“दलमा पत्थर नहीं, हमारी पहचान है” प्रस्तावित परियोजनाओं के विरोध में दलमा तराई में ऐतिहासिक महा जन सम्मेलन
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। दलमा तराई क्षेत्र के माकुलाकोचा फुटबॉल मैदान (हिरण पार्क के समीप) में दलमा क्षेत्र ग्राम सभा सुरक्षा मंच (कोल्हान प्रमंडल) के तत्वावधान में महा जन सम्मेलन आयोजित किया गया। “दलमा पत्थर नहीं — हमारी पहचान, संस्कृति और अस्तित्व है” के उद्घोष के साथ आयोजित इस सम्मेलन में दलमा तराई के विभिन्न गांवों से हजारों ग्राम सभा प्रतिनिधि, महिलाएं, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
सम्मेलन प्रस्तावित बंदरगाह परियोजना एवं क्षेत्र में संचालित योजनाओं के विरोध में आयोजित किया गया। वक्ताओं ने आशंका जताई कि इन परियोजनाओं से दलमा की प्राकृतिक संरचना, वन संपदा, वन्यजीव, जल स्रोत तथा स्थानीय समुदायों के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
मुख्य वक्ताओं में सुरेश चंद्र सोय, माधव चंद्र कुंकल, रेयांस सायड और दिनकर कच्छप शामिल थे। सभी ने कहा कि क्षेत्र की जनता विकास विरोधी नहीं है, लेकिन ऐसा विकास स्वीकार्य नहीं होगा जो गांवों और ग्राम सभाओं को कमजोर करे।
वक्ताओं ने संविधान की पाँचवीं अनुसूची, अनुच्छेद 244(1), पेसा अधिनियम 1996, वन अधिकार कानून 2006 और भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 का उल्लेख करते हुए कहा कि जल–जंगल–जमीन पर ग्राम सभा का अधिकार सर्वोपरि है और बिना पूर्व सहमति किसी परियोजना को लागू करना लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है।
सम्मेलन में गांव-केंद्रित और पर्यावरण संतुलन आधारित विकास मॉडल की मांग की गई। अंत में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर यह संकल्प लिया गया कि दलमा क्षेत्र में जबरन भूमि अधिग्रहण या कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने वाली नीतियों का संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
सम्मेलन ने स्पष्ट संदेश दिया कि दलमा की पहाड़ियां क्षेत्र की सामूहिक अस्मिता और धरोहर हैं, जिनकी रक्षा के लिए ग्राम सभाएं एकजुट रहेंगी।

