लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
विश्व आदिवासी दिवस हर साल 9 अगस्त को मनाया जाता है और यह आदिवासी समुदायों की संस्कृति, भाषा और अधिकारों को उजागर करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस वर्ष जमशेदपुर के एलबीएसएम कॉलेज में विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग के विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पोटका विधायक संजीव सरदार और विशिष्ट अतिथि घाटशिला विधायक सोमनेश चंद्र सोरेन उपस्थित रहे। विश्व आदिवासी दिवस के बारे में अधिक जानें।
विश्व आदिवासी दिवस पर एलबीएसएम कॉलेज में विशेष कार्यक्रम
जमशेदपुर। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर एलबीएसएम कॉलेज, करनडीह के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में पोटका विधायक संजीव सरदार मुख्य अतिथि और घाटशिला विधायक सोमनेश चंद्र सोरेन विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ।
विद्यार्थियों ने रखे विचार, टॉपर हुए सम्मानित
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने आदिवासी समाज के इतिहास, संघर्ष, भाषा, संस्कृति और परंपराओं पर अपने विचार रखे। छात्रा प्रियंका कालिंदीया ने प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत किया। स्नातकोत्तर कक्षाओं के टॉपर विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित भी किया गया।
विश्व आदिवासी दिवस का महत्व और संजीव सरदार का संदेश
मुख्य अतिथि संजीव सरदार ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज के गौरवशाली इतिहास, संघर्ष और सांस्कृतिक विरासत को याद करने का अवसर है। आदिवासी समाज ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा के साथ प्रकृति संरक्षण की मिसाल पेश की है। उन्होंने कहा कि भाषा, लोकगीत, लोकनृत्य और परंपराएं समाज की पहचान हैं, जिन्हें संरक्षित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाना युवाओं की जिम्मेदारी है। उन्होंने विद्यार्थियों से मातृभाषा और संस्कृति पर गर्व करने के साथ उच्च शिक्षा हासिल कर समाज को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
कार्यक्रम में हो, संथाली और भूमिज लोकनृत्य की रंगारंग प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। विद्यार्थियों ने पारंपरिक परिधानों और लोकनृत्यों के माध्यम से आदिवासी संस्कृति की विविधता को जीवंत किया।
उपस्थित गणमान्य
मौके पर प्राचार्य डॉ. अशोक कुमार झा, विभागाध्यक्ष प्रो. बाबू राम सोरेन, डॉ. सुष्मिता धारा, प्रो. शिप्रा बोईपाई, विकास मुंडा, डॉ. विनय कुमार गुप्ता, मानस सरदार, जमशेदपुर लॉ कॉलेज के सहायक प्राध्यापक संजीव कुमार बिरुली सहित शिक्षक, विद्यार्थी एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
इस तरह के आयोजन आदिवासी युवाओं में अपनी संस्कृति के प्रति गौरव की भावना जगाने के साथ-साथ उन्हें उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित करते हैं। एलबीएसएम कॉलेज का यह प्रयास सराहनीय है और इससे समाज में आदिवासी विरासत के संरक्षण का संदेश जाता है। भविष्य में भी ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ी रहे।

