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    Home » गोजए गोरखपुर में शहीदों को श्रद्धांजलि: याद किए गए भगत सिंह
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    गोजए गोरखपुर में शहीदों को श्रद्धांजलि: याद किए गए भगत सिंह

    Devanand SinghBy Devanand SinghMarch 23, 2026No Comments3 Mins Read
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    शहीदों को श्रद्धांजलि
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    गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन (गोजए) में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के बलिदान को याद करते हुए ‘शहीदों को श्रद्धांजलि’ दी गई। पढ़ें कार्यक्रम की पूरी रिपोर्ट।

    प्राणोत्सर्ग के साथ भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु कॉलजयी हो गए : रत्नाकर
    राष्ट्र संवाद संवाददाता
    गोरखपुर. अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव जी ने देश हित में प्राणोत्सर्ग की जो राह दिखाई, उसने न केवल अंग्रेजों के सत्ता की नीव हिला दी, वरन स्वयं उनको कालजई बना दिया.
    उक्त विचार आज गोरखपुर जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सभागार में अमर शहीदों की शहादत को याद करते हुए एसोसिएशन के अध्यक्ष रत्नाकर सिंह ने व्यक्त किया. श्री सिंह ने कहा की 30 अक्टूबर 1928 में साइमन कमीशन का विरोध कर रहे लाला लाजपत राय पुलिस अधिकारी स्कॉट के आदेश पर हुए लाठी चार्ज में गंभीर रूप से घायल हो गए जिससे उनकी 17 नवंबर 1928 में मृत्यु हो गई .जिससे पूरे भारत में एक आक्रोश की फैल गई थी. 17 नवंबर 1928 को लाल जी की मृत्यु हो गई और उनकी मृत्यु का बदला लेने के लिए 17 दिसंबर 1928 को स्कॉट के धोखे में राजगुरु और भगत सिंह ने पुलिस अधिकारी सांडर्स को गोलियों से छलनी कर उसकी हत्या कर दी. इसी बीच इन लोगों का पीछा कर रहे एक सिपाही चंन्नन सिंह को चंद्रशेखर आजाद ने अपनी गोली का निशाना बना लिया था. 22 साल के युवा भगत सिंह के इस अप्रतिम साहस ने पूरे भारत विशेष कर युवा वर्ग को पूरी तरह उद्वेलित कर दिया. लेकिन अंग्रेजों के दमनकारी रवैये में आंदोलन की आग कमजोर होने लगी.. ऐसे में एक और भारतीय नागरिकों के विरोध में लाये गए कानून का विरोध करते हुए भगत सिंह ने दिल्ली की केंद्रीय विधानसभा की बालकनी से धुएं का बम फेंका और यह जानते हुए कि उनकी गिरफ्तारी के बाद उन्हें मृत्यु दंड दिया जाएगा,,भारत के नौजवानों में क्रांति का संचार करने के लिए उन्होंने अपनी गिरफ्तारी दी. अपनी गिरफ्तारी के दौरान उन्होंने अपनी बातों को मुख़रता से रखा. जेल में भारतीय कैदियों के साथ हो रहे उत्पीड़न का विरोध किया,आमरण अनशन किया. कांग्रेस सरकार उनसे इतनी भयभीत थी कि उनकी फांसी की तिथि 24 मार्च को जनाक्रोश के भय से एक दिन पूर्व नियम विपरीत 23 मार्च की शाम को चोरी से इन तीनों भारत मां भारती के नोनीहालों को फांसी दे दी गई. प्राणोंत्सर्ग के इस उत्कृष्ट उदाहरण ने आप तीनों को कालजई बना दिया. आज भारत के हर युवा के दिल में आप बसे हैं. आपका इंकलाब जिंदाबाद का नारा आज भारत के लिए क्रांति का आह्वान, विरोध का प्रतीक बन चुका है. सभा को मृत्युंजय नवल ने संचालित किया और पंकज श्रीवास्तव, मनोज श्रीवास्तव गणेश अंकज द्विवेदी, अरुण सिंह, उमेश मिश्रा, विनोद सिंह,महेंद्रगौड़ आदि ने संबोधित किया. इस अवसर पर विशेष रूप से सत्येंद्र शर्मा, मोहम्मद यूसुफ, अजय गुप्ता, अजीत यादव, राधेश्याम प्रजापति, नीरज सिंह, विष्णु पांडे , प्रवीण मद्धेशिया, कनक हरि अग्रवाल, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, आनंद श्रीवास्तव, सुभाष गुप्ता राकेश गौड़ सहित बड़ी संख्या में लोगों ने श्रद्धा सुमन अर्पित किए, तथा 2 मिनट मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की.

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