मुंबई. यश और गीतू मोहनदास की फिल्म टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स के सिनेमाघरों में पहुंचते ही इसकी समीक्षाओं को लेकर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है. इसी बीच फिल्मकार राम गोपाल वर्मा की एक छोटी-सी सोशल मीडिया पोस्ट ने इस चर्चा को और हवा दे दी. वर्मा ने बुधवार शाम लिखा कि वह एक बार फिर धुरंधर देख रहे हैं. उन्होंने इसके पीछे कोई वजह नहीं बताई, लेकिन पोस्ट का समय ऐसा था कि इंटरनेट पर इसे टॉक्सिक को मिली शुरुआती ठंडी प्रतिक्रिया से जोड़कर देखा जाने लगा. कुछ यूजर्स ने इसे यश की फिल्म पर तंज माना, जबकि कुछ ने वर्मा की पोस्ट को जानबूझकर विवाद खड़ा करने वाली प्रतिक्रिया बताया.
दरअसल, टॉक्सिक और धुरंधर 2 को पहले एक ही दिन सिनेमाघरों में रिलीज होना था. दोनों फिल्मों की रिलीज तारीख 19 मार्च तय की गई थी. बाद में टॉक्सिक की रिलीज टल गई और फिल्म 26 अगस्त को सिनेमाघरों में पहुंची. फिल्म के रिलीज होते ही समीक्षकों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं, जिनमें फिल्म की कहानी, प्रस्तुति और लंबे समय तक चलने वाले दृश्यों को लेकर मिश्रित से नकारात्मक राय देखने को मिली. इसी माहौल में वर्मा का धुरंधर दोबारा देखने की बात कहना सोशल मीडिया के लिए चर्चा का नया विषय बन गया.
राम गोपाल वर्मा ने अपनी पोस्ट में केवल इतना लिखा कि वह फिर से धुरंधर देख रहे हैं. उन्होंने न तो टॉक्सिक का नाम लिया और न ही यश, गीतू मोहनदास या फिल्म की समीक्षा को लेकर कोई सीधी टिप्पणी की. इसके बावजूद पोस्ट के नीचे प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. कई यूजर्स ने वर्मा के पोस्ट को टॉक्सिक की मौजूदा स्थिति से जोड़ते हुए मजाक किया. कुछ ने कहा कि जिस दिन यश की फिल्म को लेकर नकारात्मक प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, उसी दिन धुरंधर को दोबारा देखने की घोषणा अपने आप में एक संदेश जैसी है.
सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इसे वर्मा का चुटीला कटाक्ष माना. कुछ यूजर्स ने टिप्पणी की कि यश के प्रशंसक जिस प्रतिक्रिया की उम्मीद कर रहे थे, उसके बजाय वर्मा ने ऐसी पोस्ट कर दी जिससे धुरंधर बनाम टॉक्सिक की पुरानी चर्चा फिर शुरू हो गई. वहीं कुछ लोगों ने वर्मा की आलोचना करते हुए कहा कि किसी फिल्मकार की मेहनत और रचनात्मक काम का सम्मान किया जाना चाहिए, भले ही फिल्म पसंद न आए.
वर्मा और टॉक्सिक के बीच चर्चा का यह संबंध हालांकि नया नहीं है. इससे पहले फरवरी में भी उन्होंने दोनों फिल्मों की संभावित टक्कर को लेकर सोशल मीडिया पर अपनी राय रखी थी. उस समय उन्होंने धुरंधर 2 और टॉक्सिक की तुलना करते हुए दोनों फिल्मों को लेकर काफी तीखी टिप्पणी की थी. उन्होंने अपने अंदाज में धुरंधर 2 को दर्शकों की समझ का सम्मान करने वाली फिल्म बताया था, जबकि टॉक्सिक को लेकर उनका रुख इसके उलट था. यही पुरानी टिप्पणियां अब उनकी नई पोस्ट के साथ फिर चर्चा में आ गई हैं.
वर्मा ने उस समय यह भी दावा किया था कि केजीएफ 2 की सफलता के बाद धुरंधर ने बड़े पैमाने पर दर्शकों तक पहुंच बनाई और उसे स्थानीय सीमाओं से बाहर की फिल्म के रूप में देखा गया. उन्होंने धुरंधर और टॉक्सिक की तुलना करते हुए यह भी कहा था कि दोनों फिल्मों का दर्शकों को देखने का नजरिया अलग है. उनकी इन टिप्पणियों को उस समय भी फिल्मी गलियारों में काफी चर्चा मिली थी.
अब जब टॉक्सिक आखिरकार सिनेमाघरों में पहुंच चुकी है, वर्मा की नई पोस्ट ने उस पुराने बॉक्स ऑफिस मुकाबले की यादें भी ताजा कर दी हैं. हालांकि दोनों फिल्मों की रिलीज अब एक ही दिन नहीं हुई, लेकिन सोशल मीडिया ने दोनों को फिर आमने-सामने ला खड़ा किया है. खास बात यह है कि वर्मा ने सीधे तौर पर टॉक्सिक पर कुछ नहीं कहा. इसलिए उनकी पोस्ट को निश्चित रूप से फिल्म पर हमला मानना फिलहाल सही नहीं होगा. यह भी संभव है कि उन्होंने धुरंधर को दोबारा देखने की बात महज अपनी पसंद के कारण कही हो.
लेकिन सोशल मीडिया की दुनिया में समय और संदर्भ अक्सर किसी सामान्य पोस्ट को भी अलग अर्थ दे देते हैं. टॉक्सिक की शुरुआती समीक्षाओं के बीच धुरंधर का दोबारा देखने का जिक्र सामने आने के कारण यूजर्स ने दोनों घटनाओं को जोड़ दिया. देखते ही देखते पोस्ट के नीचे फिल्मी बहस शुरू हो गई. एक तरफ यश के प्रशंसक इसे अनावश्यक तुलना बता रहे हैं, तो दूसरी तरफ धुरंधर के प्रशंसक वर्मा की पोस्ट को अपने पक्ष में देख रहे हैं.
टॉक्सिक की कहानी और प्रस्तुति को लेकर दर्शकों की प्रतिक्रिया भी अभी पूरी तरह सामने नहीं आई है. फिल्म के पहले दिन की प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर तेजी से बदल रही हैं. कुछ दर्शकों ने इसकी दृश्यात्मक शैली और कलाकारों के काम की तारीफ की है, जबकि कुछ ने कहानी और पटकथा को लेकर निराशा जाहिर की है. ऐसे में शुरुआती समीक्षाओं के आधार पर फिल्म की अंतिम स्थिति का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी.
फिल्म में यश के साथ कियारा आडवाणी, नयनतारा, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं. गीतू मोहनदास के निर्देशन में बनी यह फिल्म लंबे समय से चर्चा में थी और यश के प्रशंसकों को इससे काफी उम्मीदें थीं. फिल्म की रिलीज पहले टलने के बाद इसके प्रदर्शन को लेकर उत्सुकता और बढ़ गई थी.
फिल्म की रिलीज टलने के पीछे निर्माताओं ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का हवाला दिया था, क्योंकि इसका असर मध्य-पूर्व के बाजार में फिल्मों की रिलीज पर पड़ रहा था. हालांकि रिलीज टलने के बाद यह चर्चा भी हुई कि क्या फिल्म ने धुरंधर 2 से संभावित टकराव से बचने के लिए अपनी तारीख बदली. यश ने बाद में इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा था कि रिलीज टालने का फैसला किसी मुकाबले के डर से नहीं लिया गया था.
अब टॉक्सिक के सिनेमाघरों में आने के बाद पुरानी रिलीज की तारीख और संभावित टकराव फिर चर्चा में है. इसी बीच राम गोपाल वर्मा का धुरंधर दोबारा देखने का पोस्ट करना इस विवाद में नया मसाला बन गया है. हालांकि वर्मा ने स्पष्ट रूप से टॉक्सिक का नाम नहीं लिया है, लेकिन इंटरनेट ने उनके पोस्ट का अपना अर्थ निकाल लिया है.
फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि वर्मा की पोस्ट वास्तव में टॉक्सिक पर कटाक्ष थी या महज संयोग. लेकिन इतना जरूर है कि एक पंक्ति की पोस्ट ने रिलीज के पहले ही दिन दोनों फिल्मों की पुरानी प्रतिद्वंद्विता को फिर जिंदा कर दिया है. अब नजर इस बात पर होगी कि आने वाले दिनों में टॉक्सिक दर्शकों के बीच कैसी पकड़ बनाती है और क्या शुरुआती नकारात्मक समीक्षाओं के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर अपनी अलग कहानी लिख पाती है. दूसरी ओर, वर्मा की पोस्ट पर चल रही बहस ने यह साबित कर दिया है कि फिल्मी दुनिया में कभी-कभी पूरी कहानी एक फिल्म से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया की एक छोटी-सी पोस्ट से भी बन जाती है.

