लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखंड के जादूगोड़ा स्थित सिद्धू-कान्हू मोड़ में आदिवासी संस्कृति की अनूठी छटा देखने को मिली। यह दिवस आदिवासी समाज की भाषा, परंपरा और पहचान को संरक्षित करने का संकल्प लेने का पर्व है।
विश्व आदिवासी दिवस पर जादूगोड़ा में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम
हर वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाने वाला विश्व आदिवासी दिवस संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित एक अंतर्राष्ट्रीय दिवस है जो आदिवासी समुदायों के अधिकारों और संस्कृति को बढ़ावा देता है। झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में इस दिवस का विशेष महत्व है। जादूगोड़ा क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम ने इस विरासत को जीवंत कर दिया।
आदिवासी युवा संघर्ष समिति के बैनर तले हुए इस आयोजन में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। मांदर, नगाड़ा और बांसुरी जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर नृत्य मंडलियों की प्रस्तुति ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बना।
जादूगोड़ा। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सिद्धू-कान्हू मोड़ में आदिवासी युवा संघर्ष समिति, मेचुआ, डूंगरीडीह, जादूगोड़ा की ओर से भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पोटका विधायक एवं समिति के संरक्षक संजीव सरदार मुख्य अतिथि तथा देश परगना धाड़ दिसोम बैजू मुर्मू विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम में धोगेंड, बूढ़ी गाड़ी, हो, मुंडारी एवं रिंजा नृत्य मंडलियों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत कर लोगों का मन मोह लिया। मांदर और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप से पूरा सिद्धू-कान्हू मोड़ आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग गया।
इस अवसर पर विधायक संजीव सरदार ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और पहचान को संरक्षित करने का संकल्प लेने का दिन है। आदिवासी समाज की संस्कृति सदियों पुरानी और समृद्ध है, जिसे बचाए रखना नई पीढ़ी की जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से आधुनिक शिक्षा और रोजगार के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में प्रभात कुमार माझी, सुधीर सोरेन, रमेश सोरेन, बागराई सोरेन, रायसेन सोरेन, अनिल मुर्मू, राहुल टुडू, प्रेम सोरेन, समीर सोरेन, सुभाष टुडू, निखिल सोरेन, मधु सोरेन, मोहन सोरेन समेत बड़ी संख्या में महिलाएं एवं समाज के लोग उपस्थित रहे।
इस भव्य आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिकता की दौड़ में भी आदिवासी समाज अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूती से थामे हुए है। विश्व आदिवासी दिवस का यह उत्सव सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक बनकर उभरा।
विश्व आदिवासी दिवस के वैश्विक महत्व और आदिवासी अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र के घोषणापत्र के बारे में विस्तार से जानने के लिए संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

