चंपई सोरेन ने ओत् गुरु कोल लको बोदरा को किया नमन, हो भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग
राष्ट्र संवाद संवाददाता
सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर प्रखंड अंतर्गत समरसाई में आदिवासी ‘हो’ भाषा की वारंङ क्षिति लिपि के निर्माता और महान साहित्यकार ओत् गुरु कोल लको बोदरा जी की जयंती पर, उनकी प्रतिमा को नमन किया।
झारखंड, बंगाल, ओडिशा समेत कई राज्यों में बोली जाने वाली आदिवासी हो समाज की “हो भाषा” को भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाना चाहिए। इस से इस भाषा के साहित्य एवं संस्कृति का विकास तेजी से होगा।
मेरा स्पष्ट तौर पर मानना है कि अपनी भाषाओं, परंपराओं एवं संस्कृति के प्रति सजग रह कर ही आदिवासी समाज अपने अस्तित्व को बचा सकता है।
मेरे कार्यकाल में हो, संताली, मुंडारी समेत सभी आदिवासी एवं स्थानीय भाषाओं में प्राथमिक स्तर से शिक्षा को लेकर कैबिनेट से स्वीकृति मिली थी, और शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू हुई थी।

