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    Home » आईएनएस तारागिरी: व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा में नौसेना की अहम भूमिका | राष्ट्र संवाद
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    आईएनएस तारागिरी: व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा में नौसेना की अहम भूमिका | राष्ट्र संवाद

    Devanand SinghBy Devanand SinghApril 3, 2026No Comments5 Mins Read
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    आईएनएस तारागिरी
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    भारतीय वाणिज्यिक पोतों, तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नौसेना की भूमिका अहम: राजनाथ सिंह

    विशाखापत्तनम, तीन अप्रैल (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि ऊर्जा आपूर्ति समेत देश का 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्ग से होता है और ऐसे में उभरते समुद्री खतरों के बीच वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा में भारतीय नौसेना की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

    यहां ‘आईएनएस तारागिरी’ के जलावतरण समारोह को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय नौसेना हिंद महासागर में लगातार अपनी उपस्थिति बनाए रखती है, चाहे वह फारस की खाड़ी हो या मलक्का जलडमरूमध्य।

    उन्होंने कहा, ‘‘जब भी कोई संकट आता है, चाहे वह लोगों को निकालने का अभियान हो या मानवीय सहायता पहुँचाना, हमारी नौसेना हमेशा सबसे आगे रहती है। मुझे लगता है कि हमारी नौसेना भारत के मूल्यों और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। मेरा मानना ​​है कि आईएनएस तारागिरी के सेवा में शामिल होने से हमारी नौसेना की शक्ति, मूल्यों एवं प्रतिबद्धता में और भी वृद्धि होगी।’’

    पश्चिम एशिया में मौजूदा परिस्थितियों के कारण तेल आपूर्ति में बाधा और टैंकरों को रोके जाने की स्थिति के बीच उनकी ये टिप्पणियां महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

    उन्होंने कहा कि एक मजबूत और सक्षम नौसेना देश के लिए विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है।

    रक्षा मंत्री ने कहा, ‘‘समुद्र में कई संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां हमारी नौसेना लगातार सक्रिय उपस्थिति बनाए रखती है ताकि वस्तुओं की आपूर्ति सुचारु बनी रहे। जब भी वहां तनाव की स्थिति उत्पन्न होती है, भारतीय नौसेना हमारे वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।’’

    सिंह ने कहा कि भारतीय नौसेना ने यह साबित किया है कि वह न केवल देश के हितों की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि जरूरत पड़ने पर दुनिया भर में अपने नागरिकों और व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर कदम उठा सकती है।

    उन्होंने कहा कि यह क्षमता भारत को एक ज़िम्मेदार समुद्री शक्ति बनाती है।

    इतिहास का हवाला देते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि नौसैनिक शक्ति को मजबूत किए बिना कोई भी देश सही मायनों में शक्तिशाली नहीं बन सकता, इसलिए जब नरेन्द्र मोदी 2047 तक ‘विकसित भारत’ की बात करते हैं, तो उसमें समुद्री शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

    समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल के महत्व पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि वित्तीय लेन-देन, संचार नेटवर्क और रक्षा समन्वय इसी पर निर्भर करते हैं। यदि कोई इन केबलों को नुकसान पहुँचाता है, तो इसका प्रभाव किसी एक देश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे वैश्विक तंत्र पर पड़ेगा।

    उन्होंने कहा, ‘‘इसीलिए, समुद्री सुरक्षा को पारंपरिक दृष्टिकोण से परे, एक व्यापक और भविष्य के लिए तैयार ढांचे के नज़रिए से देखा जाना चाहिए।’’

    सिंह ने कहा, ‘‘हमें खुद को सिर्फ़ अपने तटों को सुरक्षित रखने तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि उन महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, संकरे जल मार्गों और डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए जो हमारे राष्ट्रीय हितों से जुड़े हैं। मुझे खुशी है कि भारतीय नौसेना इन सभी सुरक्षा कार्यों में सक्रिय रूप से लगी हुई है।’’

    उन्होंने कहा कि सुरक्षा के प्रति यह दृष्टिकोण देश को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करेगा, और भारत को एक शक्तिशाली समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।

    सिंह ने कहा कि जब भारत ‘आईएनएस तारागिरी’ जैसे उन्नत जहाज़ों का निर्माण और उन्हें तैनात करता है, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए शांति एवं समृद्धि की गारंटी बन जाता है।

    स्वदेशी रूप से यहां निर्मित उन्नत स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ के बारे में उन्होंने कहा कि इस जहाज़ को सेवा में शामिल करना एक ‘‘बड़ी उपलब्धि’’ है।

    उन्होंने कहा कि यह जहाज़ तेज़ गति से चलने में सक्षम है और लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है।

    रक्षा मंत्री के अनुसार, यह ऐसी प्रणाली से लैस है जिसे दुश्मन की गतिविधियों पर नज़र रखने, अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और ज़रूरत पड़ने पर तुरंत जवाबी कार्रवाई करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

    सिंह ने कहा कि इसमें आधुनिक रडार, सोनार और मिसाइल प्रणालियाँ शामिल हैं जैसे कि ब्रह्मोस और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें, जो इसकी अभियानगत क्षमता को और बढ़ाती हैं।

    उन्होंने कहा, ‘‘तीव्र युद्ध से लेकर समुद्री सुरक्षा, समुद्री दस्यु-रोधी अभियानों, तटीय निगरानी और मानवीय मिशन तक-यह हर भूमिका में पूरी तरह से उपयुक्त बैठता है, जो इसे एक अद्वितीय नौसैन्य मंच बनाता है।’’

    प्रोजेक्ट 17ए के तहत चौथे प्लेटफॉर्म के रूप में, ‘तारागिरी’ 6,670 टन वजनी युद्धपोत है, जिसे मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा निर्मित किया गया है। यह उन्नत डिज़ाइन और इंजीनियरिंग उत्कृष्टता का बेजोड़ उदाहरण है। यह जटिल समुद्री वातावरण में गुप्त अभियान चलाने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम है।

    यह जहाज़ भारत के घरेलू रक्षा तंत्र की परिपक्वता को दर्शाता है, जो 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ निर्मित है। इसमें 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम शामिल हैं तथा यह हज़ारों नौकरियों उपलब्ध कराता है।

    यह फ्रिगेट उन्नत हथियार प्रणालियों से लैस है, जिसमें सतह-से-सतह पर मार करने वाली सुपरसोनिक मिसाइलें, सतह-से-हवा में मार करने वाली मध्यम-दूरी की मिसाइलें और एक विशेष पनडुब्बी-रोधी युद्ध प्रणाली शामिल है। ये प्रणालियाँ एक आधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से एकीकृत हैं, जो उभरते खतरों के प्रति त्वरित और सटीक प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाती है।

    लड़ाकू भूमिकाओं के अलावा, ‘तारागिरी’ को मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों के लिए भी डिज़ाइन किया गया है, जिससे शांति और संघर्ष-दोनों ही स्थितियों में इसकी अभियान क्षमता बढ़ जाती है।

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