर उसी संस्था को आउट बाउंड काॅलिंग का आदेश 83 पैसे प्रति काॅल पर दिया। इसके पूर्व इसी संस्था ने सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग में आउट-बाउंड काॅलिंग का काम किया था। सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग के मंत्री स्वयं तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री रघुवर दास थे। मुझ पर आरोप लगाने वाले उनके लोग पता कर लें कि सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग ने किस दर पर और न्यूनतम कितने काॅल के लिए इसी संस्था को आउट-बाउंड काॅलिंग का आदेश दिया था। मेरे तत्कालीन विभाग में आउट-बाउंड काॅलिंग की कितनी संख्या थी, नगर विकास विभाग में कितनी संख्या थी और सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग की कितनी काॅल संख्या थी। मुझ पर आरोप लगाते समय ये कह रहे है कि आउट-बाउंड काॅलिंग पाँच पैसे प्रति काॅल हो सकती थी। सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग के तत्कालीन मुख्यमंत्री और अपने ‘आका’ ये यह पहले पूछें कि आपने सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस विभाग में आउट-बाउंड काॅलिंग किस दर पर कराया था।
आज जमशेदपुर में श्री रघुवर दास के एक खासम-खास व्यक्ति ने बयान दिया है कि अगर उनका आरोप गलत है तो सरयू राय उन लोगों के उपर मुकदमा क्यों नहीं दायर करते? यदि उनका यही शौक है कि उनपर मुकदमा हो तो उनका शौक पूरा करने से मैं पीछे नहीं हटूँगा। पर इसके पहले वे उपर्युक्त विवरण के बारे में श्रीमान रघुवर दास जी से खुलासा कर लें।

