पति गया जेल, पत्नी अंकित मिश्रा मना रही थी ‘हनीमून’: कौशांबी की ‘जिंदा लाश’ ने पुलिस और कानून का बनाया मज़ाक!
राष्ट्र संवाद
कौशांबी (इंद्र यादव) धन्य है उत्तर प्रदेश की पुलिस और धन्य हैं वो मायके वाले, जिन्होंने जीते-जी अपनी बेटी का ‘श्राद्ध’ कर दिया और दामाद को सलाखों के पीछे भिजवा दिया! मामला कौशांबी का है, जहाँ एक महिला की ‘हत्या’ के आरोप में पति महीने भर से जेल की रोटियां तोड़ रहा था, जबकि उसकी ‘मरी हुई’ पत्नी हरियाणा में अपने प्रेमी के साथ गृहस्थी बसाकर ऐश काट रही थी। इसे कहते हैं— “साजिश ऐसी कि यमराज भी शरमा जाएं!”
अफेयर, पंचायत और फिर वही ‘पुराना रोग’
किस्सा शुरू होता है साल 2016 में, जब राजू तिवारी की शादी अंकिता मिश्रा से हुई। राजू को लगा था कि घर में लक्ष्मी आई है, पर उसे क्या पता था कि वह ‘आफत’ मोल ले रहा है। अंकिता का दिल अपने ही मौसेरे भाई संकल्प (रामू) पर अटका था।
2024 का ट्रेलर: मैडम पहले भी प्रेमी के साथ दिल्ली फुर्र हुई थीं। पंचायत बैठी, कसमों-वादों का दौर चला, अंकिता ने ‘सुधरने’ का नाटक किया और वापस आ गई।
जनवरी 2026 का धमाका: 21 जनवरी को अंकिता ने फिर से ‘उड़न परी’ बनने का फैसला किया। इस बार वो खाली हाथ नहीं, बल्कि घर के जेवर और नकदी लेकर नौ-दो-ग्यारह हो गई।
मायके वालों की ‘ऑस्कर विनिंग’ एक्टिंग
बेटे राजू तिवारी ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई, लेकिन अंकिता मिश्रा के मायके वालों के दिमाग में तो कुछ और ही खुराफात चल रही थी। फरवरी में अचानक उन्होंने पासा पलटा और राजू पर आरोप लगा दिया— “तुमने हमारी बेटी को मारकर लाश गायब कर दी!”
वाह रे पिता और भाई! जिन्हें पता होना चाहिए था कि उनकी लाडली कहाँ है, उन्होंने दामाद को जेल भिजवाने के लिए ‘हत्या’ की झूठी कहानी रच दी। पुलिस ने भी बिना सिर-पैर की जांच किए ऐसा दबाव बनाया कि बेचारे राजू तिवारी को सरेंडर करना पड़ा। पूरा परिवार घर छोड़कर भागा-भागा फिरता रहा, और इधर ‘स्वर्गवासी’ अंकिता हरियाणा में प्रेमी के साथ मटरगश्ती कर रही थी।
भांडा फूटा तो खुली पोल
कहते हैं न कि “झूठ के पांव नहीं होते।” पुलिस को जब अंकिता मिश्रा की लोकेशन हरियाणा में मिली, तो सारा रायता सिमट गया।
1: पति जेल में चक्की पीस रहा था।
2: पत्नी हरियाणा के किराए के कमरे में प्रेमी के साथ ‘लिव-इन’ के मजे ले रही थी।
अब पुलिस अंकिता को घसीटकर वापस लाई है। कोर्ट ने राजू तिवारी को रिहा करने का आदेश दिया है और अब जेल की उन कोठरियों में अंकिता मिश्रा के पिता और भाई को ‘हवा’ खाने के लिए भेज दिया गया है।
दामाद के उस एक महीने का हिसाब कौन देगा
इस पूरे मामले ने दिखा दिया है कि कैसे कुछ लोग कानून का इस्तेमाल ‘खिलौने’ की तरह करते हैं। मौसेरे भाई से प्रेम था तो तलाक ले लेतीं, लेकिन पूरे ससुराल को जेल भिजवाकर जो ‘थ्रिलर’ अंकिता ने लिखा, उसने बॉलीवुड की फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया है।
सीख: अगर बीवी अचानक गायब हो जाए और मायके वाले ज्यादा रोने का नाटक करें, तो समझ जाइये कि मामला ‘हत्या’ का नहीं, बल्कि ‘हरियाणा’ का हो सकता है!

