लेखक: राष्ट्र संवाद ब्यूरो
बेगूसराय में करवा चौथ का पर्व इस बार प्रेम, समर्पण और समान सहभागिता की अनूठी मिसाल बनकर सामने आया। नगर परिषद बरौनी निवासी पत्रकार गौरवचंद्र गांधी ने गर्भवती पत्नी पूजा गांधी की सलामती के लिए निर्जला उपवास रखा, तो वहीं निर्वाचन कर्मी पूजा ने कर्तव्य निभाते हुए मतगणना ड्यूटी पूरी की।
करवा चौथ पर पति-पत्नी ने पेश की समानता की नई मिसाल
पत्रकार गौरवचंद्र गांधी ने पत्नी की गर्भावस्था को देखते हुए सुबह उन्हें फल खाने को दिए, ताकि सेहत पर असर न पड़े। उन्होंने स्वयं पूरे दिन निर्जला व्रत रखा। यह निर्णय दांपत्य जीवन में परस्पर सम्मान और संवेदना का प्रतीक बना।
निर्वाचन कर्मी पूजा गांधी ने निभाया कर्तव्य
पूजा गांधी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) की मतगणना में लगी थीं। संयोग से करवा चौथ के दिन ही मतगणना का अंतिम दिन था। उन्होंने पर्व की भावनाओं के साथ अपने कर्तव्य को प्राथमिकता देते हुए पूरे दिन ड्यूटी निभाई।
बारिश और बादलों के कारण चंद्रमा के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं हो सके। ऐसे में मोबाइल पर चंद्रमा की तस्वीर देखकर पूजा ने पहले चलनी से चांद के दर्शन किए, फिर उसी चलनी से पति को निहारा। पति के हाथों मीठा जल ग्रहण कर व्रत खोला।
पत्नी ने भी पति का व्रत तुड़वाया
प्रेम की यह कहानी यहीं नहीं थमी। पूजा गांधी ने भी अपने हाथों से पति को मीठा जल पिलाया और मिठाई खिलाकर उनका व्रत तुड़वाया। इस तरह दोनों ने एक-दूसरे के प्रति प्रेम, विश्वास और मंगलकामना का भाव साझा किया।
एक ओर पत्नी ने अपने दायित्व का निर्वहन किया, तो दूसरी ओर पति ने गर्भवती जीवनसंगिनी के स्वास्थ्य और सुख को सर्वोपरि रखा। इस करवा चौथ की सबसे खूबसूरत तस्वीर यही रही कि यहां प्रेम केवल एक-दूसरे के लिए उपवास रखने में नहीं, बल्कि एक-दूसरे की जिम्मेदारियों, जरूरतों और भावनाओं को समझने में भी दिखाई दिया।
गौरवचंद्र गांधी और पूजा गांधी की यह पहल एक सकारात्मक संदेश देती है कि दांपत्य जीवन में परंपराओं की सुंदरता तब और बढ़ जाती है, जब उनमें समानता, संवेदना और परस्पर सम्मान का भाव जुड़ जाए। कभी-कभी प्रेम का सबसे सुंदर रूप चांदनी में नहीं, बल्कि उस विश्वास में दिखाई देता है, जो मुश्किल हालात में भी साथ निभाने का हौसला देता है।
भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर चुनाव प्रक्रिया और मतगणना की जानकारी उपलब्ध है। भारत निर्वाचन आयोग की गाइडलाइंस के अनुसार मतगणना कर्मियों की ड्यूटी अनिवार्य होती है।
इस घटना ने समाज में यह संदेश दिया है कि आधुनिक दौर में भी परंपराओं को निभाते हुए कर्तव्यपरायणता से समझौता नहीं करना चाहिए। पति-पत्नी का यह व्यवहार युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है।

