रामकृष्णा ग्रुप में श्रमिक आंदोलन ने खड़े किए कई सवाल
*समान मांगों पर अलग-अलग इकाइयों में हड़ताल, आश्वासन के बावजूद मजदूरों का भरोसा जीतना चुनौती*
राष्ट्र संवाद संवाददाता, आदित्यपुर
रामकृष्णा ग्रुप की आरकेएफएल और आरकेसीएल इकाइयों में ठेका मजदूरों के लगातार आंदोलनों ने औद्योगिक क्षेत्र में श्रमिक-प्रबंधन संबंधों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दुगनी-कोलाबिरा की यूनिट 6, 7 और 9 से शुरू हुआ आंदोलन आरकेसीएल की यूनिट 8, 9 और 6 तक पहुंचा। गुरुवार को आरकेएफएल की यूनिट 3 और 4 में भी बड़ी संख्या में ठेका मजदूर हड़ताल पर चले गए।
मजदूरों की प्रमुख मांगों में कुशल कामगारों के मानदेय में बढ़ोतरी, दोगुना ओवरटाइम, कैंटीन में नियमित कर्मचारियों के समान सुविधाएं तथा कुशल-अकुशल श्रमिकों की मजदूरी का स्पष्ट निर्धारण शामिल है। बताया जा रहा है कि प्रबंधन ने मांगों पर सहमति जताते हुए एक नवंबर से लागू करने का आश्वासन दिया है। इसके बावजूद गुरुवार को मजदूर जेएलकेएम नेता तरुण महतो की मौजूदगी में वार्ता की मांग पर अड़े रहे। वार्ता के बाद मजदूर काम पर लौटे।
एक के बाद एक इकाइयों में समान मांगों को लेकर आंदोलन से यह सवाल उठ रहा है कि क्या मामला केवल मजदूरों की लंबित मांगों तक सीमित है या इसके पीछे अन्य समीकरण भी हैं। कंपनी के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के अधिकारों और जिम्मेदारियों में बदलाव के बाद अंदरूनी खींचतान की चर्चाएं भी हैं, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
लगातार उत्पादन प्रभावित होने से कंपनी और श्रमिकों, दोनों के हित प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में प्रबंधन के लिए जरूरी है कि संवाद की बाधाओं को दूर कर मांगों पर स्पष्ट निर्णय ले, वहीं श्रमिकों के हित में भी स्थायी समाधान तलाशा जाए। फिलहाल सवाल यही है कि बार-बार आंदोलन की नौबत क्यों आ रही है और आश्वासन के बावजूद भरोसे की कमी क्यों बनी हुई है।

