चतरा लोकसभा का चुनाव पहुंचा रोचक दौर में
भाजपा कांग्रेस का सीधा मुकाबला
त्रिकोणीय संघर्ष बनाने में जुटे नागमणी
बड़े पैमाने पर वोटों के बंटवारे की संभावना
बसपा और जयराम महतो की पार्टी ने प्रमुख दलों की उड़ाई नींद
चंद्रेश शर्मा
चतरा। झारखंड के चतरा,हजारीबाग और कोडरमा सीट पर 20 मई को वोट डाले जाएंगे। चतरा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा,कांग्रेस और बसपा के प्रत्याशी जोर आजमाइश में लगे हैं। भाजपा प्रत्याशी के तौर पर अपनी किस्मत आजमा रहे कालीचरण सिंह चुनाव मैदान में बिल्कुल ही नए हैं।श्री सिंह को सांगठनिक चुनाव लडने का अनुभव तो है परंतु चुनाव मैदान में उनकी टक्कर राजनीति के धुरंधरों से है। शह मात का खेल जारी है।
श्री सिंह के सामने महागठबंधन से कांग्रेस प्रत्याशी के एन त्रिपाठी डाल्टनगंज के पूर्व विधायक रह चुके हैं तो दूसरी ओर बसपा के टिकट पर किस्मत आजमा रहे नागमणी राजद से वर्ष 1999 में चतरा के सांसद रह चुके हैं। इसके आलावा चुनाव मैदान में कई निर्दलीय भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।इस परिस्थिति में चतरा का चुनाव रोचक दौर में पहुंच चुका है। इस चुनावी महासंग्राम में बड़े पैमाने पर वोटों के बंटवारे और भीतरघात की संभावना भी व्यक्त की जा रही है। स्थानीयता के मुद्दे पर भी मतदाताओं में अभी भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। एक और जहां भाजपा कार्यकर्ता कालीचरण सिंह को स्थानीय मान रहे हैं,वहीं महागठबंधन के लोग के एन त्रिपाठी को। कांग्रेस प्रत्याशी के एन त्रिपाठी स्वयं को 1532 का खतियानी होने का दावा करते हैं।दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी कालीचरण सिंह को बिहारी बताने से नहीं चूकते। इन सबके बीच दोनो प्रमुख पार्टियों भाजपा और कांग्रेस में रूठने वालों की संख्या भी बढ़ी हुई नजर आ रही है।
भाजपा द्वारा चतरा लोकसभा सीट से 2014 और 20219 में सांसद रहे सुनील कुमार सिंह का टिकट काटने के बाद झारखंड में राजपूत जाति को एक भी सीट नहीं मिली है। इससे भीतरखाने आक्रोश देखने को मिल रहा है।राजपूत जाति को भाजपा का परंपरागत वोट माना जाता है। हालांकि पार्टी की ओर से लगातार डैमेज कंट्रोल की कोशिश की जा रही है। परंतु मन में जो खाई बन गई है,उसको पाटना आसान नहीं लग रहा। फिर भी कोशिश जारी है। वहीं गंझु भोक्ता समाज के सर्वमान्य नेता भाजपा के पूर्व विधायक रहे जयप्रकाश भोक्ता ने पार्टी से बगावत कर निर्दलीय नामांकन किया था,लेकिन डैमेज कंट्रोल कर रही टीम ने जयप्रकाश को नामांकन वापसी के लिए मना लिया। जानकार बताते हैं कि नामांकन वापसी में जयप्रकाश भोक्ता ने समाज की सहमति नहीं ली। सूत्रों की माने तो जयप्रकाश के निर्णय से गंझु भोक्ता समाज ने किनारा कर लिया है।
वहीं गंझु समाज से दर्शन गंझु भी चुनाव मैदान में हैं। इनको अपने समाज के वोटरों पर पूरा भरोसा है।इस परिस्थिति में भाजपा के कैडर वोटर रहे गंझु भोक्ता समाज के लोग क्या गुल खिलाएंगे। यह एक बड़ा सवालिया निशान है। वहीं कांग्रेस के अंदर खाने भी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा। उलगुलान रैली में कांग्रेस व राजद कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट को राजद नेता भूलना नहीं चाहते। मुस्लिम नेता भी सम्मान नहीं मिलने से नाराज दिख रहे। दूसरी ओर संयुक्त बिहार में राजद के पूर्व सांसद रहे नागमणी ने बसपा से पर्चा भरा है। नागमणी का कुशवाहा वोटरों पर पकड़ बताई जाती है। इसके अलावा इन्हे मुस्लिम वोटरों पर भी भरोसा है। इन्हे उम्मीद है कि महागठबंधन और भाजपा के नाराज वोटरों का लाभ इन्हे ही मिलेगा। वहीं झारखंड की राजनीति में टाइगर के नाम से चर्चित जयराम महतो की पार्टी ने भी यहां से युवा उम्मीदवार उतारा है। युवाओं के बीच लोकप्रिय दीपक कुमार गुप्ता भी पूरे दमखम के साथ मैदान में अड़े हैं। जानकारों की माने तो हाल के दिनों में जयराम महतो चतरा के बाबा घाट मैदान में विशाल रैली कर राजनीतिक दलों की नींद उड़ा चुके हैं।
रही सही कसर राजपूत जाति से आनेवाले रांची के मीनाक्षी नेत्रालय के युवा चिकित्सक अभिषेक सिंह भी पूरी कर रहे हैं। सामाजिक कार्यों में रुचि रखनेवाले डा अभिषेक सिंह ने लोकसभा क्षेत्र में हजारों लोगों के आंखो का निःशुल्क इलाज किया है। इनको भी भरोसा है कि इनके सेवा भाव को भी नजरंदाज नहीं किया जाएगा। आपको बताते चलें कि चतरा में पांच विधानसभा (सिमरिया, चतरा, मनिका, लातेहार और पांकी) सीटें हैं। इनमें सिमरिया सीट पर भाजपा के किशुन दास, चतरा में राजद के सत्यानंद भोक्ता, मनिका में कांग्रेस के रामचंद्र सिंह, लातेहार में झामुमो के बैद्यनाथ राम और पांकी में भाजपा के कुशवाहा शशिभूषण मेहता की जीत हुई थी। पांच में से दो सीटों पर भाजपा और तीन पर इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी जीते थे। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि किस विधानसभा से कौन सी पार्टी बढ़त बनाती है। बहरहाल सबकी निगाहें 20 मई को होनेवाले मतदान पर टिकी हैं।

