पिल्लू के प्रकोप से अतरुआ बहियार में मकई-सोयाबीन की फसल बर्बाद
राष्ट्र संवाद संवाददाता
भगवानपुर(बेगूसराय) : प्रखंड क्षेत्र के अतरुआ बहियार में इस बार खरीफ फसल ने किसानों को निराश कर दिया है। पिल्लू के प्रकोप से मकई की बाल में दाने प्रभावित हो गए हैं, जबकि सोयाबीन की फसल भी पूरी तरह बर्बाद होने की बात किसान बता रहे हैं। फसल में भारी नुकसान से किसानों के सामने लागत की भरपाई का संकट खड़ा हो गया है।
किसानों के अनुसार मकई की खेती में ट्रैक्टर से खेत की जुताई, मजदूरों से बीज की बुआई और कोड़नी, दो बार यूरिया खाद का प्रयोग तथा कई बार कीटनाशक दवा का छिड़काव किया गया। इसके बावजूद पिल्लू का प्रकोप कम नहीं हुआ। किसानों का कहना है कि कीटनाशक का भी अपेक्षित असर नहीं हुआ। कटाई के बाद भी मकई की बाल में पिल्लू का प्रकोप दिखाई दे रहा है।
किसानों ने बताया कि दस कट्ठा जमीन में महज दो से तीन बोरी मकई की उपज हो रही है। अधिकांश बालियों में दाने अधूरे हैं और कई बालियों में पिल्लू लगा हुआ है। इससे खेती में लगी लागत तक निकलना मुश्किल हो गया है। किसानों के अनुसार इस बार उपज उम्मीद के मुकाबले बेहद कम रही।
क्षेत्र के किसान सुधीर प्रसाद, जितेंद्र कुमार, रामस्वरूप साह, रामानंद झा, रमाकांत मिश्र, कमली पंडित सहित अन्य किसानों ने कहा कि खरीफ की फसल ने इस बार पूरी तरह दगा दे दिया। किसानों का कहना है कि यदि हर वर्ष इस तरह फसल बर्बाद होती रही तो खेती करना मुश्किल हो जाएगा और किसान खेती से मुंह मोड़ने को मजबूर होंगे।
इधर, भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष शशिभूषण महतो एवं जदयू अतिपिछड़ा प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुन्देश्वर प्रसाद सिंह ने सरकार से किसानों की फसल क्षति का आकलन कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि पिल्लू के प्रकोप से हुई क्षति का सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को उचित क्षतिपूर्ति दी जाए, ताकि उन्हें आर्थिक राहत मिल सके और खेती के प्रति उनका भरोसा बना रहे।

