लेखक: गुंजन शर्मा
वाडिया की बेटियों की नई राह एक अनोखी सामाजिक पहल को दर्शाती है जहां गुजरात के बनासकांठा जिले का वाडिया गांव देह व्यापार की बुराई से लड़ रहा है। यह गांव लंबे समय से एक ऐसी परंपरा का गवाह रहा है जहां गरीबी और सामाजिक मजबूरियों के चलते महिलाओं को देह व्यापार में धकेल दिया जाता था। हालांकि, अब बदलाव की बयार बह रही है और स्थानीय परिवार तथा सामाजिक संगठन मिलकर इस कुप्रथा को जड़ से उखाड़ फेंकने का संकल्प ले चुके हैं।
वाडिया गांव की पृष्ठभूमि और सामाजिक चुनौतियां
बनासकांठा जिले में स्थित वाडिया गांव की आबादी करीब 750 है। भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र सूखाग्रस्त और संसाधनविहीन रहा है। यहां के नट समुदाय के परिवार पीढ़ियों से आजीविका के पारंपरिक साधनों के अभाव में जूझते रहे हैं। ऐतिहासिक रूप से इस समुदाय की महिलाएं मनोरंजन और नृत्य के पेशे से जुड़ी थीं, लेकिन समय के साथ सामाजिक उपेक्षा और आर्थिक तंगी ने इस पेशे को देह व्यापार के दलदल में बदल दिया। गरीबी इतनी गहरी थी कि माता-पिता अपनी बेटियों का भविष्य सुरक्षित करने के लिए उन्हें इस दलदल में धकेलने को मजबूर थे, क्योंकि उनके पास कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था।
कुप्रथा के विरुद्ध उठ खड़े हुए परिवार
गुजरात के बनासकांठा जिले का वाडिया गांव लंबे समय से देह व्यापार की सामाजिक समस्या से जूझ रहा है। यहां कुछ परिवार अपनी बेटियों को इस परंपरा से बचाने के लिए कम उम्र में ही उनकी सगाई कर देते हैं। हालांकि, बाल विवाह कानूनन प्रतिबंधित है और कम उम्र में सगाई भी चिंता का विषय है।
इस पहल की शुरुआत बेहद जोखिम भरी थी। बाल विवाह निरोधक अधिनियम और POCSO एक्ट के तहत कम उम्र में सगाई या विवाह कानूनी अपराध है। लेकिन ग्रामीणों के सामने यह एक ‘दो बुराइयों में से कम बुरी’ चुनने जैसी स्थिति थी। एक तरफ देह व्यापार का नर्क था तो दूसरी तरफ कानून का उल्लंघन। ग्रामीणों ने तय किया कि वे बेटियों की सगाई कम उम्र में कर देंगे लेकिन गौना (विदाई) 18 वर्ष की कानूनी उम्र पूरी होने पर ही करेंगे। इस रणनीति ने सामाजिक सुरक्षा का एक अस्थायी कवच प्रदान किया।
वाडिया की बेटियों की नई राह: सामाजिक संगठनों की भूमिका
वर्ष 2012 एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ जब VSSM (विचर्ता समुदाय समर्थन मंच) की संस्थापक मित्तल पटेल ने इस गांव में कदम रखा। मित्तल पटेल घुमंतू और अर्ध-घुमंतू जनजातियों के अधिकारों के लिए काम करती रही हैं। उन्होंने ग्रामीणों को समझाया कि केवल सगाई काफी नहीं है, असली बदलाव शिक्षा और कौशल विकास से आएगा। VSSM ने गांव में सामूहिक विवाह और सगाई समारोह आयोजित करने शुरू किए, जिससे परिवारों पर आर्थिक बोझ कम पड़ा और सामाजिक स्वीकृति मिली।
करीब 750 आबादी वाले इस गांव में गरीबी और आजीविका के सीमित साधनों के कारण पीढ़ियों से महिलाएं देह व्यापार में धकेली जाती रही हैं। वर्ष 2012 से सामाजिक संगठनों और स्थानीय परिवारों की पहल के बाद बदलाव की कोशिश तेज हुई और सामूहिक विवाह व सगाई समारोह शुरू हुए।
शिक्षा बनी सबसे बड़ा हथियार
मित्तल पटेल के अनुसार, लगातार प्रयासों से कई परिवार अपनी बेटियों को देह व्यापार से दूर रखने के लिए तैयार हुए हैं। गांव की एक युवती, जिसकी 11 साल की उम्र में सगाई हुई थी, आज नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है और 18 वर्ष की उम्र में उसका विवाह हुआ। यह केस स्टडी पूरे गांव के लिए रोल मॉडल बन गई। आज वाडिया की कई बेटियां नर्सिंग, शिक्षण और पुलिस सेवा की तैयारी कर रही हैं। VSSM ने गांव में लाइब्रेरी, कंप्यूटर सेंटर और करियर काउंसलिंग सत्र आयोजित कराए। सरकार की ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना और सुकन्या समृद्धि योजना को भी घर-घर पहुंचाया गया।
कानूनी चुनौतियां और आगे का रास्ता
हालांकि विशेषज्ञ आगाह करते हैं कि कम उम्र में सगाई स्थायी समाधान नहीं है। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) और यूनिसेफ जैसी संस्थाएं इस बात पर जोर देती हैं कि बाल विवाह या सगाई बच्चों के सर्वोत्तम हित के विरुद्ध है। यूनिसेफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण ही बाल विवाह और ट्रैफिकिंग को रोकने का एकमात्र टिकाऊ उपाय है। वाडिया मॉडल ने तात्कालिक राहत दी है, लेकिन अब फोकस सेकेंडरी एजुकेशन और वोकेशनल ट्रेनिंग पर शिफ्ट हो रहा है ताकि बेटियां सगाई के बाद भी पढ़ाई पूरी कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।
वाडिया की कहानी बताती है कि सामाजिक बदलाव के लिए सिर्फ परंपरा बदलना नहीं, बल्कि बेटियों को शिक्षा, सुरक्षित रोजगार और सम्मानजनक जीवन के अवसर देना भी जरूरी है।
आज वाडिया गांव देश के सामने एक मिसाल पेश कर रहा है कि कैसे सामुदायिक जागरूकता और बाहरी सहयोग मिलकर सदियों पुरानी बेड़ियों को तोड़ सकते हैं। सरकार को अब इस मॉडल का अध्ययन कर अन्य प्रभावित क्षेत्रों में आजीविका मिशन और आवासीय विद्यालय खोलने चाहिए ताकि वाडिया की बेटियों की यह नई राह एक राजमार्ग बन सके।

