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    Home » कल्याण में कुत्ते का ‘एक-मैन आर्मी’ तांडव: 7 घंटे में 130 से ज्यादा लोगों को काटा, प्रशासन अभी भी ‘सो रहा’ था!
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    कल्याण में कुत्ते का ‘एक-मैन आर्मी’ तांडव: 7 घंटे में 130 से ज्यादा लोगों को काटा, प्रशासन अभी भी ‘सो रहा’ था!

    Devanand SinghBy Devanand SinghAugust 10, 2026No Comments4 Mins Read
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    7 घंटे में 130 से ज्यादा लोगों को काटा
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    लेखक: इंद्र यादव

    रविवार को कल्याण पश्चिम में एक आवारा सफेद कुत्ते ने भयानक आतंक मचाया, जब उसने 7 घंटे में 130 से ज्यादा लोगों को काटा, जिससे पूरा इलाका दहशत में आ गया।

    7 घंटे में 130 से ज्यादा लोगों को काटा: घटना का पूरा विवरण

    इंद्र यादव/मुंबई/कल्याण पश्चिम के संदीप होटल से खड़कपाड़ा इलाके में रविवार दोपहर से एक आवारा सफेद कुत्ते ने ऐसा धमाल मचाया कि पूरा इलाका थर-थर कांप उठा। महज 7 घंटे में करीब 125 से 130 लोगों को उसने काट लिया। मतलब हर दो-तीन मिनट में एक शिकार! बच्चे, बुजुर्ग, राहगीर… कोई नहीं बचा।

    रुक्मिणीबाई अस्पताल में मरीजों की कतार लग गई। डॉक्टरों के मुताबिक अकेले उस दिन 48 मामले वहां पहुंचे, बाकी प्राइवेट अस्पतालों में भाग गए। कई बच्चों के गहरे घाव हो गए। एक छोटी लड़की (रिपोर्ट्स में 11 साल या आसपास की उम्र बताई जा रही है) की हालत गंभीर बताई गई और उसे बेहतर इलाज के लिए सायन अस्पताल रेफर किया गया। बाकी लोगों को एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए।

    अब सवाल यह है कि यह कुत्ता इतना बहादुर कैसे हो गया? क्या उसे कोई ‘सुपरपावर’ मिल गई थी या फिर हमारे नगर निगम और प्रशासन की लापरवाही ने उसे यह मौका दे दिया? सालों से आवारा कुत्तों की नसबंदी, टीकाकरण और नियंत्रण की बातें होती रहती हैं, लेकिन जब असल में जरूरत पड़ती है तो टीम देर रात तक खोजती फिरती है। आखिरकार प्रशासन, पुलिस और स्थानीय लोगों ने मिलकर देर रात करीब 1:30 बजे उस कुत्ते को पकड़ा। तब तक नुकसान हो चुका था।

    मुंबई में भी बीएमसी वाले कुत्ते पकड़ते नजर आए। अच्छा है, कम से कम दिखने के लिए तो कुछ कर रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि कब तक सिर्फ ‘दिखाने’ वाले काम चलेंगे? आवारा कुत्तों की समस्या सालों पुरानी है। हर महीने सैकड़ों काटने के मामले आते हैं, फिर भी व्यवस्था वैसी की वैसी। लोग सड़क पर निकलने से डर रहे हैं, बच्चे खेलने नहीं जा पा रहे, और प्रशासन फाइलों में रिपोर्ट लिखता रहता है।

    यह घटना सिर्फ एक कुत्ते की नहीं है। यह हमारी व्यवस्था की नाकामी का आईना है। जहां कुत्ते 7 घंटे तक ‘फ्री हैंड’ से घूम-घूमकर काटते रहें और पकड़ने वाले रात को जागें, वहां सुरक्षा का दावा करना खुद पर मजाक कसने जैसा है।

    कल्याण वाले अब भी डरे हुए हैं। उम्मीद है कि इस बार प्रशासन सिर्फ कुत्ता पकड़कर संतुष्ट नहीं होगा, बल्कि पूरे इलाके में नसबंदी और नियंत्रण का असली काम भी शुरू करेगा। वरना अगली बार कोई और कुत्ता ‘रिकॉर्ड’ तोड़ने निकलेगा।

    प्रशासनिक विफलता और नागरिक सुरक्षा

    इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आवारा कुत्तों के प्रबंधन में स्थानीय निकाय पूरी तरह विफल रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, रेबीज एक घातक बीमारी है जिसे समय पर टीकाकरण और पशु जन्म नियंत्रण से रोका जा सकता है। मगर कल्याण में न तो नसबंदी अभियान नियमित चलते हैं और न ही टीकाकरण। नतीजा यह होता है कि एक अकेला कुत्ता 7 घंटे में 130 से ज्यादा लोगों को काटा और तंत्र सोता रहा।

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार नगर निगम को शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब जब इतनी बड़ी घटना हो गई, तब प्रशासन की नींद खुली है। क्या हम हर बार ऐसी ही त्रासदी का इंतजार करेंगे? विशेषज्ञों का मानना है कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) कार्यक्रम को सख्ती से लागू करने के साथ-साथ सामुदायिक जागरूकता भी जरूरी है।

    आगे की राह: ठोस कदम की दरकार

    सरकार को चाहिए कि वह आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक योजना बनाए। इसमें नसबंदी, टीकाकरण, गोद लेने के कार्यक्रम और जन जागरूकता अभियान शामिल हों। साथ ही, घटना के बाद पीड़ितों को मुफ्त चिकित्सा सहायता और परामर्श मिलना चाहिए। केवल तभी हम भविष्य में ऐसे ‘तांडव’ को रोक पाएंगे।

    आवारा कुत्ता कल्याण कुत्ते का हमला प्रशासनिक लापरवाही रेबीज
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