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    Home » घाटशिला में साइबर अपराध का आतंक: जादूगोड़ा नया हब
    अपराध खबरें राज्य से जमशेदपुर झारखंड

    घाटशिला में साइबर अपराध का आतंक: जादूगोड़ा नया हब

    Nikunj GuptaBy Nikunj GuptaJune 14, 2026No Comments5 Mins Read
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    घाटशिला में साइबर अपराध
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता

    पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल में साइबर अपराध का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों में चिंता और आक्रोश व्याप्त है। एक समय शांतिपूर्ण रहे इस क्षेत्र को अब साइबर ठगों ने अपना नया गढ़ बना लिया है, विशेषकर जादूगोड़ा अब इस डिजिटल अपराध का केंद्र बन उभरा है। पुलिस की लगातार कोशिशों के बावजूद, घाटशिला में साइबर अपराध पर लगाम लगाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

    पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला अनुमंडल में साइबर अपराध लगातार बढ़ता जा रहा है। अनुमंडल के सभी छह प्रखंडों—जादूगोड़ा, मुसाबनी, चाकुलिया, पोटका, गुड़ाबांदा और धालभूमगढ़—में साइबर ठगों का नेटवर्क सक्रिय है। पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद साइबर अपराधियों पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है। जादूगोड़ा क्षेत्र अब जिले का प्रमुख साइबर अपराध केंद्र बनता जा रहा है, जहां से ठगी के तार झारखंड के अलावा दिल्ली, हरियाणा और पश्चिम बंगाल तक जुड़े हुए हैं।

    चाकुलिया में मोबाइल हैकिंग और वित्तीय धोखाधड़ी के ताजा मामले

    ताजा मामला चाकुलिया के वाजपेयी कॉलोनी का है, जहां नया बाजार निवासी अजय सिंह के मोबाइल को रिमोट एक्सेस के जरिए हैक कर साइबर अपराधियों ने उनके बैंक खाते से 93 हजार रुपये उड़ा लिए। पीड़ित के अनुसार दोपहर के समय मोबाइल में अचानक सॉफ्टवेयर अपडेट होने लगा, जिसके बाद उनका जी-मेल पासवर्ड और एसबीआई खाते का पिन बदल दिया गया। जब तक वे बैंक पहुंचे, तब तक चार ट्रांजेक्शन के जरिए रकम निकाली जा चुकी थी।

    इससे पहले इसी कॉलोनी में 6 मई को रिटायर्ड शिक्षक बिरेंद्र उपाध्याय से बिजली बिल अपडेट करने के नाम पर 35 हजार रुपये की ठगी की गई थी। लगातार हो रही घटनाओं से स्थानीय लोगों में आक्रोश है।

    घाटशिला में साइबर अपराध के केंद्र और modus operandi

    साइबर सेल सूत्रों के अनुसार जादूगोड़ा के कोकदा, कुलडीहा, इंचड़ा और नवरंग मार्केट क्षेत्रों में संगठित साइबर गिरोह सक्रिय हैं। ठग KYC अपडेट, बिजली बिल बकाया, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी लोन और फेडएक्स पार्सल में ड्रग्स मिलने जैसी कहानियां गढ़कर लोगों को जाल में फंसा रहे हैं।

    पुलिस का कहना है कि अधिकांश लोग अनजाने में OTP, बैंकिंग जानकारी अथवा AnyDesk जैसे रिमोट एक्सेस ऐप का उपयोग कर ठगी का शिकार हो रहे हैं। लोगों से साइबर हेल्पलाइन 1930 तथा www.cybercrime.gov.in पर तत्काल शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है।

    एक महीने में बढ़े साइबर ठगी के मामले

    क्षेत्र मामले
    जादूगोड़ा 7
    मुसाबनी 3
    चाकुलिया 2
    पोटका 2
    घाटशिला 3

    यह तालिका स्पष्ट रूप से दिखाती है कि जादूगोड़ा में साइबर ठगी के मामले अन्य क्षेत्रों की तुलना में कहीं अधिक हैं, जो इसे अनुमंडल का सबसे संवेदनशील क्षेत्र बनाते हैं। इन आंकड़ों से घाटशिला में साइबर अपराध की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।

    कोकदा गांव बना ‘साइबर विलेज’: बदलती सामाजिक संरचना

    कभी मिट्टी के बर्तनों के लिए प्रसिद्ध कोकदा गांव अब साइबर अपराध के कारण चर्चा में है। ग्रामीणों का कहना है कि यहां कई युवक रातों-रात महंगी गाड़ियां और आलीशान मकानों के मालिक बन गए हैं। लगातार हो रही गिरफ्तारियों के कारण गांव की छवि प्रभावित हुई है और लोग यहां रिश्ते करने से भी कतराने लगे हैं।

    यह स्थिति गांव के सामाजिक ताने-बाने को बुरी तरह प्रभावित कर रही है, जहां अवैध धन से मिली समृद्धि ने पारंपरिक मूल्यों को चुनौती दी है। युवाओं का इस अपराध में शामिल होना एक गंभीर चिंता का विषय है, जो भविष्य के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं।

    जादूगोड़ा से जुड़े प्रमुख साइबर ठगी के बड़े मामले

    • यूसीआईएल के वैज्ञानिक आर.एल. पटनायक से लगभग 1.27 करोड़ रुपये की ठगी
    • गुरदीप सिंह से लगभग 1.20 लाख रुपये की ठगी
    • नवीन प्रसाद से 20 हजार रुपये की ठगी
    • खगेश्वर मलिक से 75 हजार रुपये की ठगी
    • अर्जुन शर्मा से 3 लाख रुपये से अधिक की ठगी

    ये मामले साइबर अपराधियों के दुस्साहस और उनकी पहुंच का प्रमाण हैं, जो उच्च पदों पर बैठे लोगों से लेकर सामान्य नागरिकों तक को अपना शिकार बना रहे हैं।

    भारत में साइबर अपराध एक तेजी से बढ़ती चुनौती है, जिसके आर्थिक और सामाजिक प्रभाव व्यापक हैं। इन अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता और सावधानी अत्यंत आवश्यक है। अधिक जानकारी के लिए, आप साइबर अपराध पर विकिपीडिया पर जा सकते हैं।

    कैसे बचें साइबर ठगी से: सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपाय

    साइबर ठगों से बचने के लिए सतर्कता और सही जानकारी ही सबसे बड़ा हथियार है। पुलिस और साइबर विशेषज्ञ निम्नलिखित सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं:

    • बैंक, बिजली बिल या KYC अपडेट के नाम पर आए लिंक पर क्लिक न करें।
    • किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर AnyDesk, TeamViewer जैसे ऐप डाउनलोड न करें।
    • OTP, PIN और बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
    • ठगी होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन पर कॉल करें।
    • शिकायत www.cybercrime.gov.in पर दर्ज करें।

    इन सरल लेकिन प्रभावी उपायों का पालन करके आप स्वयं को और अपने प्रियजनों को साइबर अपराध के बढ़ते खतरे से बचा सकते हैं। [INTERNAL_LINK_HOLDER]

    घाटशिला में अलग साइबर थाना खोलने की मांग और जन आंदोलन की तैयारी

    लगातार बढ़ रही साइबर ठगी की घटनाओं से नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन से घाटशिला अनुमंडल में अलग साइबर थाना खोलने तथा विशेष जांच टीम गठित करने की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो थाना घेराव और जन आंदोलन किया जाएगा।

    स्थानीय निवासियों का यह आह्वान इस बात का संकेत है कि वे अब इस गंभीर समस्या को और बर्दाश्त करने को तैयार नहीं हैं। प्रशासन को इस दिशा में तुरंत कदम उठाने होंगे ताकि घाटशिला में साइबर अपराध की बढ़ती चुनौती पर काबू पाया जा सके और लोगों का विश्वास बहाल हो।

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleभाजपा के बीएलए-2 बैठक आयोजन पर उठे सवाल, कार्यप्रणाली को लेकर जताई गई नाराजगी राष्ट्र संवाद संवाददाता जमशेदपुर। भारतीय जनता पार्टी के कदमा मंडल में आयोजित बीएलए-2 (बूथ लेवल एजेंट) बैठक को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं के एक वर्ग ने सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि कदमा मंडल की बैठक अधिकांश बीएलए-2 कार्यकर्ताओं की अनुपस्थिति में आयोजित की जा रही है, जबकि प्रदेश संगठन के निर्देशानुसार यह बैठक मंडल स्तर पर अलग-अलग होनी चाहिए थी। जानकारी के अनुसार, जमशेदपुर पश्चिम विधानसभा के कदमा, सोनारी, बिष्टुपुर और साकची पश्चिम मंडलों की संयुक्त बैठक सोनारी स्थित चित्रगुप्त भवन में आयोजित की गई। आलोचकों का कहना है कि इन चारों मंडलों में कुल 180 बूथ हैं, जबकि बैठक स्थल की क्षमता लगभग 80 से 100 लोगों की ही है। ऐसे में सभी बीएलए-2 कार्यकर्ताओं की भागीदारी संभव नहीं है। विरोध जताने वाले कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि कदमा मंडल के लगभग 40 बीएलए-2 पहले ही सामूहिक इस्तीफा दे चुके हैं और उन्होंने नव नियुक्त मंडल अध्यक्ष के साथ काम करने में असमर्थता जताते हुए अपना इस्तीफा जिला अध्यक्ष समेत संबंधित पदाधिकारियों को सौंप दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य विधानसभा क्षेत्रों में बीएलए-2 की बैठकें मंडल स्तर पर आयोजित की गईं, जबकि पश्चिम विधानसभा में कई मंडलों को मिलाकर संयुक्त बैठक की जा रही है। इससे यह धारणा बन रही है कि संगठनात्मक कोरम पूरा करने के उद्देश्य से बैठक आयोजित की गई है। कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम से जिला अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़े हो रहे हैं। उनका मानना है कि बड़ी संख्या में बीएलए-2 के इस्तीफे के बाद इस तरह बैठक आयोजित किया जाना संगठनात्मक प्रबंधन की कमजोरी को दर्शाता है। हालांकि, इस संबंध में जिला भाजपा नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी है। यदि पार्टी पदाधिकारियों का पक्ष सामने आता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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