लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
झारखंड में विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज की घटना ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है।
विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज: सरयू राय की कड़ी प्रतिक्रिया
*रांची/जमशेदपुर*। अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में धरना और घेराव कर रहे झारखंडी विद्यार्थियों पर पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए जाने की घटना की जमशेदपुर पश्चिम के विधायक एवं पूर्व मंत्री सरयू राय ने कड़ी निंदा की है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की समस्याओं को लाठियों से नहीं, बल्कि संवाद के जरिए हल किया जाना चाहिए। सरकार को उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करना चाहिए।
सरयू राय ने कहा कि आंदोलनरत विद्यार्थियों ने उनसे बातचीत की है। उन्होंने विद्यार्थियों की बातें सुनी हैं और उन्हें लगता है कि उनकी कई मांगें जायज हैं। लोकतंत्र में अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाना हर नागरिक का अधिकार है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के आंदोलन की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने जमशेदपुर से उनसे मिलने आए अपने साथियों अमित शर्मा, नीरज सिंह, विवेक पाण्डेय और श्रवण पासवान से आंदोलनरत विद्यार्थियों की हरसंभव मदद करने को कहा है। उनके साथी भी विद्यार्थियों की सहायता के लिए आगे आए हैं और फर्स्ट एड बॉक्स, रात का भोजन, फल तथा अन्य जरूरी सामग्री लेकर जयपाल सिंह स्टेडियम में विद्यार्थियों के बीच मौजूद हैं।
सरयू राय ने सरकार से तत्काल विद्यार्थियों से बातचीत शुरू करने की अपील की।
सरयू राय ने स्पष्ट कहा कि वे आंदोलनरत विद्यार्थियों के साथ हैं और उनकी जायज मांगों के लिए हरसंभव सहयोग करते रहेंगे।
छात्र आंदोलन की पृष्ठभूमि और मांगें
झारखंड में लंबे समय से विद्यार्थी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं। इन मांगों में शैक्षणिक संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, छात्रवृत्ति वितरण में देरी, परीक्षा परिणामों में अनियमितता और रोजगार के अवसरों का अभाव शामिल हैं। विद्यार्थियों का कहना है कि बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद सरकार उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दे रही है, जिसके कारण उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा।
सरयू राय का राजनीतिक रुख और समर्थन
सरयू राय झारखंड की राजनीति में एक मुखर आवाज रहे हैं। वे पूर्व में मंत्री रह चुके हैं और वर्तमान में जमशेदपुर पश्चिम से निर्दलीय विधायक हैं। उनकी पहचान जनता के मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाने वाले नेता की रही है। विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज की घटना पर उनकी त्वरित प्रतिक्रिया और सहायता सामग्री भेजना दर्शाता है कि वे जनसरोकारों के प्रति कितने संवेदनशील हैं।
लोकतंत्र में संवाद का महत्व
लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। सरकार का दायित्व है कि वह आंदोलनकारियों की बात सुने और समाधान निकाले। बल प्रयोग से समस्याएं और जटिल होती हैं। सरयू राय का संवाद पर जोर देना उचित ही है। इतिहास गवाह है कि छात्र आंदोलनों ने हमेशा समाज और राजनीति को नई दिशा दी है।
अधिक जानकारी के लिए झारखंड सरकार की आधिकारिक वेबसाइट यहां देखें।

