नूतनडीह में सरकारी जमीन की बिक्री का आरोप, सीओ ने की जांच
चार एकड़ सरकारी जमीन बेचने का ग्रामीणों ने लगाया आरोप, अंचल टीम ने शुरू की मापी
*फ़ोटो सीओ निकिता बाला अपने अंचल टीम के साथ जमीन का जांच करते हुए*
पोटका। पोटका प्रखंड के धीरोल पंचायत अंतर्गत नूतनडीह में कथित तौर पर सरकारी जमीन की बिक्री का मामला सामने आने के बाद अंचल प्रशासन हरकत में आ गया है। ग्रामीणों की शिकायत पर मंगलवार को पोटका की अंचलाधिकारी निकिता बाला एवं सीआई ने स्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद अमीन एवं हल्का कर्मचारी को संबंधित पूरी जमीन की मापी कर रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया गया।
अमीन और हल्का कर्मचारी कर रहे जमीन की मापी
अंचल प्रशासन के निर्देश पर जमीन की मापी का कार्य शुरू कर दिया गया है। बताया गया कि मापी पूरी होने के बाद बुधवार को रिपोर्ट अंचल कार्यालय में जमा की जाएगी। चुकी जमीन का रकवा ज्यादा था इसलिए मापी पूरा नहीं हो सका। रिपोर्ट आने के बाद ही सरकारी एवं रैयती जमीन की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
चार एकड़ सरकारी जमीन बेचने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि दलालों के माध्यम से करीब चार एकड़ सरकारी जमीन की भी बिक्री कर दी गई है। ग्रामीणों के अनुसार, गोविंदपुर निवासी रौशन लाल मिश्र एक सरकारी पदाधिकारी है जो अपनी पत्नी के नाम जमीन खरीदा है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित जमीन में सरकारी भूमि के साथ कुछ रैयती जमीन भी शामिल है, जिसकी रजिस्ट्री कराए जाने की बात सामने आ रही है।
सरकारी और रैयती मिलाकर करीब 10 एकड़ जमीन
ग्रामीणों के मुताबिक, बांगो गांव के बलराम गोप, शंभू गोप, आनंद गोप, आंतंगिनी बागालीन, ज्ञान चंद्र गोप एवं नीलकंठ गोप के नाम से संबंधित जमीन बताई जा रही है। सरकारी और रैयती जमीन को मिलाकर कुल करीब 10 एकड़ भूमि होने की बात कही जा रही है, जिसकी कीमत करोड़ों रुपये में बताई जा रही है। जमीन की सीमेंट स्लैब से पक्की घेराबंदी भी किए जाने की बात ग्रामीणों ने कही है।
अंचल टीम की मापी और जांच रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित जमीन में कितनी भूमि सरकारी है और कितना रैय्यत है।
*बॉक्स बोल्ड रंगीन*
*बड़े सवाल, जिनका जवाब जरूरी*
कौन है वह सरकारी अधिकारी, जिसके नाम/परिवार के नाम पर कथित तौर पर जमीन खरीदे जाने की बात सामने आ रही है?
कौन है वह सरकारी डॉक्टर, जिसका नाम इस पूरे जमीन कारोबार से जुड़ने की चर्चा में है?
सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री का यह कथित खेल आखिर कौन संचालित कर रहा है?
इन लोगों के जमीन कारोबार को कौन देख रहा है और पर्दे के पीछे कौन है?
करीब चार एकड़ सरकारी जमीन की बिक्री का आरोप है—अगर आरोप सही है तो सरकारी जमीन की रजिस्ट्री कैसे हुई?
करीब 10 एकड़ जमीन की खरीद-बिक्री और घेराबंदी के पीछे किन लोगों की भूमिका है?
क्या संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों को जमीन की वास्तविक प्रकृति की जानकारी थी?
अंचल की जांच और मापी रिपोर्ट क्या तस्वीर सामने लाएगी?
सबसे बड़ा सवाल सरकारी जमीन की कथित खरीद-बिक्री के इस पूरे खेल का असली मास्टरमाइंड कौन है?

