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    Home » अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 योग बना संतुलित,स्वस्थ और जिम्मेदार जीवन का वैश्विक मार्ग -प्रतापराव जाधव
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    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 योग बना संतुलित,स्वस्थ और जिम्मेदार जीवन का वैश्विक मार्ग -प्रतापराव जाधव

    dhiraj KumarBy dhiraj KumarMay 21, 2026No Comments6 Mins Read
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    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 योग बना संतुलित,स्वस्थ और जिम्मेदार जीवन का वैश्विक मार्ग -प्रतापराव जाधव

    योग से जागेगा चेतन समाज संयम, संतुलन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश

    (संतोष कुमार सिंह )

    वाराणसी :- आज जब दुनिया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 मना रही है मानवता एक निर्णायक सभ्यतागत मोड़ पर खड़ी है | वर्तमान में हम अभूतपूर्व तकनीकी और भौतिक प्रगति के युग में जी रहे हैं फिर भी हम जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों,बढ़ते मानसिक तनाव,पर्यावरणीय क्षरण और जीवन जीने के अस्थिर तरीकों जैसी चुनौतियों का सामना भी कर रहे हैं इनमें से कई संकटों के मूल में एक ही चुनौती नज़र आती है वस्तुओं का अनियंत्रित और बिना सोचे-समझे किया जाने वाला उपभोग |

    प्राकृतिक संसाधनों के ज़रुरत से ज्यादा दोहन से लेकर डिजिटल उपयोगिता पर अत्यधिक निर्भरता और अस्थिर जीवन शैली तक,आज आधुनिक समाज संतुलन से लगातार दूर होता जा रहा है और इसी संदर्भ में,योग न केवल एक प्राचीन स्वास्थ्य अभ्यास के रूप में,बल्कि एक ज़िम्मेदार जीवन जीने के लिए एक कालातीत रूपरेखा के रूप में उभर कर सामने आता है | योग मानवता को आत्म- नियमन,संयम और सचेत विकल्पों की ओर एक शक्तिशाली मार्ग प्रदान करता है यह हमें सिखाता है कि हम अपने भीतर और अपने आस-पास की दुनिया के साथ सामंजस्य कैसे स्थापित करें |

    *सोच समझकर वस्तुओं का उपभोग करने का आह्वान*-
    अत्यधिक उपभोग की वैश्विक चुनौती से निपटने के लिए हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व ने ‘मिशन लाइफ (लाइफ़स्टाइल फ़ॉर एनवायरनमेंट) के ज़रिए एक सशक्त दिशा प्रदान की है | सीओपी 2026 में प्रधानमंत्री ने एक ऐसे सिद्धांत को सामने रखा,जो योग के दर्शन से गहराई के साथ जुड़ा है आज ज़रूरत है सचेत और सोच-समझकर उपयोग करने की,न कि बिना सोचे-समझे और विनाशकारी तरीके से उपभोग करने की | हाल ही में वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और आपूर्ति-श्रृंखला में आई बाधाओं के बीच,प्रधानमंत्री ने इस अपील का विस्तार करते हुए इसे एक दैनिक नागरिक ज़िम्मेदारी का रूप दिया उन्होंने नागरिकों को प्रोत्साहित किया कि वे जान-बूझकर ऐसे उपभोग को सीमित करें जिनसे बचा जा सकता है जैसे ईंधन बचाना, अनावश्यक ऊर्जा का उपयोग कम करना और गैर-ज़रूरी खर्चों पर दोबारा विचार करना | यह अपील किसी चीज़ की कमी या अभाव पर आधारित नहीं है बल्कि,यह सामूहिक सशक्तिकरण,निरंतरता और राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी के लिए एक रणनीतिक और नैतिक आह्वान है जैसा कि उन्होंने हमें याद दिलाया हर छोटा-बड़ा प्रयास मायने रखता है ठीक वैसे ही जैसे हर एक बूंद से घड़ा भरता है |

    ये विचार योग के बुनियादी सिद्धांतों से गहराई से जुड़े हुए हैं योग दर्शन ‘अपरिग्रह’ यानी अनावश्यक चीज़ों को जमा करने से बचना और ‘संतोष’ यानी अपनी असली ज़रूरतों से संतुष्ट रहना, की बात करता है | ये सिद्धांत मिलकर एक ऐसी सोच पैदा करते हैं जो लोगों को अंधाधुंध उपभोग से दूर सचेत जीवन की ओर प्रेरित करती है | योग हमें निष्क्रिय उपभोक्ता से बदलकर इस धरती का ज़िम्मेदार रखवाला बनाता है |

    *पारिस्थितिक संतुलन के लिए एक साधन के रूप में योग*-
    पृथ्वी पर इंसानी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए तो काफ़ी संसाधन हैं लेकिन इंसान की असीमित लालच को पूरा करने के लिए नहीं। योग प्रकृति के साथ हमारे आपसी जुड़ाव की भावना को गहरा करके इस जागरूकता को फिर से जगाने में मदद करता है जिस हवा में हम सांस लेते हैं जो भोजन हम करते हैं और जिस स्थिरता की हम तलाश करते हैं ये सभी एक साझा पारिस्थितिक तंत्र का हिस्सा हैं | योग का अभ्यास धीरे-धीरे हमारे व्यवहार को भीतर से बदल देता है यह मन की बेचैनी को शांत करता है जल्दबाज़ी वाली आदतों को कम करता है और आत्म-अनुशासन को मज़बूत बनाता है | आज की दुनिया,जो पल भर के सुख और अत्यधिक उपभोगवाद से संचालित होती है उसमें योग वह आंतरिक स्पष्टता पैदा करता है जिसकी ज़रूरत हमें अपनी असली ज़रूरतों और कभी न खत्म होने वाली इच्छाओं के बीच फ़र्क समझने के लिए होती है |

    स्वास्थ्य और परिवार कल्याण तथा आयुष,दोनों मंत्रालयों से जुड़े मंत्री के तौर पर,मैं हर दिन यह देखता हूँ कि योग किस तरह गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) के खिलाफ एक निवारक सार्वजनिक स्वास्थ्य साधन के रूप में काम करता है | शारीरिक गतिविधि,मानसिक संतुलन और अनुशासित जीवन शैली को बढ़ावा देकर, योग अस्वस्थ आदतों और अत्यधिक चिकित्सीय हस्तक्षेपों पर हमारी निर्भरता को कम करता है एक योगिक जीवन शैली स्वाभाविक रूप से सादगी,संयम,संतुलित पोषण,कम बर्बादी और संसाधनों के सचेत उपयोग को बढ़ावा देती है ठीक वही व्यवहारिक बदलाव,जो पर्यावरणीय स्थिरता के लिए ज़रुरी है | इस प्रकार,योग न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य का एक मार्ग है बल्कि यह व्यवस्था में जिम्मेदारीपूर्ण जीवन के लिए एक व्यावहारिक ढाँचा भी है |

    *भारत का वैश्विक योग नेतृत्व*-
    आज जब योग दुनिया के लिए भारत के सबसे प्रभावशाली योगदानों में से एक बन गया है यह स्वास्थ्य,सद्भाव और सामूहिक कल्याण की एक शक्तिशाली अभिव्यक्ति भी बन चुका है | जो योग एक प्राचीन सभ्यतागत प्रथा के रूप में शुरू हुआ था वह आज एक वैश्विक आंदोलन बन गया है,जो भूगोल,राजनीति,भाषा और संस्कृति की सीमाओं से परे है | हर साल, कई महाद्वीपों में लाखों लोग योग समारोहों में भाग लेते हैं वे केवल आसन ही नहीं करते,बल्कि एक स्वस्थ,अधिक संतुलित और टिकाऊ जीवन की साझा आकांक्षा को भी अपनाते हैं योग निवारक स्वास्थ्य सेवा,मानसिक कल्याण और सचेत जीवन शैली की एक सार्वभौमिक भाषा के रूप में उभरा है | योग के ज़रिए भारत ने दुनिया को समग्र स्वास्थ्य के लिए एक ऐसा गैर-बाध्यकारी और समावेशी ढाँचा प्रदान किया है जो आधुनिक चिंताओं का समाधान शाश्वत ज्ञान के साथ करता है |

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 का यही महत्व है चूँकि योग दुनिया भर में लाखों लोगों के जीवन को छूता है इसलिए यह बड़े पैमाने पर व्यवहारिक परिवर्तन को प्रेरित करने के लिए एक बेजोड़ मंच भी प्रदान करता है | योग की सामूहिक भावना के ज़रिए,स्थिरता,संयम और सचेत जीवन-शैली के संदेश अधिक दूर तक पहुँच सकते हैं और लोगों के मन में गहरी छाप छोड़ सकते हैं |

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2026 के लिए एक सामूहिक संकल्प सच्चा कल्याण अकेले अस्तित्व में नहीं हो सकता | मानव स्वास्थ्य,सामुदायिक कल्याण और संपूर्ण ग्रह का स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं | जलवायु परिवर्तन,जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और पर्यावरण के क्षरण की चुनौतियों के लिए न केवल नीतिगत हस्तक्षेप,बल्कि व्यवहार में परिवर्तन भी ज़रुरी है |

    इस अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर आइए हम अपनी प्रतिबद्धता को योग मैट से आगे बढ़ाएं आइए हम योग को केवल दैनिक अभ्यास के रूप में ही नहीं,बल्कि जीवन शैली के रूप में अपनाएं | एक ऐसी जीवन शैली जो सचेत उपभोग,आंतरिक अनुशासन और पारिस्थितिक जिम्मेदारी को प्रोत्साहित करती है | आइए हम प्रधानमंत्री के सचेत जीवन जीने के आह्वान पर काम करें और एक ऐसे भविष्य का निर्माण करें,जहां तरक्की और विकास को केवल हमारे उपभोग से नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी से जीने के तरीके से मापा जाए | अपने आंतरिक वातावरण को बदलकर,हम सब मिलकर अपने ग्रह के बाहरी वातावरण को ठीक कर सकते हैं (लेखक आयुष मंत्रालय में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री हैं) ||

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