लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
दरभंगा: राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के अवसर पर ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय (एलएनएमयू) के स्नातकोत्तर गणित विभाग ने ‘राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का महत्व’ विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित किया। यह आयोजन देश के महान सांख्यिकीविद् प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस की जयंती को चिह्नित करता है, जिनके योगदान ने भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को मजबूत आधार प्रदान किया। इस दिन का मुख्य उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक नियोजन और नीति निर्माण में सांख्यिकी के महत्व के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना है।
भारत सरकार ने 2007 से प्रतिवर्ष 29 जून को प्रो. पी. सी. महालनोबिस के जन्मदिन को राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। यह दिन न केवल उनके अमूल्य योगदान को याद करने का अवसर है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे संख्याएँ और डेटा हमारे समाज को समझने और बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह दिवस विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों और सरकारी संगठनों द्वारा सांख्यिकी के महत्व को उजागर करने के लिए कार्यक्रमों का आयोजन करता है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस का महत्व और महालनोबिस का योगदान
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में दिल्ली विश्वविद्यालय के कमला नेहरू महाविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर अजय कुमार यादव ने प्रो. पी. सी. महालनोबिस के योगदान, सांख्यिकी के महत्व तथा एआई में महालनोबिस सूत्र के उपयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस प्रकार महालनोबिस ने स्वतंत्र भारत की आर्थिक नियोजन में सांख्यिकी को एक केंद्रीय उपकरण बनाया। उनके द्वारा स्थापित भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) आज भी सांख्यिकीय अनुसंधान और प्रशिक्षण का एक प्रमुख केंद्र है, जिसका प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखा जाता है।
प्रोफेसर यादव ने अपने व्याख्यान में इस बात पर भी जोर दिया कि सांख्यिकी केवल संख्याओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह उन्हें अर्थ देने और उनसे उपयोगी निष्कर्ष निकालने की कला है। यह हमें जटिल सामाजिक और आर्थिक समस्याओं को समझने में मदद करती है और उन समस्याओं के समाधान के लिए प्रभावी नीतियां बनाने में सहायक होती है। आज के डेटा-संचालित युग में, सांख्यिकी की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। [INTERNAL_LINK_HOLDER]
प्रो. पी.सी. महालनोबिस: एक दूरदर्शी सांख्यिकीविद्
प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालनोबिस को भारत में आधुनिक सांख्यिकी का जनक माना जाता है। उनका जन्म 29 जून, 1893 को हुआ था। उन्होंने भारत की दूसरी पंचवर्षीय योजना के मसौदे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने देश के औद्योगिक विकास की नींव रखी। उनके ‘महालनोबिस मॉडल’ ने बड़े पैमाने पर उद्योगों के विकास पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई। उनका दृष्टिकोण केवल अकादमिक नहीं था, बल्कि व्यावहारिक और राष्ट्र निर्माण की भावना से ओत-प्रोत था।
‘महालनोबिस दूरी’ (Mahalanobis Distance) जैसा उनका आविष्कार आज भी विभिन्न वैज्ञानिक क्षेत्रों में, विशेषकर पैटर्न पहचान और क्लस्टर विश्लेषण में व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। यह सांख्यिकीय माप किसी बिंदु और वितरण के बीच की दूरी को मापता है, जो जटिल डेटासेट में संबंधों को समझने में मदद करता है। इस तरह के उपकरण सांख्यिकी को केवल सैद्धांतिक नहीं बल्कि एक अत्यधिक व्यावहारिक विषय बनाते हैं।
आधुनिक युग में, सांख्यिकी का अनुप्रयोग विज्ञान, प्रौद्योगिकी, व्यापार, अर्थशास्त्र, जनसांख्यिकी और सामाजिक विज्ञान सहित हर क्षेत्र में फैला हुआ है। डेटा विश्लेषण, मशीन लर्निंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उदय के साथ, सांख्यिकीय पद्धतियों की मांग लगातार बढ़ रही है। चाहे वह बाजार के रुझानों की भविष्यवाणी करना हो, बीमारियों के प्रसार का अध्ययन करना हो, या सरकारी नीतियों का मूल्यांकन करना हो, सांख्यिकी हमें सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाती है।
एआई में महालनोबिस सूत्र का उपयोग
प्रोफेसर अजय कुमार यादव ने विशेष रूप से एआई में महालनोबिस सूत्र के उपयोग पर प्रकाश डाला। उन्होंने समझाया कि कैसे यह सूत्र डेटा बिंदुओं के बीच समानता या असमानता को मापने में मदद करता है, खासकर जब डेटा विभिन्न स्केलों पर होता है और चर सहसंबद्ध होते हैं। यह सुविधा इसे मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के लिए अत्यंत उपयोगी बनाती है, जैसे कि वर्गीकरण, क्लस्टरिंग और विसंगति का पता लगाने में। आधुनिक एआई प्रणालियों को बेहतर ढंग से प्रशिक्षित करने और अधिक सटीक परिणाम प्राप्त करने के लिए सांख्यिकीय सिद्धांतों की गहरी समझ आवश्यक है।
इस प्रकार, महालनोबिस का काम सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं है, बल्कि यह आज भी अत्याधुनिक तकनीक को आकार दे रहा है। सांख्यिकी और एआई के इस संगम को समझना आज के छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यह दर्शाता है कि कैसे मूलभूत सांख्यिकीय सिद्धांत नई तकनीकों के विकास के लिए आधार प्रदान करते हैं और हमें भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं।
कार्यक्रम का सफल संचालन
यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम विज्ञान संकाय के डीन प्रो. दिलीप कुमार चौधरी के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। विभागाध्यक्ष डॉ. एस. एन. रॉय ने सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और ऑनलाइन प्रतिभागियों का हार्दिक स्वागत किया, जबकि कार्यक्रम के अंत में डॉ. अयाज़ अहमद ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस पूरे आयोजन का संचालन डॉ. धर्मेंद्र कुमार यादव ने बड़ी कुशलता से किया, जिससे व्याख्यान सुचारु रूप से संपन्न हो सका। इस ऑनलाइन व्याख्यान के दौरान विश्वविद्यालय के कई शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राएँ सक्रिय रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने विषय की गहराई और प्रासंगिकता को समझा।
ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम छात्रों को वर्तमान समय की आवश्यकताओं और सांख्यिकी के बढ़ते महत्व से परिचित कराते हैं। वे उन्हें डेटा-संचालित दुनिया में सफल होने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हैं। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय का यह प्रयास न केवल महालनोबिस के योगदान को सम्मान देता है, बल्कि अगली पीढ़ी को सांख्यिकीय सोच के साथ सशक्त भी करता है।

