- मां रंकिणी मंदिर विकास समिति का विवाद थाने पहुंचा
*पूर्व कोषाध्यक्ष पर अवैध वसूली का आरोप, अध्यक्ष-सचिव ने पोटका थाना में दी लिखित शिकायत*
राष्ट्र संवाद संवाददाता, पोटका
मां रंकिणी कापड़गादी घाट विकास समिति, रोहिणीबेड़ा का आंतरिक विवाद अब थाने तक पहुंच गया है। समिति के अध्यक्ष दिनेश सरदार और सचिव लखीपदो सिंह ने पोटका थाना प्रभारी को लिखित शिकायत देकर मंदिर परिसर में कथित अवैध वसूली रोकने और संस्था के नाम पर हो रही गतिविधियों की जांच कर कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। समिति की ओर से यह शिकायत 9 अक्टूबर 2026 को पत्रांक 63/2026 के तहत दी गई है।
*पूर्व कोषाध्यक्ष पर वसूली का आरोप*
शिकायत में समिति के पूर्व कोषाध्यक्ष मनोरंजन सिंह पर आरोप लगाया गया है कि पद से हटाए जाने के बावजूद वह मंदिर परिसर में बने घुमकुड़िया सह बहुउद्देशीय भवन की संचालन समिति का कोषाध्यक्ष बताकर करीब एक वर्ष से श्रद्धालुओं से कथित रूप से अवैध वसूली कर रहे हैं। समिति का कहना है कि 2 अक्टूबर 2026 को हुई कार्यकारिणी समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित कर उन्हें कोषाध्यक्ष पद से निष्कासित कर दिया गया था। उनके स्थान पर टोटन सिंह को नया कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
समिति के अनुसार, इस बदलाव की सूचना बैंक ऑफ इंडिया की मेचुआ शाखा को भी दे दी गई है। शिकायत में पूर्व कोषाध्यक्ष पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप भी लगाए गए हैं। साथ ही उनके खिलाफ आपराधिक मामले और जमानत पर होने का उल्लेख करते हुए कार्रवाई की मांग की गई है।
*11 अक्टूबर की बैठक पर भी आपत्ति*
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पद से हटाए जाने के बाद मनोरंजन सिंह कुछ सदस्यों को साथ लेकर समानांतर संगठन खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। समिति का दावा है कि संबंधित सदस्यों का पिछले कई वर्षों से 51 रुपये मासिक सदस्यता शुल्क जमा नहीं हुआ है। इसी विवाद के बीच 11 अक्टूबर 2026 को बैठक बुलाए जाने पर आपत्ति जताई गई है।
अध्यक्ष और सचिव का कहना है कि कथित बैठक समिति के संविधान और नियमावली के अनुरूप नहीं है तथा इसे कार्यकारिणी की सहमति से नहीं बुलाया गया। उन्होंने आशंका जताई है कि इससे संस्था के कामकाज और नवरात्र मेले की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
समिति ने पुलिस से मंदिर परिसर में कथित अवैध वसूली की जांच कराने, संस्था के नाम पर हो रही गतिविधियों की वास्तविकता स्पष्ट करने और कानून के अनुसार कार्रवाई करने की मांग की है। मामले में दूसरे पक्ष का बयान उपलब्ध नहीं हो सका है।

