सरयू राय ने विधानसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र
राँची, 22 दिसम्बर 2021
जमशेदपुर की मोहरदा पेय जलापूर्ति परियोजना के बारे में विधायक सरयू राय के प्रश्न का भ्रामक उत्तर नगर विकास एवं आवास विभाग और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने दिया. उत्तर से असंतुष्ट होकर श्री राय ने विधानसभा अध्यक्ष से ग़लत उतर देने वालों पर कारवाई करने के लिये कहा.
श्री राय ने इस बारे में विधानसभा अध्यक्ष को एक पत्र भेजा है. पत्र में अनुरोध है कि विधानसभा को भ्रामक उत्तर देकर गुमराह करने वालों पर कारवाई करें. दोनों प्रश्न एवं प्रश्नों के उत्तर संलग्न है. पत्र हू-ब-हू नीचे दिया जा रहा है:-
माननीय अध्यक्ष महोदय,
झारखण्ड विधान सभा, राँची।
आज दिनांक 22.12.2021 को सभा पटल पर मेरे द्वारा दो अल्पसूचित प्रश्नों का लिखित उत्तर राज्य सरकार के क्रमशः पेयजल एवं स्वच्छता विभाग और नगर विकास एवं आवास विभाग ने जमशेदपुर के मोहरदा पेयजलापूर्ति के बारे में दिया है। समय-सीमा की बाध्यता के कारण इन उत्तरों पर सदन में विमर्श नहीं हो पाया। फलस्वरूप पूरक प्रश्नों के माध्यम से संबंधित उत्तरों में निहित गलतियों को सही करने का मौका नहीं मिल पाया। इसके कारण भवदीय का ध्यान इन उत्तरों में निहित गलतियों की ओर आकृष्ट करा रहा हूँ। ताकि विहित प्रक्रिया के माध्यम से इनका परिमार्जन किया जा सके।
(क) मेरे अल्पसूचित प्रश्न संख्या अ.सू.-16 का जो उत्तर (संलग्न) पेयजल एवं स्व्च्छता विभाग ने दिया है, वह अधूरा, त्रुटिपूर्ण और भ्रमित करने वाला है। परियोजना के डीपीआर में इंटेकवेल के साथ बनने वाले सेटलिंग पौण्ड का कोई उत्तर इन्होंने नहीं दिया है। योजना में केवल एक जीएसआर है। जिसकी स्थिति जर्जर हो गयी है। केवल 10 वर्षों में ही जलमीनार जर्जर हो गये है। जिस कारण इनकी सफाई नहीं हो पा रही है। विभाग को इस परियोजना का डीपीआर प्रस्तुत करना चाहिए, ताकि यह जानकारी हो सके कि कितनी आबादी के लिए यह परियोजना तैयार की गई थी और इसे तैयार करने का उद्देश्य क्या था? किस कारण से विभिन्न जलमीनारों में पानी भरने के लिए अलग-अलग राईजिंग मेन लाईन नहीं बिछाये गये है, जिसके कारण किसी मुहल्ले में सुबह, किसी मुहल्ले में दोपहर और किसी में शाम को जलापूर्ति होती है। विभाग का यह कथन सरसर गलत है कि वर्ष 2017 तक पेयजलापूर्ति सुचारू रूप से की जा रही थी। वास्तव में इस योजना की विफलता को ध्यान में रखते हुए ही इसे 2017 में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से नगर विकास विभाग और तत्पश्चात जुस्को को हस्तांतरित किया गया।
अनुरोध है कि विभाग से इस योजना का डीपीआर मांगने तथा परियोजना के घटिया निर्माण के बारे में वस्तुस्थिति जानने तथा प्रश्न के उत्तर की गलतियों एवं विसंगतियों का परिमार्जन करने के लिए विधिसम्मत कार्रवाई करने की कृपा करेंगे।
(ख) मेरे अल्पसूचित प्रश्न संख्या-8 का जो उत्तर (संलग्न) नगर विकास एवं आवास विभाग ने दिया है, वह अत्यंत भ्रामक और गलतियों से भरा पड़ा है। कंडिका-2 में मैंने स्पष्ट पूछा है कि मोहरदा पेयजलापूर्ति योजना का समुचित उन्नयन एवं मरम्मति नहीं हो पाने के कारण परियोजना क्षेत्र के विभिन्न मुहल्लों में कहीं सुबह 7 बजे, कहीं दोपहर 2 बजे, कहीं शाम 7 बजे पेयजल की आपूर्ति होती है, वह भी स्वच्छ नहीं। विभाग ने मेरे इस प्रश्न का उत्तर दिया ही नहीं है और कहा है कि प्रतिदिन सुबह 5 बजे के पहले पेयजल की आपूर्ति प्रारंभ हो जाती है, जो 12 से 13 घंटे तक पूरे क्षेत्र को आच्छादित करती है। विभाग का यह उत्तर असत्य है। इस संबंध में पेयजलापूर्ति का संचालन करनेवाला संस्था जुस्को द्वारा प्रत्येक दिन जारी की जाने वाली आपूर्ति शिड्यूल की कुछ प्रतियाँ आपके अवलोकनार्थ संलग्न कर रहा हूँ। जिससे पता चलेगा कि दिन में कितने बजे किस मुहल्ले में पानी जाता है। मेरे प्रश्न की कंडिका-3 के बारे में नगर विकास विभाग ने कहा है कि कुल 8 पानी टंकियों में से 4 पानी टंकियों की सफाई कर दी गई है। शेष 4 पानी टंकियों में पहुँचने में कठिनाई होने के कारण उनकी सफाई नहीं हुई है। विभाग का यह उत्तर पूर्णतया गलत है। वस्तुस्थिति यह है कि पिछले 12 वर्षों से एक भी पानी टंकी की सफाई नहीं हुई है। इसी तरह इंटेक वेल में फँस जाने वाले नदी के कचरा को साफ करके पेयजलापूर्ति बहाल कर देने की बात भी सही नहीं है। इसके कारण 3-4 दिनों तक जलापूर्ति बन्द रहती है।
उपर्युक्त विवरण के आलोक में अनुरोध है कि दोनों विभागों से गलत उत्तर देने का कारण पूछा जाय। ताकि इसकी जिम्मेदारी सुनिश्चित हो सके और करोड़ों रूपया खर्च करके बनी पेयजलापूर्ति परियोजना को भविष्य में सुचारू रूप से चलाया जा सके।
सादर,
भवदीय
(सरयू राय)

