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    4 दिसंबर की सुबह आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों से टकराएगा तूफान जवाद

    Devanand SinghBy Devanand SinghDecember 3, 2021No Comments3 Mins Read
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    नई दिल्ली. आंध्र प्रदेश में एक बार फिर तूफान जवाद का कहर देखने को मिल सकता है. जवाद तूफान का केंद्र थाइलैंड है. वहां से यह अंडमान सागर को पार कर शुक्रवार के शाम तक तटीय इलाकों पर असर शुरू होने की उम्मीद की जा रही है.

    मौसम विज्ञान विभाग ने साइक्लोन जवाद के 4 दिसंबर की सुबह तक आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटों से टकराने की उम्मीद की जा रही है. मॉनसून के लौटने के बाद पहली बार यह चक्रवाती तूफान आ रहा है.

    मौसम विभाग की ओर से जारी किए गए पूर्वानुमान के तहत तीन दिसंबर को चक्रवात के बंगाल की खाड़ी में पहुंचने और इसका केंद्र बनने की उम्मीद की जा रही है. इस दौरान 117 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है. साइक्लोन जवाद की वजह से तटीय आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश की आशंका जताई गई है. इसके अलावा उत्तरी महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिमी तटीय इलाकों में भी बारिश की भविष्यवाणी मौसम विभाग की ओर से की गई है. मौसम विभाग का कहना है कि अमूमन नवंबर-दिसंबर में चक्रवात के कारण बारिश होती है.

    बंगाल में भी भारी बारिश का अलर्ट

    चक्रवात जवाद के प्रभाव को देखते हुए मौसम विभाग के अलीपुर क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से भी अलर्ट जारी किया गया है. विभाग ने बंगाल के तटीय इलाकों से मूसलाधार बारिश की आशंका जाहिर की गई है. बंगाल सरकार ने भी अलर्ट जारी किया है. 24 परगना, मिदनापुर, झाड़ग्राम, हुगली, नादिया, हावड़ा, मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. शनिवार सुबह से ही इन इलाकों में भारी और कई इलाकों में गरज के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से हवा भी चल सकती है.

    देश में हर साल औसत पांच चक्रवात

    भारत में चक्रवात के कारण बारिश का असर दिखता है. हर साल औसतन पांच चक्रवात आते हैं. वर्ष 1891 से वर्ष 2017 तक के डाटा एनालिसिस में इस बात का पता चलता है. वर्ष 1970 से देश में करीब 174 चक्रवात आ चुके हैं. चक्रवाती तूफानों के मामले में भारत अमेरिका, फिलीपींस और चीन के बाद चौथे स्थान पर आता है. देश में अरब सागर की तुलना में बंगाल की खाड़ी में सबसे अधिक एक्टिव बेसिन हैं, जिससे यहां से उठने वाले साइक्लोन की फ्रीक्वेंसी और तीव्रता काफी ज्यादा रहती है.

    कम दबाव का क्षेत्र बनने से बढ़ता है साइक्लोन

    गर्म इलाकों के समुद्र में मौसम की गर्मी के कारण हवा गर्म होती और ऊपर की तरफ उठने लगती है. वायुमंडल की नमी के साथ मिलकर यह बादल बनाती है. नमी को सोखने के बाद वायुमंडल में जो खाली स्थान बनता है, वहां हवा तेजी से धूमती है और यह आगे की तरफ बढ़ने लगती है. इन तेज हवाओं का व्यास हजारों किलोमीटर का हो सकता है. इस व्यास के आधार पर ही साइक्लोन तेज हवा के साथ बारिश का प्रभाव छोड़ती है.

    साउदी अरब ने दिया है नाम

    साइक्लोन का नाम इस बार साउदी अरब ने दिया है. अरबी में जवाद का अर्थ दयालु होता है. चक्रवात का असर भयानक नहीं होने वाला है, इसलिए यह नाम सूट करता है. इसके पश्चिम बंगाल तट को पार करने के बाद झारखंड के धनबाद होते हुए मैदानी इलाकों तक पहुंचने की संभावना जताई गई है. इसके असर से झारखंड, बिहार और यूपी के भी कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है.

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