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    Home » कठुआ गैंगरेप: आरोपी पर नाबालिग नहीं बल्कि बालिग के तौर पर चलेगा मुकदमा- सुप्रीम कोर्ट
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    कठुआ गैंगरेप: आरोपी पर नाबालिग नहीं बल्कि बालिग के तौर पर चलेगा मुकदमा- सुप्रीम कोर्ट

    Devanand SinghBy Devanand SinghNovember 16, 2022No Comments2 Mins Read
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    जम्मू कश्मीर. जम्मू कश्मीर कठुआ गैंगरेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी शुभम सांगरा पर नाबालिग नहीं बल्कि बालिग के तौर पर मुकदमा चलाने का आदेश दिया है. कोर्ट ने निचली अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें इसको जुवेनाइल बताया गया था. जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा कि किसी आरोपी की उम्र तय करने के लिए अगर कोई पुख्ता सबूत नहीं हैं तो ऐसी स्थिति में ‘ मेडिकल ओपिनियन ‘ को ही सही तरीका माना जायेगा. जस्टिस अजय रस्तोगी व जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन की अपील पर फैसला सुनाया है.

     

    जस्टिस पारदीवाला ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि मेडिकल साक्ष्य पर भरोसा किया जा सकता है या नहीं, यह साक्ष्य के मूल्य पर निर्भर करता है. ऐसे में सीजेएम कठुआ द्वारा पारित आदेश को रद्द किया जाता है और ऐसी स्थिति में आरोपी को अपराध के समय किशोर नहीं माना जाता है. अभियुक्त की आयु सीमा निर्धारित करने के लिए किसी अन्य निर्णायक सबूत के अभाव में उम्र के संबंध में चिकित्सा पर विचार किया जाता है, जो स्पष्ट है. आरोपी के खिलाफ बालिग के तौर पर मुकदमा चलाया जाए.

     

    जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने याचिका दायर की थी. इसमें कहा गया कि 2018 में अपराध के वक्त आरोपी बालिग था और हाईकोर्ट ने निचली अदालत के आदेश की पुष्टि कर गलती की है. 11 अक्तूबर 2018 को हाईकोर्ट ने 27 मार्च, 2018 के निचली अदालत ने इस मसले पर आदेश दिया था. याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट ने यह परीक्षण भी नहीं किया कि आरोपी की जन्मतिथि के बारे में निगम और स्कूल के रिकॉर्ड में विरोधाभास है.

     

    इसी साल छह जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को नोटिस जारी किया था. याचिका में कहा गया कि आरोपी वारदात के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था. 21 फरवरी, 2018 को हाईकोर्ट के आदेश पर गठित मेडिकल बोर्ड ने भी घटना के समय आरोपी की आयु 19 से 23 साल के बीच मानी थी. 10 जनवरी, 2018 का दिन शायद ही कोई भूल पाया हो. एक मासूम बच्ची का अपहरण कर कई दिनों तक उसके साथ गैंगरेप किया गया था. इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई थी.

     

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