Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » वन रैंक वन पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले को रखा बरकरार, कहा- इसमें कोई कमी नहीं
    Breaking News Headlines

    वन रैंक वन पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के फैसले को रखा बरकरार, कहा- इसमें कोई कमी नहीं

    Devanand SinghBy Devanand SinghMarch 16, 2022No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने आज वन रैंक वन पेंशन मामले में अपना फैसला सुना द‍िया है. न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सरकार का ‘वन रैंक-वन पेंशन’ का फैसला मनमाना नहीं है और न ही किसी संवैधानिक कमी से ग्रस्त है. इस पीठ में जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ भी शामिल थे. देश की सर्वोच्‍च अदालत ने कहा कि OROP की लंबित पुनर्निर्धारण प्रक्रिया एक जुलाई, 2019 से शुरू की जानी चाहिए और तीन महीने में बकाया राशि का भुगतान किया जाना चाहिए.इस मामले में 16 फरवरी को पिछली सुनवाई हुई थी, ज‍िसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि केंद्र की अतिश्योक्ति OROP नीति पर आकर्षक तस्वीर प्रस्तुत करती है जबकि इतना कुछ सशस्त्र बलों के पेंशनरों को मिला नहीं है. बता दें कि पूर्व सैनिकों की एक संस्था ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि इस नीति से वन रैंक वन पेंशन का मूल उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है. इसकी हर साल समीक्षा होनी चाहिए, लेकिन इसमें पांच साल में समीक्षा का प्रावधान है. अलग-अलग समय पर रिटायर हुए लोगों को अब भी अलग पेंशन मिल रही है.
    बीते महीने याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी भारतीय पूर्व सैनिक आंदोलन की ओर से पेश हुए थे. पीठ ने कहा था कि जो भी फैसला लिया जाएगा, वह वैचारिक आधार पर होगा न कि आंकड़ों पर. पीठ ने अपनी टिप्पणी करते हुए कहा था कि योजना में जो गुलाबी तस्वीर पेश की गई थी, वास्तविकता उससे अलग है.

    गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 7 नवंबर 2011 को एक आदेश जारी कर वन रैंक वन पेंशन योजना लागू करने का फैसला लिया था, लेकिन इसे 2015 से पहले लागू नहीं किया जा सका. इस योजना के दायरे में 30 जून 2014 तक सेवानिवृत्त हुए सैन्यबल कर्मी आते हैं. सुप्रीम कोर्ट के 2014 में संसदीय चर्चा बनाम 2015 में वास्तविक नीति के बीच विसंगति के लिए केंद्र सरकार ने पी चिदंबरम को जिम्मेदार ठहराया. केंद्र ने 2014 में संसद में वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बयान पर विसंगति का आरोप भी लगाया.

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleजम्मू-कश्मीर: सुरक्षाबलों ने की इलाके की घेराबंदी, श्रीनगर नौगाम एनकाउंटर में तीन आतंकी ढेर
    Next Article राष्ट्र संवाद के शुभचिंतक जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति में प्रभारी स्वच्छता पदाधिकारी धनंजय कुमार पाण्डेय का रहा बेदाग छवि समूह को रहेगा गर्व

    Related Posts

    वारदातें बढ़ीं, कमजोर पड़ा पुलिस का सूचना तंत्र?

    September 27, 2026

    जमीन पर कब्जे से बड़ा सवाल व्यवस्था की चुप्पी का कानून आवंटित औद्योगिक भूखंड पर 20 साल बाद भी कब्जा नहीं, तो जिम्मेदार कौन?

    September 27, 2026

    एलआईसी बिल्डिंग में भड़की भीषण आग, 3 घंटे तक धधकती रही चौथी मंजिल

    September 27, 2026

    Comments are closed.

    अभी-अभी

    यूपी में भारी बारिश से राहत-बचाव तेज, नेपाल सीमा से लगे जिलों में विशेष सतर्कता

    वारदातें बढ़ीं, कमजोर पड़ा पुलिस का सूचना तंत्र?

    एसआईआर की प्रक्रिया और वैधता पर कांग्रेस ने उठाए सवाल, पारदर्शिता की मांग

    उडुप्पी रेस्टोरेंट फायरिंग ने खोली जमशेदपुर की पुलिसिंग की पोल : सरयू राय

    लखनऊ मंडल में 15 महिला ट्रैकमेंटेनर्स का कैडर परिवर्तन

    यमुना एक्सप्रेस-वे बस अग्निकांड पर हाईकोर्ट सख्त, रात में बसों की अनिवार्य जांच के आदेश

    JSSC-CGL परीक्षा में कथित अनियमितता, अनुचित लाभ लेने वाले तीन अभ्यर्थी गिरफ्तार

    ग्रामसभा में ग्रामीणों का विरोध, सीसीएल से पहले रोजगार और फर्जी जमाबंदी रद्द करने की मांग

    जमीन पर कब्जे से बड़ा सवाल व्यवस्था की चुप्पी का कानून आवंटित औद्योगिक भूखंड पर 20 साल बाद भी कब्जा नहीं, तो जिम्मेदार कौन?

    एलआईसी बिल्डिंग में भड़की भीषण आग, 3 घंटे तक धधकती रही चौथी मंजिल

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.