राष्ट्र संवाद संवाददाता
विस्थापितों ने पिंटू चकिया पर कार्रवाई करने की मांग की। अवैध वसूली पर भारी नाराजगी। यूसील अधिकारियों पर भी गंभीर आरोप
पूर्वी सिंहभूम जिले के जादूगोड़ा क्षेत्र में यूसीआईएल प्रबंधन के खिलाफ स्थानीय ग्राम सभाओं का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को नाम्दुप गांव में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में दर्जनों गांवों के विस्थापित एवं प्रभावित ग्रामीण एकजुट हुए और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया।
बैठक में नांदूप और तुरामडीह ग्राम सभा के प्रतिनिधियों ने मजदूरों की छंटनी, अवैध वसूली और पर्यावरणीय समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बताया। ग्रामीणों का आरोप है कि यूसीआईएल के ठेकेदार द्वारा विस्थापित परिवारों के करीब 10 मजदूरों को बिना किसी कारण काम से हटा दिया गया है, जबकि पूर्व में उन्हें बहाल करने का आश्वासन दिया गया था।
इसके साथ ही तुरामडीह माइंस में कार्यरत मजदूरों से प्रतिदिन लगभग 50 रुपये की अवैध वसूली किए जाने का आरोप भी लगाया गया। ग्रामीणों ने कहा कि विरोध करने पर मजदूरों को काम से बैठा दिया जाता है, जिससे उनमें भय का माहौल बना हुआ है।
बैठक में यह भी मुद्दा उठा कि खदान क्षेत्र में हो रही लगातार ब्लास्टिंग से पुराने नांदूप गांव के घरों में दरारें आ रही हैं और खदान से निकलने वाली धूल से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने इन समस्याओं पर तत्काल रोक लगाने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग की।
बाघराय मार्डी को सौंपा आंदोलन का नेतृत्व
बैठक में सर्वसम्मति से पूर्व जिला परिषद सदस्य बाघराय मार्डी को आंदोलन का नेतृत्व सौंपा गया। इस दौरान ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया और अपनी समस्याओं से अवगत कराया।
बाघराय मार्डी ने मौके पर कहा कि
“विस्थापित और प्रभावित ग्रामीणों के साथ लंबे समय से अन्याय हो रहा है। मजदूरों की छंटनी, अवैध वसूली और पर्यावरणीय नुकसान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि प्रबंधन जल्द ही इन समस्याओं का समाधान नहीं करता है, तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा और जरूरत पड़ी तो माइंस का काम पूरी तरह ठप कर दिया जाएगा।”
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यूसीआईएल तुरामडीह माइंस के मुख्य द्वार पर जोरदार आंदोलन किया जाएगा।
ग्राम सभाओं के प्रतिनिधियों ने कहा कि वर्षों से चल रही उपेक्षा और शोषण के कारण अब ग्रामीण आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। उन्होंने प्रशासन से भी मामले में हस्तक्षेप कर न्याय दिलाने की मांग की है।
इस बैठक के बाद पूरे क्षेत्र में आंदोलन की रणनीति को लेकर हलचल तेज हो गई है और आने वाले दिनों में यूसीआईएल प्रबंधन के खिलाफ बड़ा आंदोलन खड़ा होने की संभावना जताई जा रही है।
यूसील कमी पिंटू चकिया पर अधिकारियों के साथ मिलकर ठेका मजदूरों का शोषण करने का भी आरोप लग रहा है ।
विस्थापितों का कहना कि उनके द्वारा प्रत्येक मजदूरों से अवैध वसूली की जाती है और ठेका मजदूरों को परेशान किया जाता है साथ-साथ कंपनी में घुसने वाले प्रत्येक गाड़ी से भी पैसा लिया जाता है इसकी शिकायत यूसिल प्रबंधन से करने से कोई सुनवाई नहीं होती है पिंटू चकिया पर भी कार्रवाई करने की मांग की है।
नहीं तो जोरदार आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
विस्थापितों का कहना है कि कंपनी गेट के बाहर एक रूम बना हुआ है वहीं से अवैध लेनदेन किया जाता हे जिसमें अधिकारियों की भी शह उन्हें मिली हुई है।

