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    Home » यूसील तुरामडीह माइंस में विस्थापितों का फूटा गुस्सा, पिंटू चाकिया पर अवैध वसूली के आरोप; आंदोलन की चेतावनी
    झारखंड सरायकेला-खरसावां

    यूसील तुरामडीह माइंस में विस्थापितों का फूटा गुस्सा, पिंटू चाकिया पर अवैध वसूली के आरोप; आंदोलन की चेतावनी

    Aman OjhaBy Aman OjhaMay 12, 2026No Comments3 Mins Read
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    राष्ट्र संवाद संवाददाता

     

    ग्रामीणों ने पिंटू चकिया पर लगाए गंभीर आरोप

    यूसील तुरामडीह माइंस क्षेत्र में विस्थापित एवं प्रभावित ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। तुरामडीह एवं नान्दुप ग्रामसभाओं ने अलग-अलग पत्र जारी कर झामुमो नेता बघराय मार्डी से आंदोलन का नेतृत्व करने और विस्थापितों की लड़ाई को आगे बढ़ाने की अपील की है। ग्रामसभाओं द्वारा दिए गए पत्रों में मजदूरों को काम से बैठाने, गेट पास रोकने, अवैध वसूली, स्थायी नौकरी नहीं देने, ब्लास्टिंग से घरों में दरार पड़ने और धूल-कण से स्वास्थ्य प्रभावित होने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। तुरामडीह ग्रामसभा द्वारा उप महाप्रबंधक कार्मिक एवं औद्योगिक संबंध, यूसील जादूगोड़ा को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि गांव के 8 विस्थापित एवं प्रभावित ठेका मजदूरों को बिना किसी स्पष्ट कारण के काम से बैठा दिया गया है। इससे गांव में भारी नाराजगी है। ग्रामसभा ने आरोप लगाया कि मजदूरों से प्रतिदिन 50 रुपये की अवैध वसूली की जा रही है और पैसा नहीं देने पर उन्हें काम से बैठा दिया जाता है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यूसील तुरामडीह माइंस परिसर में कार्यरत कुछ कर्मचारियों एवं सहयोगियों द्वारा मजदूरों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है। ग्रामसभा ने विशेष रूप से पिंटू चाकिया उर्फ मिंटू चाकिया, जिनका एम्प्लोयी नंबर . 20009 तथा देसिग्नेशन हेल्पर सी बताया गया है, का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि मेन गेट के सामने अवैध वसूली एवं अनधिकृत गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

    ग्रामसभा ने मांग की है कि , काम से बैठाए गए सभी 8 मजदूरों को तत्काल दोबारा काम पर रखा जाए। वर्ष 1983-84 एवं 2007 में अधिग्रहित भूमि के विस्थापित परिवारों को स्थायी नौकरी दी जाए। मृतक एवं रिटायर्ड विस्थापित कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी में बहाल किया जाए। वहीं नान्दुप ग्रामसभा द्वारा प्रबंधक कार्मिक, यूसील तुरामडीह माइंस को दिए गए पत्र में कहा गया है कि नान्दुप गांव के 10 विस्थापित एवं प्रभावित परिवारों के युवकों को ठेकेदार द्वारा बिना कारण काम से निकाल दिया गया। ग्रामसभा ने दावा किया कि 18 मार्च 2026 को यूसील प्रबंधन ने लिखित आश्वासन दिया था कि मजदूरों को पुनः काम पर रखा जाएगा, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई। नान्दुप ग्रामसभा ने भी अपने पत्र में पिंटू चाकिया उर्फ मिंटू चाकिया एवं उनके सहयोगियों पर अवैध वसूली का आरोप लगाया है। ग्रामसभा का कहना है कि ठेका मजदूरों के गेट पास नवीनीकरण के नाम पर मजदूरों को परेशान किया जाता है और सुपरवाइजर या एचआर तक पास पहुंचने से पहले अवैध हस्तक्षेप किया जाता है।

    ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि यूसील माइंस में लगातार हो रही ब्लास्टिंग के कारण पुराने नान्दुप गांव के कई घरों की दीवारों में दरारें आने लगी हैं। साथ ही माइंस से निकलने वाली धूल और हवा में उड़ते कणों से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है। ग्रामसभा ने प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

    पत्र के अंत में नान्दुप ग्रामसभा ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो यूसील तुरामडीह माइंस के मेन गेट को जाम कर सभी कार्य ठप कर दिए जाएंगे, जिसकी जिम्मेदारी स्वयं यूसील प्रबंधन की होगी। इन दोनों ग्रामसभाओं ने झामुमो नेता बघराय मार्डी से आग्रह किया है कि वे विस्थापितों, प्रभावित मजदूरों एवं ग्रामीणों की आवाज बनकर आंदोलन का नेतृत्व करें और उनकी मांगों को सरकार से मांगे।

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