लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
नेपाल में बाढ़ से तबाही, बिहार में हाई अलर्ट; गंडक बराज के सभी 36 गेट खोले गए।
गंडक बराज के सभी 36 गेट खोले गए
राष्ट्र संवाद संवाददाता पटना: नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी में आई अचानक बाढ़ से भारी तबाही मची है। कई गांव, बाजार, सड़कें और पुल बाढ़ के पानी में बह गए हैं। पानी का तेज बहाव बिहार की ओर बढ़ने से गंडक नदी के जलस्तर में वृद्धि की आशंका जताई गई है। इसे देखते हुए पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, बगहा और गोपालगंज समेत कई जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है।
बाढ़ के खतरे को देखते हुए गंडक बराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं, ताकि पानी का दबाव कम किया जा सके। बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने लोगों को बुधवार रात विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वह स्वयं वाल्मीकिनगर जाकर हालात का जायजा लेंगे। प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने और किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं देने की अपील की है।
इधर, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नेपाल में आई बाढ़ पर दुख जताते हुए कहा कि भारत सरकार संकट की इस घड़ी में नेपाल के साथ खड़ी है। उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्रियों से बात कर सीमावर्ती क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी ली है। संभावित प्रभावित इलाकों में स्थानीय प्रशासन, राहत-बचाव दल और एनडीआरएफ को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
बिहार सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरण के लिए अतिरिक्त टीमें तैनात की हैं। स्थानीय स्वयंसेवक संगठन भी ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में सहयोग कर रहे हैं। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में भारी बारिश की संभावना व्यक्त की है, जिससे नदियों का जलस्तर और बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गंडक बराज के फाटक खोलने से पानी का प्रवाह नियंत्रित होगा, लेकिन निचले इलाकों में जलभराव की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों को ऊंचे स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने जलजनित बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान तेज कर दिया है।
केंद्र सरकार ने नेपाल को तकनीकी सहायता और राहत सामग्री भेजने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए एक संयुक्त टास्क फोर्स का गठन किया गया है। यह टास्क फोर्स बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगी।
