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    बहरागोड़ा के परमेश्वर घोष की सफलता: आधुनिक खेती से बने आत्मनिर्भर, दूसरों को दे रहे प्रेरणा

    Devanand SinghBy Devanand SinghOctober 13, 2026No Comments2 Mins Read
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    बहरागोड़ा के परमेश्वर घोष की सफलता: आधुनिक खेती से बने आत्मनिर्भर, दूसरों को दे रहे प्रेरणा

    राष्ट्र संवाद संवाददाता
    बहरागोड़ा:पारंपरिक खेती से हटकर नई सोच और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर बहरागोड़ा प्रखंड के पाथरी पंचायत अंतर्गत गोहालडीहि गांव के किसान परमेश्वर घोष ने अपनी तकदीर बदल दी है।किसान परमेश्वर घोष का कहना है कि आज के समय में स्मार्ट और आधुनिक खेती का चलन तेजी से बढ़ रहा है। इसी कड़ी में ‘अगेती खेती’ उनके लिए वरदान साबित हुई है। इस तकनीक के तहत फसलों की बुवाई उनके सामान्य सीजन से कुछ समय पहले की जाती है। जब बाजार में उस सब्जी की आवक कम और मांग अधिक होती है, तब उनकी फसल तैयार होकर बाजार में पहुंच जाती है। इससे उन्हें अपनी उपज का रिकॉर्ड तोड़ और ऊंचा दाम मिलता है।
    60 से 90 दिनों में तैयार होती है फसल
    धान जैसी पारंपरिक फसलों से साल में केवल एक बार आमदनी होती है, जबकि सब्जियों की खेती से नियमित नकदी हाथ आती है। बैंगन, भिंडी, टमाटर, मिर्च, कद्दू और गोभी जैसी फसलें महज 60 से 90 दिनों में बाजार में बिकने के लिए तैयार हो जाती हैं। कम लागत, कम समय और बेहतर पैदावार के साथ-साथ जमशेदपुर, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की नजदीकी सीमाओं पर इन सब्जियों की भारी मांग होने के कारण उन्हें बंपर मुनाफा हो रहा है।परमेश्वर घोष की यह सफलता साबित करती है कि अगर सही तकनीक, कड़ी मेहनत और पक्का इरादा हो, तो कृषि क्षेत्र में भी समृद्धि की नई इबारत लिखी जा सकती है।

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