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    Home » विधानसभा बहस की जगह है, न की पूजाघर या इबादत का स्थल
    Breaking News Headlines झारखंड राजनीति राष्ट्रीय संवाद विशेष

    विधानसभा बहस की जगह है, न की पूजाघर या इबादत का स्थल

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 9, 2021No Comments4 Mins Read
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    विधानसभा बहस की जगह है, न की पूजाघर या इबादत का स्थल

    देवानंद सिंह

    राष्ट्र संवाद नजरिया : अगर, विधानसभा में नमाज अता करने के लिए कमरा आवंटित किया जा सकता है तो पूजा अर्चना के लिए कमरा आवंटित करने की मांग भी है जायज, क्या इसे भी किया जाएगा पूरा ??……. झारखंड विधानसभा में नमाज अता करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष द्वारा कमरा आवंटन करने का मामला जिस तरह तूल पकड़ता जा रहा है, उससे लगता है कि जल्द ही इसकी आग पूरे देश में फैलने वाली है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में भी झारखंड की तरह ही विधानसभा में नमाज अता करने के लिए कमरा आवंटित करने की मांग उठने लगी है। इसमें कोई शक नहीं कि जल्द ही पूरे देश में यह मांग उठने लगेगी। अगर, यह स्थिति हो गई तो निश्चित ही इस विषय पर भी पूरे देश में बहस छिड़ने लग जाएगी, क्योंकि अगर,नमाज अता करने के लिए कमरा आवंटित किया जा सकता है तो दूसरे धर्म के लोग भी कहेंगे कि हमें भी अपने धर्म के अनुसार पूजा अर्चना के लिए भी विधानसभा में कमरा आवंटित किया जाए। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा नमाज अता करने के लिए कमरा आवंटित करने संबंधी नोटिफिकेशन जारी करने के बाद बीजेपी के लोग हाउस के अंदर ही भजन कीर्तन करने लगे, जिसमें भारी भीड़ जुटी और पुलिस भी तैनात रही। उनकी तरफ से इस मांग ने जोर पकड़ लिया है कि उन्हें भी पूजा अर्चना के लिए कमरा आवंटित किया जाए। इन हालातों में यही लग रहा है कि विधानसभा भी राजनीतिक अखाड़ा बन जाएंगे। वैसे ऐसी किसी व्यवस्था को स्वीकार नहीं किया जा सकता है, क्योंकि विधानसभा एक सेक्युलर बॉडी है, इसके अंदर पूजाघर या इबादत स्थल का संविधान में कोई प्रावधान नहीं है। विधानसभा संविधान के तहत राज्य की परिभाषा में आती है और संविधान के मुताबिक राज्य पंथ निरपेक्ष है। ऐसे में, अगर विधानसभा के अन्दर नमाज पढ़ने के लिए जगह आवंटित की गई है तो यह बिल्कुल अनुचित है और संविधान के खिलाफ है। हालांकि, नमाज के लिए कमरा आवंटित करने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में आता है। देश में बंगाल और बिहार विधानसभा में भी तरह की व्यवस्था है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में वर्षो पहले ही कमरा आवंटित किया गया था, जहां 25 लोग नमाज अता कर सकते हैं, जबकि बिहार विधानसभा में 1993 में विधानसभा एनेक्सी भवन में कमरा आवंटित किया गया था, हालांकि इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है। पर यहां सवाल विधानसभा अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र का है। अगर, विधानसभा अध्यक्ष ने अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल कर नमाज अता करने के लिए कमरा आवंटित कर दिया है तो फिर दूसरे धर्मों से जुड़े लोगों द्वारा उनके धर्म के हिसाब से पूजा अर्चना करने के लिए कमरा आवंटित करने की मांग करना भी अनुचित नहीं है। पंथनिरपेक्ष राज्य में सभी के लिए समान अधिकार हैं। लिहाजा, अधिकार क्षेत्र का यह मतलब नहीं होता है कि एक ही पक्ष को फायदा दिया जाए। पर अच्छा यही होता कि जिस चीज की व्यवस्था संविधान में नहीं है तो उसकी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। विधानसभा पब्लिक बिल्डिंग है और पब्लिक बिल्डिंग के अंदर कोई धार्मिक संरचना की इजाजत बिलकुल भी नहीं होनी चाहिए। फिलहाल, झारखंड विधानसभा में नमाज अता करने के लिए कमरा आवंटित करने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में कोर्ट क्या निर्णय देता है। इस मामले की मजेदार बात यह है कि यहां कांग्रेस गठबंधन की ही सरकार है और कांग्रेस के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने भी कहा कि विधानसभा में नमाज अता करने के लिए कमरा आवंटित करने संबंधी नोटिफिकेशन गलत है। यानि जब सत्ता के सहयोगी ही इससे सहमत नहीं हैं तो विरोधी कैसे सहमत होंगे। विधानसभा डिबेट की जगह है, न की पूजाघर या इबादत का स्थल। इसलिए माननीय को सोचने की जरूरत है की जनता की गाढ़ी कमाई इस तरह धार्मिक विवाद में बर्बाद नहीं करें जनता सब देख रही है सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ जनता की नजर है

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