गम्हरिया प्रखंड के नए अनाज गोदाम में लापरवाही की चिंगारी, क्या फिर जलेंगे गरीबों के हक के बोरे?
राष्ट्र संवाद संवाददाता
सरायकेला खरसावां जिला स्थित गम्हरिया प्रखंड में एक बार फिर गरीबों के हिस्से के अनाज की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रखंड अंतर्गत बने नए अनाज गोदाम में भारी अव्यवस्था और सुरक्षा मानकों की अनदेखी सामने आई है। जानकारी के अनुसार, जिस समय गोदाम में अनाज के बोरे रखे जा रहे थे, उसी दौरान बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के अंदर वेल्डिंग का काम कराया जा रहा था। ज्वलनशील सामग्री से भरे गोदाम में चिंगारियां उड़ना संभावित खतरे की घंटी माना जा रहा है, जिससे किसी भी बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
गौरतलब है कि कुछ ही दिन पूर्व पुराने अनाज गोदाम में भीषण आग लगने से हजारों लाभुकों के हिस्से का अनाज जलकर राख हो गया था। उस घटना के बाद विभागीय जांच की बात जरूर कही गई, लेकिन आज तक न तो कोई ठोस निष्कर्ष सामने आया और न ही किसी जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी पर कार्रवाई की गई। ऐसे में नए गोदाम में सामने आई लापरवाही ने प्रशासन की कार्यशैली पर फिर से सवालिया निशान लगा दिया है।
जब पत्रकारों की टीम मौके पर पहुंची तो पाया कि गोदाम के अंदर मजदूर वेल्डिंग कर रहे थे। पूछताछ करने पर मजदूरों ने बताया कि शटर में लॉक की समस्या के कारण वेल्डिंग कराई जा रही है। मजदूरों ने यह भी संकेत दिया कि यह कार्य एक ऐसे व्यक्ति के कहने पर हो रहा है, जो पूर्व में प्रखंड कार्यालय में निजी चालक के रूप में कार्यरत रह चुका है। इस दौरान जब संबंधित व्यक्ति से सवाल पूछे गए तो वह पत्रकारों से उलझ पड़ा और कैमरा छीनने का प्रयास करते हुए अभद्र व्यवहार करने लगा।
मामले की सूचना प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी सुनील चौधरी को दी गई। उन्होंने कैमरे के सामने सफाई देते हुए कहा कि “चूहों से बचाव के लिए वेल्डिंग कराई जा रही है।” हालांकि, मौके की परिस्थितियां और वेल्डिंग का तरीका उनके बयान से मेल नहीं खाता, जिससे संदेह और गहरा गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में कालाबाजारी के आरोपों के बावजूद सुनील चौधरी लंबे समय तक पद पर बने रहे और वर्तमान नए अनाज गोदाम का प्रभार भी उनके पास है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में “दाल में कुछ काला” होने की चर्चा तेज हो गई है।
जब इस गंभीर मामले की जानकारी उपायुक्त को दी गई तो उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “मैं देखूंगा।” प्रशासन की इस उदासीनता से आम लोगों में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में गरीबों के हक के अनाज के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न हो और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

