नई दिल्ली। रूस और यूक्रेन के बीच जंग अब अपने छठे दिन में प्रवेश कर चुकी है। रूस की सेना यूक्रेन की राजधानी कीव पर बमबारी कर रही है तो वहीं खारकीव में भी संघर्ष जारी है। इन सबके बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने इस मसले पर फिर से बैठक बुलाई है। वहीं, एक तरफ युद्ध जारी है तो दूसरी तरफ दोनों देशों के बीच बातचीत भी शुरू हो गई है। आगे देखने वाली बात होगी कि यह संघर्ष किस तरफ आगे बढ़ता है। दरअसल, अब यूक्रेन के हालात को लेकर संयुक्त राष्ट्र भी एक्टिव मोड में दिख रहा है। यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र की जनरल असेंबली की इमरजेंसी बैठक के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी यूक्रेन के हालात को लेकर फिर से बैठक बुलाई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से ये जानकारी दी गई है कि यूक्रेन के प्रतिनिधि की ओर से 28 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र को दिए गए पत्र के एजेंडे पर ये बैठक होगी। मानवता को लेकर बने हालात पर चर्चा होगी। इससे पहले रूस ने सेना को कीव पर हमले तेज करने के आदेश दिए थे। एक रात की शांति के बाद रूसी सेना ने कीव और खारकीव में भारी बमबारी की है। कीव में कई धमाके सुने गए हैं। फिलहाल की स्तिथि के अनुसार रूस की तरफ से जो धमकी सामने आई है, उसके मुताबिक यूक्रेन पर रूस के हमले की वजह से अब परमाणु युद्ध छिड़ने का खतरा पैदा हो गया है। हालांकि दोनों के बीच बातचीत का रास्त जरूर खुल गया है, लेकिन रूस ने अपनी परमाणु मिसाइलों को तैनात करने के आदेश दे रखे हैं। वैसे तो रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अनुभवी नेता हैं, लेकिन यदि उन्होंने परमाणु युद्ध की ठान ली, तो आखिर उन्हें ऐसा करने से कौन रोक सकता है? यह अब सबसे बढ़ा सवाल बन गया है।
उधर, नाटो के एक पूर्व प्रमुख कमांडर जनरल सर एड्रियन ब्रैडशॉ भी कह चुके हैं कि रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध की वजह से परमाणु युद्ध छिड़ सकता है। बातचीत के बीच संघर्ष बढ़ रहा है तो यह भी बहुत ही चिंताजनक है। ऐसा माना जा रहा है कि यदि रूस ने परमाणु हमला किया तो ऐसा करने से उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन भी नहीं रोक सकते हं, क्योंकि वे अपना आधार खो चुके हैं। इसीलिए ऐसे हालात पैदा ना हो, इसके लिए दुनिया भारत की तरफ उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में रूस को परमाणु हमले से रोकने के लिए यह ताकत इसलिए है कि भारत रूस का परंपरागत, पुराना और गहरा मित्र है। यूएन में दो बार वोंटिंग से खुद को दूर करके उसने यह साबित भी कर दिया है। भारत भी अच्छे मित्र की तरह यह चाहता है कि रूस और पूरी दुनिया को नुकसान न पहुंचे, इसलिए वह रूस से यह कह सकता है कि दुनिया के लिए रूस शांति की राह पर ही चले, न कि न्यूक्लियर वीपन के उपयोग पर।

