Close Menu
Rashtra SamvadRashtra Samvad
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • होम
    • राष्ट्रीय
    • अन्तर्राष्ट्रीय
    • राज्यों से
      • झारखंड
      • बिहार
      • उत्तर प्रदेश
      • ओड़िशा
    • संपादकीय
      • मेहमान का पन्ना
      • साहित्य
      • खबरीलाल
    • खेल
    • वीडियो
    • ईपेपर
    Topics:
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Rashtra SamvadRashtra Samvad
    • रांची
    • जमशेदपुर
    • चाईबासा
    • सरायकेला-खरसावां
    • धनबाद
    • हजारीबाग
    • जामताड़ा
    Home » आजकल प्रभात संगीत एक नये घराने के रूप में लोकप्रिय हो रहा है
    Breaking News झारखंड धर्म

    आजकल प्रभात संगीत एक नये घराने के रूप में लोकप्रिय हो रहा है

    Devanand SinghBy Devanand SinghSeptember 13, 2021No Comments2 Mins Read
    Share Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Share
    Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

    मनुष्य जब पूर्ण भाव से प्रभात संगीत के साथ खड़ा हो जाता है, तो रेगिस्तान भी हरा हो जाता है

     

    आजकल प्रभात संगीत एक नये घराने के रूप में लोकप्रिय हो रहा है14 सितंबर प्रभात संगीत दिवस विशेष

    जमशेदपुर 13 सितंबर 2021

    आज से लगभग 7000 वर्ष पूर्व भगवान सदाशिव ने सरगम का आविष्कार कर मानव मन के सूक्ष्म अभिव्यक्तियों को प्रकट करने का सहज रास्ता खोल दिया था। इसी कड़ी में 14 सितंबर 1982 को झारखंड राज्य के देवघर में आनंद मार्ग के प्रवर्तक भगवान श्री श्री आनंदमूर्ति जी ने प्रथम प्रभात संगीत” बंधु हे निये चलो” बांग्ला भाषा में देकर मानव मन को भक्ति उनमुख कर दिया।
    8 वर्ष 1 महीना 7 दिन के छोटे से अवधि में उन्होंने 5018 प्रभात संगीत का अवदान मानव समाज को दिया। आशा के इस गीत को गाकर कितनी जिंदगियां संवर गई। प्रभात संगीत के भाव ,भाषा, छंद, सूर एवं लय अद्वितीय और अतुलनीय है। संस्कृत बांग्ला, उर्दू , हिंदी, अंगिका ,मैथिली, मगही एवं अंग्रेजी भाषा में प्रस्तुत प्रभात संगीत मानव मन में ईश्वर प्रेम के प्रकाश फैलाने का काम करता है। संगीत साधना में तल्लीन साधक को एक बार प्रभात संगीत रूपी अमृत का स्पर्श पाकर अपनी साधना को सफल करना चाहिए।
    इस पृथ्वी पर उपस्थित मनुष्य के मन में ईश्वर के लिए उठने वाले हर प्रकार के भाव को सुंदर भाषा और सूर में लयबद्ध कर प्रभात संगीत के रूप में प्रस्तुत कर दिया।
    उन्होंने कहा कि कोई भी मनुष्य जब पूर्ण भाव से प्रभात संगीत के साथ खड़ा हो जाता है, तो रेगिस्तान भी हरा हो जाता है।
    संगीत तथा भक्ति संगीत दोनों को ही रहस्यवाद से प्रेरणा मिलती रहती है। जितनी भी सूक्ष्म तथा दैवी अभिव्यक्तियां हैं, वह संगीत के माध्यम से ही अभिव्यक्त हो सकती है। मनुष्य जीवन की यात्रा विशेषकर अध्यात्मिक पगडंडियां प्रभात संगीत के सूर से सुगंधित हो उठता है। *आजकल प्रभात संगीत एक नये घराने के रूप में लोकप्रिय हो रहा है ।*

    Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
    Previous Articleआत्मनिर्भर भारत तभी संभव होगा, जब हमारे शहर उत्पादक बनेंगे : हरदीप पुरी
    Next Article हेडलाइंस राष्ट्र संवाद

    Related Posts

    नवी मुंबई में रिश्ता तोड़ा तो पिस्टल निकाली…

    November 7, 2026

    त्योहारों की रौनक के साथ सुरक्षा, स्वच्छता और सद्भाव की भी हो गारंटी

    November 7, 2026

    दीपावली बने विकसित एवं समृद्ध भारत की नई ज्योति

    November 7, 2026
    Leave A Reply Cancel Reply

    अभी-अभी

    McLuck Casino Review: Features, Games, and the Player Experience

    नवी मुंबई में रिश्ता तोड़ा तो पिस्टल निकाली…

    त्योहारों की रौनक के साथ सुरक्षा, स्वच्छता और सद्भाव की भी हो गारंटी

    चेहरे पर आग के निशान, लेकिन हौसला फौलादी! दीपिका के स्टंट करने वाली इस लड़की को पहचानना हुआ मुश्किल

    दीपावली बने विकसित एवं समृद्ध भारत की नई ज्योति

    बाइक चोरी के शक में विक्षिप्त की पिटाई, पुलिस ने ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाया

    धनतेरस पर बहरागोड़ा के बाजारों में उमड़ी भीड़, वाहनों की खरीदारी में भी उत्साह

    विजय-2 लौह अयस्क खदान फिर खोलने की मांग, ग्रामीणों को रोजगार देने पर जोर

    पांच दिन से अंधेरे में डूबे धानघोरी गांव में 24 घंटे में लगा नया ट्रांसफॉर्मर

    महिला सुरक्षाकर्मी से सहकर्मी गार्ड ने किया दुर्व्यवहार, थाने में प्राथमिकी दर्ज

    Facebook X (Twitter) Telegram WhatsApp
    © 2026 News Samvad. Designed by Cryptonix Labs .

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.