पहले अपनी गिरिबां में झांकें, फिर दूसरों पर सवाल उठाना चाहिए : गौरव पुष्टि
राष्ट्र संवाद संवादाता
झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व विधायक कुणाल सारंगी द्वारा जमशेदपुर के सांसद श्री विद्युत वरण महतो के 15 वर्षों के संसदीय कार्यकाल पर उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए सांसद प्रतिनिधि गौरव पुष्टि ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल का अधिकार है, लेकिन सवाल तथ्यों और निष्पक्षता के आधार पर होने चाहिए। दूसरों के कार्यों पर प्रश्नचिह्न लगाने से पहले अपनी भूमिका और अपने राजनीतिक दल के योगदान का भी ईमानदारी से मूल्यांकन करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जिस नेता को बहरागोड़ा की जनता ने चुनाव में नकार दिया, वह आज अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए सोशल मीडिया के माध्यम से एकतरफा तस्वीर प्रस्तुत करने का प्रयास कर रहे हैं। जनता का जनादेश किसी भी जनप्रतिनिधि के कार्य, व्यवहार और विश्वसनीयता का सबसे बड़ा प्रमाण होता है। इसलिए जनता द्वारा दिए गए जनादेश का सम्मान करते हुए तथ्यों के आधार पर चर्चा होनी चाहिए, न कि केवल राजनीतिक लाभ के लिए बयानबाजी।
गौरव पुष्टि ने कहा कि सांसद श्री विद्युत वरण महतो के नेतृत्व में जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र में रेलवे, सड़क, आधारभूत संरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पहल हुई हैं। उनके प्रयासों से टाटानगर रेलवे स्टेशन से अनेक नई रेल सेवाओं का परिचालन प्रारंभ हुआ, जिससे क्षेत्र के लाखों यात्रियों को लाभ मिला। इसके अतिरिक्त रेल सुविधाओं के विस्तार, नई ट्रेनों के ठहराव तथा लंबित रेल परियोजनाओं को गति देने के लिए भी लगातार प्रयास किए गए।
उन्होंने कहा कि चाकुलिया–बुड़ामारा रेल परियोजना लंबे समय से क्षेत्र की महत्वपूर्ण मांग रही है। सांसद के निरंतर प्रयासों के कारण इस परियोजना को गति मिली और वर्तमान में इस दिशा में कार्य प्रगति पर है। परियोजना के पूर्ण होने के बाद सीमावर्ती एवं ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
गौरव पुष्टि ने कहा कि क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति दिलाने तथा उनके निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में भी सांसद की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बेहतर सड़क संपर्क किसी भी क्षेत्र के विकास की आधारशिला होता है और इस दिशा में लगातार कार्य किए गए हैं।
उन्होंने कहा कि यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसील) की खदानें पर्यावरण एवं वन स्वीकृतियों से संबंधित जटिलताओं के कारण संकट का सामना कर रही थीं। यदि समय पर समाधान नहीं निकलता तो हजारों श्रमिकों और उनके परिवारों की आजीविका प्रभावित हो सकती थी। सांसद श्री विद्युत वरण महतो ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार एवं संबंधित मंत्रालयों के समक्ष लगातार पहल की, जिसके परिणामस्वरूप आवश्यक प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया गया और खदानों का संचालन जारी रखने का मार्ग प्रशस्त हुआ। इससे न केवल रोजगार सुरक्षित हुए बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी स्थिरता मिली।
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना के संबंध में गौरव पुष्टि ने कहा कि यह परियोजना क्षेत्र के विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। हालांकि भूमि हस्तांतरण, विभिन्न प्रशासनिक स्वीकृतियों तथा राज्य सरकार से संबंधित प्रक्रियाओं में विलंब के कारण परियोजना अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बावजूद सांसद श्री विद्युत वरण महतो लगातार इस परियोजना की प्रगति के लिए प्रयासरत रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एयरपोर्ट परियोजना बंद नहीं हुई है, बल्कि विभिन्न प्रक्रियागत चरणों से गुजर रही है और बहुत जल्द इसके निर्माण कार्य के प्रारंभ होने की संभावना है। यह परियोजना पूर्वी सिंहभूम सहित पूरे कोल्हान क्षेत्र के औद्योगिक, व्यावसायिक और पर्यटन विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी।
उन्होंने कहा कि जमशेदपुर में एम्स जैसी उच्चस्तरीय स्वास्थ्य संस्था की स्थापना की मांग को भी सांसद महोदय द्वारा संसद के पटल पर प्रमुखता से उठाया गया है। क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और चिकित्सा ढांचे को मजबूत करने के लिए वे लगातार प्रयास कर रहे हैं।
गौरव पुष्टि ने कहा कि विकास केवल एक व्यक्ति या एक संस्था के प्रयासों से नहीं होता, बल्कि इसमें केंद्र सरकार, राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सामूहिक भूमिका होती है। इसलिए किसी भी विषय पर चर्चा करते समय तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करने के बजाय समग्र दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
उन्होंने अंत में कहा कि जनता अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से प्रभावित नहीं होती। जनता विकास कार्यों, जनहित के मुद्दों और जमीन पर दिखाई देने वाले परिणामों के आधार पर निर्णय लेती है। इसलिए विपक्ष को अनावश्यक भ्रम फैलाने और राजनीतिक स्वार्थ के लिए ढिंढोरा पीटने के बजाय क्षेत्र के विकास के लिए सकारात्मक एवं रचनात्मक सहयोग करना चाहिए।

