संक्रमण से बचाव के लिए आम लोगों को गाइड करने वाली पुलिस के 250 लोग संक्रमित
रिकवरी रेट सुकून देने वाली 237 पुलिस वालों ने कोरोना को मात दी
एक पुलिस अधिकारी की मौत 12 अन्य इलाजरत
कडी धूप और बारिश में भी सड़क पर खड़े रहकर कोरोना महामारी से आम लोगों की सुरक्षा में सहयोग करने वाली पुलिस भी इस संक्रमण से बच नहीं पाई है. पुलिस के वरीय अधिकारी से लेकर सिपाही तक इससे अछूते नहीं रहे. उपलब्ध विभागीय आंकड़ों के मुताबिक 22 मार्च को लॉक डाउन के बाद से 10 सितंबर तक पुलिस अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को मिलाकर विभाग के 250 लोग संक्रमित हुए, इनमें होमगार्ड के भी 2 जवान शामिल है. सुकून वाली बात यह रही कि इसमें से 237 लोगों ने रिकवरी कर ली. केवल एक पुलिस अधिकारी की मौत हुई है और वर्तमान में 12 लोग इलाजरत हैं . इसके अलावा कुछ पुलिस वालों को क्वारंटाइन सेंटरों में रखा गया है. जो या तो दूसरे जिले अथवा दूसरे राज्यों से छुट्टी काट कर लौटे हैं. वर्तमान में पुलिस के वरीय अधिकारियों, अधिकारियों और पुलिसकर्मियों समेत जिले में करीब 4000 विभागीय लोगों ने कोरोना संक्रमण के दौरान सड़क पर खड़े होकर अपनी ड्यूटी निभाई और फर्ज अदा किया . अपनी जान को जोखिम में डालकर पुलिस ने आम लोगों की जान बचाने में सहयोग किया , भले ही उन्हें इस महामारी की चपेट में आना पड़ा हो . इस संबंध में जानकारी देते हुए सार्जेंट मेजर वन धर्मेंद्र कुमार ने बताया की कोरोना पॉजिटिव पाए जाने वाले पुलिस वालों की स्थानीय अस्पतालों और टीएमएच में चिकित्सा कराई गई. पुलिस विभाग में इस बात का भी ध्यान रखा गया कि सोशल डिस्टेंसिंग , मास्क का उपयोग करते हुए अपनी ड्यूटी की जाए. सोशल रिलेशन के अनुपालन में भी पुलिस को रोका नहीं गया, क्योंकि कई ऐसे मौके आए, मजबूरियां आई जिसकी वजह से पुलिस कर्मियों को दूसरे जिलों और राज्य से बाहर भी जाना पड़ा . राज्य से बाहर गए पुलिस विभाग के लोगों को उनके वापस लौटने के बाद संक्रमण के खतरे को देखते हुए 14 दिनों तक क्वारंटाइन सेंटरों में रखा गया . इसके अलावा जिन्हें पॉजिटिव पाया गया उन्हें अलग सेंटरों में रखा गया. एक्टिव मामले और गंभीर स्थिति वाले पुलिस को अस्पतालों में भर्ती किया गया, शहर में दो जगहों पर पुलिस के लिए क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए जो पूरी तरह से सुरक्षित जोन में हैं. इनमें साकची स्थित उत्कल एसोसिएशन और रामगढ़िया सभा भवन शामिल है . जहां तक ग्रामीण क्षेत्र की बात है, तो जादूगोड़ा के स्वासपुर में और मुसाबनी के बैरक में भी क्वारंटाइन सेंटर बनाए गए हैं जहां ग्रामीण क्षेत्र के संक्रमित पुलिस वालों को रखा गया है सार्जेंट मेजर का कहना था की भले ही ड्यूटी के दौरान पुलिस वाले संक्रमित हुए हो लेकिन उनकी रिकवरी भी अच्छी रही 85 से 90 परसेंट संक्रमित पुलिस वालों ने कोरोना को मात दी और स्वस्थ होकर लौटे . जानकारी हो हो कि पुलिस अधिकारी विजय शंकर सिंह कोरोना की चपेट में आने, उन्हें मुसाबनी के क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया , हालत बिगड़ने पर उन्हें टीएमएच में लाकर भर्ती किया गया लेकिन मृत्यु पूर्व वे नेगेटिव हो गए थे. हालांकि वे अन्य भी कई तरह की बीमारियों से ग्रसित थे.

