लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
रांची। JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस लाठीचार्ज, वॉटर कैनन और गिरफ्तारी के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने 11 अगस्त को विधानसभा घेराव का ऐलान किया है। परिषद ने पुलिस कार्रवाई को शर्मनाक बताते हुए इसे छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन करार दिया।
विधानसभा घेराव की प्रमुख मांगें
ABVP ने संदिग्ध परीक्षाओं को रद्द कर निष्पक्ष जांच, दोबारा पारदर्शी तरीके से परीक्षा कराने और दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। संगठन ने कहा कि छात्रों की आवाज को बल प्रयोग से नहीं दबाया जा सकता और सरकार को संवाद के जरिए उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
नेताओं की प्रतिक्रिया
ABVP के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ. वीरेंद्र सिंह सोलंकी ने छात्रों पर लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल को निंदनीय बताया। प्रदेश मंत्री प्रकाश टूटी ने कहा कि परिषद छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी है। वहीं, सदर अस्पताल में भूख हड़ताल पर बैठे राहुल कुमार क्रांति ने भी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सरकार को परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।
11 अगस्त को विधानसभा घेराव की रूपरेखा
ABVP के अनुसार, 11 अगस्त को पुराने विधानसभा तिनकोनिया ग्राउंड से हजारों छात्र शांतिपूर्ण मार्च करते हुए विधानसभा पहुंचेंगे और अपनी मांगें रखेंगे।
पृष्ठभूमि: JPSC और JSSC परीक्षा विवाद
झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की हालिया परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रश्न पत्र लीक हुए, उत्तर कुंजी में गड़बड़ियां की गईं और चयन प्रक्रिया में भाई-भतीजावाद चला। इसके विरोध में छात्र संगठन पिछले कई महीनों से आंदोलनरत हैं। रांची के मोरहाबादी मैदान से लेकर राजभवन तक कई प्रदर्शन हुए, लेकिन सरकार की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं होने से छात्रों में आक्रोश बढ़ता गया।
पिछले सप्ताह जब छात्रों ने शांतिपूर्ण ढंग से सचिवालय घेराव का प्रयास किया, तो पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए लाठीचार्ज किया, वॉटर कैनन चलाए और दर्जनों छात्रों को हिरासत में ले लिया। इस घटना में कई छात्र घायल हुए, जिनका इलाज रिम्स और सदर अस्पताल में चल रहा है। घायल छात्रों में राहुल कुमार क्रांति की हालत गंभीर बनी हुई है और वे अस्पताल में ही भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। इस घटना ने आंदोलन को और हवा दे दी है।
राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे को लपक लिया है। भाजपा, आजसू, जेवीएम समेत विपक्षी दलों ने सरकार पर छात्रों के दमन का आरोप लगाते हुए सड़क से सदन तक संघर्ष तेज करने की चेतावनी दी है। वहीं, सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं ने जांच का आश्वासन देते हुए छात्रों से संयम बरतने की अपील की है। लेकिन छात्र संगठन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं।
ABVP का यह विधानसभा घेराव छात्र आंदोलन का अब तक का सबसे बड़ा शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है। संगठन ने दावा किया है कि इस मार्च में पूरे झारखंड के कोने-कोने से 50 हजार से अधिक छात्र जुटेंगे। प्रशासन ने भी एहतियातन धारा 144 लगाने, अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने और ड्रोन से निगरानी की तैयारी की है।
इस बीच, झारखंड हाईकोर्ट में भी JPSC-JSSC परीक्षाओं की सीबीआई जांच को लेकर जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि अगर कोर्ट ने जांच के आदेश दिए तो कई बड़े अधिकारी और नेता इसकी जद में आ सकते हैं।
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