मुंबई: महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर चल रही कार्रवाई अब बॉलीवुड के बड़े सितारों तक पहुंच गई है. महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त तुकाराम मुंढे ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची के विज्ञापन में काम करने को लेकर जारी कारण बताओ नोटिस पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए कहा है कि कार्रवाई किसी व्यक्ति को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि लागू नियमों के तहत की गई है. उनका कहना है कि विज्ञापन में किसी प्रतिबंधित उत्पाद का प्रत्यक्ष या परोक्ष प्रचार होता है तो उसकी जिम्मेदारी केवल निर्माता की नहीं, बल्कि विज्ञापनदाता और प्रचार करने वाले व्यक्ति की भी तय होती है.
मुंढे ने एक साक्षात्कार में कहा कि खाद्य क्षेत्र में विज्ञापन और दावों को लेकर वर्ष 2018 में बनाए गए नियम स्पष्ट रूप से विज्ञापनदाता और प्रचारक दोनों की जिम्मेदारी तय करते हैं. ये नियम जुलाई 2019 से लागू हैं. उनके अनुसार किसी उत्पाद के प्रचार में किया गया दावा वास्तविक और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप होना चाहिए. यदि विज्ञापन किसी ऐसे उत्पाद की ओर संकेत करता है, जिसका प्रचार प्रतिबंधित है, तो नियामक कार्रवाई की जा सकती है.
विमल इलायची के विज्ञापन को लेकर महाराष्ट्र एफडीए पहले ही इसे संभावित सरोगेट यानी परोक्ष विज्ञापन के तौर पर जांचने की बात कह चुका है. विभाग का संदेह है कि किसी ऐसे उत्पाद का प्रचार अप्रत्यक्ष तरीके से किया जा रहा है, जिस पर प्रतिबंध लागू है. इसी आधार पर 11 अगस्त 2026 को शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस जारी किए गए थे. तीनों को जवाब देने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था.
मुंढे ने स्पष्ट किया कि नोटिस जारी करना अपने आप में किसी व्यक्ति को दोषी ठहराना नहीं है. नियामक प्रक्रिया के तहत संबंधित पक्ष से यह पूछा गया है कि उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए. यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया जाता है तो कानून के तहत आगे की कार्रवाई हो सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि नियमों के उल्लंघन की स्थिति में 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और विज्ञापन वापस लेने समेत अन्य कदम भी उठाए जा सकते हैं.
महाराष्ट्र एफडीए की कार्रवाई का दायरा केवल विज्ञापन तक सीमित नहीं है. मुंढे के मुताबिक खाद्य सुरक्षा कानून के तहत उत्पादन, बिक्री, भंडारण, प्रसंस्करण और प्रचार से जुड़े पूरे तंत्र की जिम्मेदारी तय की जा सकती है. उनका कहना है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए यह मायने नहीं रखता कि वे बड़े कारोबारी हैं, छोटे दुकानदार हैं या किसी विज्ञापन के चर्चित चेहरे. कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है.
महाराष्ट्र में गुटखा, पान मसाला और उससे जुड़े तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध का हवाला देते हुए मुंढे ने कहा कि विभाग ऐसे उत्पादों के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रचार पर भी नजर रख रहा है. उनके अनुसार किसी विज्ञापन में ऐसा संदेश नहीं दिया जा सकता जो किसी प्रतिबंधित उत्पाद के बारे में गलत, भ्रामक या परोक्ष दावा करता हो. सोशल मीडिया, डिजिटल मंच, इलेक्ट्रॉनिक माध्यम या किसी अन्य माध्यम से किया गया प्रचार भी नियमों के दायरे में आता है.
विमल के मामले में एफडीए यह भी जांच रहा है कि विज्ञापन में इस्तेमाल की गई ब्रांड पहचान और प्रस्तुति कहीं प्रतिबंधित उत्पाद के प्रचार का माध्यम तो नहीं बन रही. मुंढे ने कहा कि यदि किसी ब्रांड का इस्तेमाल ऐसे उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है, जिसे कानून प्रतिबंधित करता है, तो केवल विज्ञापन में दिखाई देने वाले उत्पाद के नाम को देखकर मामला खत्म नहीं किया जा सकता. विज्ञापन का वास्तविक संदेश और उसका प्रभाव भी जांच का हिस्सा होगा.
इस कार्रवाई के बाद बहस का एक दूसरा पहलू भी सामने आया है. सवाल उठ रहा है कि किसी विज्ञापन में काम करने वाले अभिनेता को उत्पाद की कानूनी स्थिति की जिम्मेदारी किस सीमा तक उठानी चाहिए. मुंढे का तर्क है कि मौजूदा नियम प्रचारक को जिम्मेदारी से बाहर नहीं रखते. उनका कहना है कि विज्ञापन में किसी उत्पाद का समर्थन करने वाले व्यक्ति को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसका प्रचार खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुरूप हो.
मुंढे ने यह भी कहा कि एफडीए की कार्रवाई केवल चर्चित चेहरों तक सीमित नहीं है. विभाग ने खाद्य कारोबार से जुड़े प्रतिष्ठानों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया है. उनके कार्यकाल के दौरान हजारों निरीक्षण और छापे किए गए हैं. इनमें होटल, रेस्तरां, खाद्य प्रतिष्ठान और अन्य कारोबारी इकाइयां शामिल हैं. हाल में कुछ बड़े खाद्य कारोबारियों के लाइसेंस और परमिट पर भी कार्रवाई की गई है.
विभाग की कार्रवाई का आधार खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा बताया जा रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक देश में हर साल बड़ी संख्या में खाद्य नमूनों की जांच होती है और उनमें एक हिस्सा असुरक्षित, घटिया गुणवत्ता वाला या लेबलिंग नियमों के अनुरूप नहीं पाया जाता है. पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में खाद्य कारोबार के लाइसेंस भी रद्द किए गए हैं.
मुंढे के रुख से साफ है कि महाराष्ट्र एफडीए अब खाद्य सुरक्षा नियमों को केवल निर्माता या दुकानदार तक सीमित रखने के बजाय विज्ञापन और प्रचार की पूरी श्रृंखला पर लागू करने की कोशिश कर रहा है. विमल विज्ञापन मामले में बॉलीवुड सितारों को भेजे गए नोटिस इसी व्यापक नीति का हिस्सा बताए जा रहे हैं. हालांकि अंतिम जिम्मेदारी और संभावित दंड का निर्धारण संबंधित पक्षों के जवाब और विभाग की आगे की जांच के बाद ही होगा.
फिलहाल शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ के लिए अगला महत्वपूर्ण कदम नोटिस का जवाब देना है. एफडीए उनके जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड की समीक्षा करेगा. इसके बाद यह तय होगा कि मामला केवल स्पष्टीकरण तक सीमित रहता है या विभाग कानून के तहत आगे की कार्रवाई करता है. इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह सवाल भी सामने ला दिया है कि बड़े सितारों की ब्रांड जिम्मेदारी केवल विज्ञापन की शूटिंग और पारिश्रमिक तक सीमित है या उन्हें उस उत्पाद और उसके प्रचार के कानूनी असर की भी जांच करनी चाहिए. महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त का संदेश फिलहाल स्पष्ट है—विज्ञापन की दुनिया में प्रसिद्धि चाहे जितनी बड़ी हो, नियामकीय जिम्मेदारी उससे अलग नहीं हो सकती.

