19 जवाबों से खुलेगा धालभूमगढ़ एयरपोर्ट का रास्ता!
राज्य सरकार ने केंद्र को भेजे जरूरी दस्तावेज, वन-पर्यावरण मंजूरी की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर लंबे समय से लंबित धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना को लेकर एक बार फिर उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार की ओर से मांगे गए 19 बिंदुओं के जवाब और आवश्यक दस्तावेज राज्य सरकार ने भेज दिए हैं। अब केंद्रीय मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों द्वारा दस्तावेजों की समीक्षा के बाद परियोजना की वन एवं पर्यावरणीय मंजूरी को लेकर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
जमशेदपुर सांसद बिद्युत बरण महतो लंबे समय से एयरपोर्ट की मंजूरी का मुद्दा केंद्र के समक्ष उठाते रहे हैं। हाल में उन्होंने केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात कर लंबित एनओसी का मुद्दा उठाया था। सांसद ने दस्तावेजों की कमी के कारण प्रस्ताव बार-बार लौटाने के बजाय आवश्यक जानकारी राज्य सरकार से सीधे मंगाकर प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आग्रह किया था। उनके अनुसार, मंत्री ने जरूरी दस्तावेज मिलने पर प्रक्रिया को प्राथमिकता देने का आश्वासन दिया था।
राज्य के जवाब में रनवे, एप्रोच रोड, बिजली-पानी, सुरक्षा मानकों तथा वन एवं गैर-वन भूमि के सीमांकन और उपयोग से जुड़े बिंदुओं पर जानकारी दी गई है। धालभूमगढ़ क्षेत्र हाथियों के आवागमन वाले इलाके से जुड़ा होने के कारण वन्यजीव संरक्षण भी अहम विषय है। सांसद ने हाथी कॉरिडोर बहाली का मुद्दा भी उठाया है।
वर्ष 2019 में शिलान्यास के बाद वन-पर्यावरण मंजूरी के अभाव में परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। एयरपोर्ट बनने से जमशेदपुर समेत पूरे कोल्हान के साथ सीमावर्ती पश्चिम बंगाल और ओडिशा के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने तथा उद्योग, व्यापार, एमएसएमई, निवेश और रोजगार को लाभ मिलने की संभावना है। अब 19 बिंदुओं के जवाब की केंद्रीय समीक्षा के बाद परियोजना की अगली दिशा स्पष्ट होगी।

