Author: News Desk

टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड सर्विसेज श्रमिक यूनियन लगातार सातवीं बार रघुनाथ पांडेय बने अध्यक्ष, पूरी टीम का कब्जा राष्ट्र संवाद संवाददाता जमशेदपुर:टाटा स्टील यूटिलिटीज एंड सर्विसेज श्रमिक यूनियन (पूर्व में जुस्को श्रमिक यूनियन) के रघुनाथ पांडेय लगातार सातवीं बार अध्यक्ष बने. चुनाव में उनकी पूरी टीम की जीत हुई. यूनियन के दस पदाधिकारियों के पदों में से रघुनाथ पांडेय गुट के 9 उम्मीदवारों ने अलग-अलग पदों के लिए एकतरफा जीत दर्ज की जबकि विपक्ष से एक पदाधिकारी जीते. चुनाव में खास बात यह रही कि निवर्तमान डिप्टी प्रेसीडेंट मनीष दुबे व ट्रेजरर गोपाल जायसवाल भी हार गए. इस बार भी…

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नमस्कार आपका *राष्ट्र आपका *संवाद राष्ट्र संवाद पञिका राष्ट्र संवाद तीसरे दशक में बेमिसाल 25 साल राष्ट्र संवाद की मुहिम : सकारात्मक पत्रकारिता बदलें सोच बदलेगा समाज 🪷जय गणेश 🪷 💐दिनांक 11जून दिन बुधवार 2025 www.rashtrasamvad.com www.rastrasamvad.com Devanandsingh.com rashtrasamwad. com Check out rashtrasamvad (@rashtrasamvad1): https://twitter.com/rashtrasamvad1?s=08 NOW RASHTRASAMVAD AVAILABLE ON MOBILE APP JHAHIN2000/1039 राष्ट्रसंवाद दैनिक JHAHIN01092 राष्ट्र संवाद नजरिया : *चंद्रबाबू नायडू की जनसंख्या नीति और दक्षिण भारत की सियासी दुविधा बोड़ाम की ‘मधु’र क्रांति ‘शादी के बाद जो भी होगा मैं जिम्मेदार नहीं हूं; सोनम ने दे दी थी चेतावनी’ ✍️पाकिस्तान के दुश्मनों से भारत ने मिलाया हाथ…जयशंकर का प्लान…

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खोखरो गांव के सबर समुदाय की ‘Boram Honey’ की यात्रा जिया सिंह उज्जैन बोड़ाम प्रखंड के एक छोटे से गांव खोखरो में 45 सबर परिवारों ने वो कर दिखाया, जो किसी आंदोलन से कम नहीं। सदियों से जंगलों पर निर्भर इस आदिम जनजाति समूह के परिवारों ने शहद संग्रहण को पारंपरिक गतिविधि से आगे बढ़ाकर व्यवस्थित-व्यापारिक उद्यम में बदल डाला — और यहीं से शुरू हुई बोड़ाम की ‘मधु’र क्रांति। परंपरा से प्रगति की ओर सबर समुदाय का जीवन सालों से NTFP — महुआ, पत्ता, झाड़ू और विशेषकर वन शहद — पर आधारित रहा। सालाना लगभग 2 टन शहद एकत्र…

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देवानंद सिंह आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू द्वारा घोषित जनसंख्या वृद्धि को प्रोत्साहित करने की योजना ने देशभर में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। नायडू सरकार की इस पहल के अंतर्गत बड़े परिवारों को आर्थिक सहायता दी जाएगी और महिलाओं को कई बार मातृत्व अवकाश तथा कार्यस्थल पर शिशु देखभाल की सुविधाएं मिलेंगी। नायडू का यह कदम एक ऐसे समय में सामने आया है, जब भारत में जन्म दर पहले से ही राष्ट्रीय स्तर पर गिर रही है। यह पहल जनसंख्या नीति की एक नई व्याख्या प्रस्तुत करती है, लेकिन इसके पीछे की राजनीति और…

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उधर भाजपा नेत्री व सहयोगी पहुंचे एसपी कार्यालय, लगे है बचाव की जुगत में राष्ट्र संवाद(छःग) कमाल अहमद छःग/कोरबा : बांकीमोगरा थाना परिसर में ग्राम बरेडिमुड़ा निवासी आदिवासी किसान के साथ भाजपा नेत्री एवं उनके सहयोगियों द्वारा की गई मारपीट पर सर्व आदिवासी समाज सामने आया है इस मामले ने तूल पकड़ने के साथ ही राजनीति के रंग भी अख्तियार कर लिया है रामपुर के कांग्रेस विधायक फूल सिंह राठिया ने जहां पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा है वहीं भाजपा के पदाधिकारी ज्योति महंत के समर्थन में सोशल मीडिया पर सामने आया है इधर आदिवासी समाज ने थाना पहुंचकर ज्ञापन…

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देवानंद सिंह मणिपुर एक ऐसा राज्य है, जो पिछले दो वर्षों से जातीय हिंसा, प्रशासनिक विफलताओं और सामाजिक विभाजन के गंभीर संकट से गुजर रहा है। एक बार फिर मणिपुर उथल-पुथल का केंद्र बना हुआ है। शनिवार की रात इंफाल और आसपास के क्षेत्रों में भड़की हिंसा, इंटरनेट सेवाओं की बंदी, धारा 163 का लागू किया जाना, और विरोध प्रदर्शनों पर रोक, इन घटनाओं ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि मणिपुर की राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता अभी भी नाजुक दौर से गुजर रही है। इस बार हिंसा की चिंगारी बनी मैतेई संगठन अरामबाई तेंगगोल के एक…

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– ललित गर्ग – भारत एक ओर जहां लगातार तेज ग्रोथ करते हुए बीते दिनों जापान को पीछे छोड़ दुनिया की चौथी सबसे बड़ी इकोनॉमी बना, तो वहीं उपलब्धियों का सिलसिला जारी है औऱ दुनिया इसका लोहा मान रही है। अब एक और खुश करने वाली रिपोर्ट आई है, जो विश्व बैंक ने जारी की है, जिसमें भारत में अत्यधिक गरीबी में आई उल्लेखनीय कमी की रोशनी है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022-23 में यह दर 5.3 प्रतिशत रह गई है, जो वर्ष 2011-12 में 27.1 फीसदी थी। रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार भारत ने लगभग एक दशक से कुछ…

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एक रुपया लगाओ, दस वापस पाओ — जलवायु संकट में भी है कमाई का मौका! अब तक हमने जलवायु परिवर्तन की बात डर से जोड़ते हुए की है — कि बाढ़ आएगी, आग लगेगी, बीमारियाँ बढ़ेंगी, और हमारी ज़िंदगी बदल जाएगी। लेकिन अब वक़्त है नज़रिया बदलने का। क्योंकि सिर्फ़ डर बेचने से न तो सियासत चलती है, न समाज बदलता है। सोचिए अगर आपको पता चले कि आज आप हर 1 रुपया किसी काम में लगाते हैं, और अगले कुछ सालों में वह 10 रुपये से भी ज्यादा बनकर लौटे — तो क्या आप उस निवेश को नज़रअंदाज़ करेंगे?…

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आलेख डा० सुमन शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, एससीआरटी दिल्ली अति संवेदनशीलता कई बार इस रूप में भी नज़र आती है कि लोग सामान्य होने का भी मौका नहीं देते l जैसे किसी दिव्यांग व्यक्ति के हल्का सा हिलते ही – अरे ! कहा जा रहे हैं ?, कोई मदद करे ?, परेशान न हो हमें बताओ आदि-आदि l तब मुझ जैसे आलसी इंसान – ओह शुक्रिया, कह कर वही बैठ जाते हैं l और जो कुछ काम होता हैं जैसे – कुछ फेंकना है या अलमारी से कुछ निकलना हो या रखना हो आदि तो बस मैं तो झट से अपनी…

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हमें सोचना चाहिए कि हम देश के लिए क्या कर सकते हैं : मोहन भागवत कानपुर : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सोमवार को विद्यार्थियों और व्यापारियों से चर्चा की तथा कहा कि ‘हमें सोचना चाहिए कि हम देश के लिए क्या कर सकते हैं।’ संवाद के दौरान आरएसएस प्रमुख ने पूछा क्या,‘‘ हम अपने जीवन में देश में निर्मित स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करने का संकल्प ले सकते हैं?’’ उन्होंने कहा,‘‘यह ऐसा संकल्प है जो हमारे जीवन से शुरू होता है। यह संकल्प हमारे परिवार, हमारे मोहल्ले, हमारे शहर, हमारे राज्य के माध्यम…

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