*राष्ट्रकवि दिनकर राष्ट्रप्रेम, वीरता और मानवीय मूल्यों के कवि थे – सिद्धेश आर्य*
*श्री विश्वबंधु पुस्तकालय में दिनकर जयंती पर पुष्पांजलि सह परिचर्चा, दिनकर विश्वविद्यालय के निर्णय का स्वागत*
नितेश सिंह राजपूत
बखरी-बेगूसराय
क्षेत्र की प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था श्रीविश्वबंधु पुस्तकालय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती के मौके से पुष्पांजलि सह परिचर्चा का आयोजन किया गया। संतोष भारती गुड्डू की अध्यक्षता में सम्पन्न परिचर्चा का संचालन सह सचिव कोमल आर्य कर रहे थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संरक्षक समिति सदस्य व भाजपा जिला प्रवक्ता सिधेश आर्य ने कहा राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर राष्ट्रप्रेम,वीरता, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों के कवि थे। उर्वशी में श्रृंगार रस के कवि दिनकर की लेखनी रश्मिरथी,हुंकार, कुरूक्षेत्र और परशुराम की प्रतीक्षा में राष्ट्रीयता से ओतप्रोत होकर वीरता के शोले बरसाने लगी। उन्होंने दिनकर जयंती पर राज्य सरकार द्वारा बेगूसराय में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना तथा इस बाबत 15 करोड़ की राशि स्वीकृत करने के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि प्रस्तावित युनिवर्सिटी में बेगूसराय व खगड़िया जिले के कालेज समाहित होंगे।
परिचर्चा में विषय प्रवेश करते हुए रिटायर्ड एचओडी डॉ रवीन्द्र राकेश ने दिनकर को वीर रस का कवि बताते हुए कहा कि आजादी से पूर्व की लिखी उनकी कविताएं स्वतंत्रता आन्दोलन को धार देने का काम कर रही थी। सन् 62में चीन से लड़ाई हारने के बाद उनकी पीड़ा परशुराम की प्रतीक्षा में मुखरित हुई। संरक्षण समिति के संयोजक प्रो.आनंद चन्द्र झा ने राज्य सभा के सांसद के रूप में राजनीतिक शुचिता और हिंदी साहित्य में उनके योगदान पर चर्चा की। उपाध्यक्ष पवन कुमार सुमन ने दिनकर जी की कविताओं का सस्वर पाठ किया।
मौके पर संरक्षक समिति सदस्य विजय नेमानी, कार्यसमिति सदस्य राहुल केसरी, नीरज राय, रामचंद्र सिंह,बंटी झा,अम्बेश चौधरी आदि मौजूद थे।

