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    राजद-कांग्रेस से ‘धोखा’ मिलने पर झामुमो का पलटवार — झारखंड में सत्ता समीकरण बदलने के संकेत, सियासी तापमान बढ़ा

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarOctober 21, 2025No Comments3 Mins Read
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    राजद-कांग्रेस से ‘धोखा’ मिलने पर झामुमो का पलटवार — झारखंड में सत्ता समीकरण बदलने के संकेत, सियासी तापमान बढ़ा

    बिहार में सीट न मिलने से झामुमो का गुस्सा उफान पर, सुदिव्य सोनू ने दी चेतावनी — “धोखा महंगा पड़ेगा”। राजनीतिक जानकार बोले — हेमंत अब ‘पॉलिटिकल रिवेंज’ के मूड में।

     

    राष्ट्र संवाद संवाददाता

    बिहार विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को राजद और कांग्रेस की ओर से एक भी सीट नहीं दी गई। इस उपेक्षा ने झामुमो को भीतर तक झकझोर दिया है। पार्टी ने न सिर्फ बिहार में महागठबंधन से अलग होने की घोषणा की है, बल्कि “राजनीतिक धोखे” का बदला लेने की खुली चेतावनी भी दे दी है।

     

    अब झारखंड की राजनीति में इस फैसले के दूरगामी असर की चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि झामुमो की यह नाराजगी सत्ता संतुलन में बदलाव का इशारा दे रही है।

     

     

    बिहार में ‘धोखा’, झारखंड में असर

     

    झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने 18 अक्टूबर को घोषणा की थी कि पार्टी बिहार की छह सीटों — चकाई, धमदाहा, कटोरिया, मनिहारी, जमुई और पीरपैंती — पर अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। पार्टी ने स्टार प्रचारकों की सूची भी जारी की थी।

     

    लेकिन दीपावली के दिन 20 अक्टूबर को नामांकन की अवधि समाप्त होने तक झामुमो ने प्रत्याशियों के नाम घोषित नहीं किए। स्थिति उलझी रही और फिर गिरिडीह में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा —“राजद और कांग्रेस ने हमें धोखा दिया है। अंतिम क्षण तक पार्टी को अंधेरे में रखा गया। अब यह धोखा महंगा पड़ेगा।”

     

     

     

    उन्होंने 2019 की याद दिलाई जब झामुमो ने सिर्फ एक विधायक वाले राजद को भी मंत्री पद दिया था — “हमने उपकार किया, उन्होंने अपमान किया।”

     

     

     

    *राजद प्रत्याशी की गिरफ्तारी ने बढ़ाई खटास*

     

    सासाराम से राजद प्रत्याशी सत्येंद्र साहु की गिरफ्तारी ने भी महागठबंधन की तकरार को और गहरा दिया है।

    डकैती के 21 साल पुराने मामले में गढ़वा पुलिस ने उन्हें नामांकन के तुरंत बाद गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार अदालत से जारी लाल वारंट के आधार पर यह कार्रवाई की गई।

     

    राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि यह गिरफ्तारी झामुमो और राजद के बीच तनाव की पृष्ठभूमि में हुई है, जिसने गठबंधन में अविश्वास को और बढ़ा दिया है।

     

     

    राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि झामुमो की यह नाराजगी बिहार की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगी।

    झारखंड में महागठबंधन की सरकार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। “राजद और कांग्रेस यह भूल गए कि झारखंड में वे झामुमो की कृपा से सत्ता में हैं। अब हेमंत सोरेन वही कृपा वापस लेने के मूड में दिख रहे हैं,”

     

    अगर हेमंत सोरेन ने राजद को सत्ता से बाहर किया, तो यह सिर्फ एक मंत्री हटाने का मामला नहीं होगा, बल्कि झारखंड में गठबंधन राजनीति के नए समीकरण की शुरुआत होगी।

    बिहार में सीटों की उपेक्षा ने झामुमो की नाराजगी को उभार दिया है।

    अब यह “धोखा” झारखंड की सत्ता तक कंपन पैदा कर सकता है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि हेमंत सोरेन इस अपमान को इतनी आसानी से नहीं भूलेंगे और आने वाले दिनों में झारखंड की राजनीति में एक नई करवट देखने को मिल सकती है।

    राजद-कांग्रेस से 'धोखा' मिलने पर झामुमो का पलटवार — झारखंड में सत्ता समीकरण बदलने के संकेत सियासी तापमान बढ़ा
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