भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का अड्डा बनता जा रहा है यूसील?
“टेंडर प्रक्रिया पर विवाद, परचेज डिपार्टमेंट घेरे में” यूसील अस्पताल में भोजन की गुणवत्ता पर उठे सवाल मरीजों और परिजनों में नाराजगी, प्रबंधन चुप
राष्ट्र संवाद मुख्य संवाददाता
जादूगोड़ा:यूरिनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (यूसील) में लगातार अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप गहराते जा रहे हैं। ताजा मामला मिल माइंस कैंटीन और घटिया सीमेंट की खरीदारी से जुड़ा है।

कैंटीन टेंडर में फर्जीवाड़ा, घटिया खाने से मजदूर परेशान
सूत्रों के अनुसार, यूसील प्रबंधन ने हाल ही में मिल माइंस कैंटीन का एक साल का टेंडर जमुना एंड फैमिली को 1 करोड़ 61 लाख रुपये की लागत पर दिया है। टेंडर के तहत सुबह का नाश्ता, दोपहर का भोजन, शाम का नाश्ता, रात का खाना और नाइट शिफ्ट पैकेट की आपूर्ति शामिल है। हालांकि, टेंडर शुरू हुए अभी एक हफ्ता भी नहीं हुआ है और कैंटीन की खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

मिल कर्मी मंगल बनकीरा ने बताया कि 200 से अधिक मजदूरों ने हस्ताक्षर कर यूसील प्रबंधन, मिल अधीक्षक और पर्सनल विभाग को लिखित शिकायत दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जब कैंटीन की व्यवस्था सीधे प्रबंधन के हाथ में थी, तब खाने की गुणवत्ता बेहतर थी। लेकिन निजी हाथों में जाने के बाद खाने की गुणवत्ता बेहद घटिया हो गई है।

शिकायत में यह भी आरोप है कि टेंडर में तय की गई उच्च गुणवत्ता की सामग्री की जगह सस्ती और घटिया सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। आशीर्वाद आटे की जगह ढीला आटा, सनफ्लावर तेल की जगह महाकोष तेल, नामी मसालों की जगह घटिया मसाले, ब्रांडेड बेसन की जगह कम दाम का बेसन, सरसों तेल की जगह लोकल तेल, और कोऑपरेटिव से खरीदने की बजाय बाजार से सस्ते माल का इस्तेमाल हो रहा है।

कर्मियों ने यह भी आरोप लगाया है कि जमुना एंड फैमिली ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए टेंडर हासिल किया। टेंडर में क्रेडेंशियल्स के लिए दीप इंटरप्राइजेज का दस्तावेज लगाया गया, जो वास्तव में ईटा, गिट्टी और बालू का सप्लायर है और जीएसटी भी जमा नहीं करता। दीप इंटरप्राइजेज के मालिक दीपक दास ने स्वीकार किया है कि उनके कागजात का उपयोग हुआ है और इसमें लेनदेन भी हुआ है।

परचेज विभाग पर सवाल: घटिया सीमेंट ऊंचे दाम पर खरीदा जा रहा कैंटीन टेंडर विवाद के अलावा, यूसील परचेज विभाग में घटिया सीमेंट की खरीद को लेकर भी गंभीर आरोप लगे हैं। बताया जा रहा है कि यूसील पिछले कई वर्षों से एक ऐसे ब्रांड का सीमेंट खरीद रहा है, जिसकी न तो झारखंड में कहीं बिक्री होती है, न ही केंद्र सरकार द्वारा जारी PSU के लिए मान्यता प्राप्त सीमेंट निर्माताओं की सूची में उसका नाम दर्ज है। करीब एक दशक पहले तक यूसील राष्ट्रीय स्तर के ब्रांडेड सीमेंट निर्माताओं से खरीद करता था, जिससे कार्य की गुणवत्ता बेहतर रहती थी। लेकिन अब स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं से ऊंचे दाम पर घटिया सीमेंट खरीदा जा रहा है।

आरोप है कि परचेज विभाग के अधिकारी अपने चहेते सप्लायर्स को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसे टेंडर शर्तें तैयार करते हैं, जिनसे बड़े और मान्यता प्राप्त निर्माता निविदा में भाग नहीं ले पाते। उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज मांगकर्ता, लेखा विभाग, अंकेक्षण विभाग और परचेज विभाग की मिलीभगत से घटिया सामग्री की खरीद और टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं।

कर्मचारियों और स्थानीय संगठनों ने यूसील में कैंटीन से लेकर सीमेंट खरीद तक फैले इस भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और कर्मचारियों को बेहतर सुविधा सुनिश्चित की जा सके।

