सावधान मतदाता: शिकारी आएंगे, जाल बिछाएंगे, फंसना नहीं है सजग नागरिक ही सशक्त शहर और मजबूत लोकतंत्र की नींव
देवानंद सिंह
चुनावी मौसम आते ही वादों, नारों और लुभावने आश्वासनों की बाढ़ आ जाती है। ऐसे समय में मतदाताओं को विशेष सतर्क रहने की जरूरत है। लोकतंत्र में मतदान केवल एक अधिकार नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला दायित्व भी है। इसलिए भावनाओं, तात्कालिक लाभ या किसी प्रकार के दबाव में आए बिना विवेकपूर्ण निर्णय लेना आवश्यक है। याद रखें, चुनाव के दौरान कई तरह के “शिकारी” सक्रिय हो जाते हैं, जो अलग-अलग रूपों में जाल बिछाते हैं। मतदाता यदि सजग नहीं रहे तो पांच वर्षों तक पछताना पड़ सकता है।
मतदान करते समय यह जरूर सोचें कि जिसे आप चुन रहे हैं, क्या वह चुनाव के बाद भी आपकी सुनवाई करेगा? क्या वह जीत के बाद भी क्षेत्र में उपलब्ध रहेगा या फिर केवल चुनावी मौसम का नेता साबित होगा? सच्चा जनप्रतिनिधि वही है जो सुख-दुख में जनता के साथ खड़ा रहे, समस्याओं को गंभीरता से सुने और समाधान के लिए प्रयास करे। केवल भाषण और वादे काफी नहीं, बल्कि पिछले कार्य और जनसेवा का रिकॉर्ड अधिक महत्वपूर्ण होता है।
शहर के समग्र विकास के लिए यह भी जरूरी है कि मतदाता अपराध, नशे और दबंगई की राजनीति से दूरी बनाए रखें। अफीम, ब्राउन शुगर जैसे नशे के कारोबार से जुड़े तत्व, गुंडई और दबंगई के सहारे राजनीति करने वाले लोग समाज के लिए खतरा साबित हो सकते हैं। ऐसे लोगों को समर्थन देना न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ भी समझौता है। स्वच्छ और सुरक्षित शहर के लिए जरूरी है कि आपराधिक छवि वाले उम्मीदवारों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से बाहर रखा जाए।
इसके साथ ही जाति, पंथ, मजहब और धनबल की राजनीति से ऊपर उठकर मतदान करना समय की मांग है। चुनाव विकास, पारदर्शिता और बेहतर नागरिक सुविधाओं के मुद्दे पर होना चाहिए। सड़कों की स्थिति, जल निकासी, पेयजल, स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे बुनियादी सवाल ही किसी शहर की असली जरूरत होते हैं। यदि मतदाता इन मुद्दों को प्राथमिकता देंगे, तभी वास्तविक बदलाव संभव है।
लोकतंत्र की मजबूती जागरूक मतदाता से ही होती है। एक सही निर्णय शहर को तरक्की की राह पर ले जा सकता है, जबकि एक गलत चयन विकास को वर्षों पीछे धकेल सकता है। इसलिए सावधान रहें, सोच-समझकर मतदान करें और उसी को चुनें जो चुनाव के बाद भी आपकी आवाज बने। सजग नागरिक ही सशक्त शहर और मजबूत लोकतंत्र की नींव होते हैं।

