लेखक: देवानंद सिंह
IIT दिल्ली दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन ने युवाओं के बीच एक नई ऊर्जा का संचार किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में दिया गया एक हल्का-फुल्का वाक्य “मैं बाबा बागेश्वर तो नहीं हूं, लेकिन कुछ तो चलता होगा” छात्रों के बीच हंसी का कारण जरूर बना, लेकिन इस एक वाक्य के पीछे छिपा संदेश कहीं अधिक गंभीर है। प्रधानमंत्री ने दरअसल युवाओं के मन में चल रही भविष्य की बेचैनी, सपनों और संभावनाओं को सहज अंदाज में सामने रखा।
IIT दिल्ली दीक्षांत समारोह का महत्व
दीक्षांत समारोह किसी विद्यार्थी के जीवन का केवल एक औपचारिक पड़ाव नहीं होता। यह उस दौर की शुरुआत होती है, जब कक्षा और प्रयोगशाला से निकलकर युवा वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से रूबरू होता है। किसी के सामने नौकरी का सपना होता है, कोई अपना स्टार्टअप खड़ा करना चाहता है, कोई प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुटता है और कोई देश-विदेश में नई संभावनाएं तलाशता है। सपने अलग हो सकते हैं, रास्ते अलग हो सकते हैं, लेकिन सवाल एक ही है इन सपनों का देश के भविष्य से रिश्ता क्या होगा?
यही वह बिंदु है जहां प्रधानमंत्री का “हमें आप पर भरोसा है, देश को आपकी जरूरत है” वाला संदेश महत्वपूर्ण हो जाता है। आज भारत दुनिया की सबसे युवा आबादी वाले देशों में है। IIT जैसे संस्थानों से निकलने वाले युवा केवल अपने करियर का निर्माण नहीं करते, बल्कि वे तकनीक, उद्योग, विज्ञान, स्टार्टअप और प्रशासन के माध्यम से आने वाले भारत की दिशा भी तय करते हैं। इसलिए युवाओं की सफलता को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि के पैमाने पर नहीं देखा जा सकता।
सपनों को पूरा करने का समान अवसर
लेकिन यहां एक सवाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है क्या हम युवाओं को केवल सपने देखने की प्रेरणा दे रहे हैं, या उन्हें उन सपनों को पूरा करने का समान अवसर भी दे रहे हैं? विकसित भारत का लक्ष्य केवल बड़े आर्थिक आंकड़ों से हासिल नहीं होगा। इसके लिए रोजगार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध, नवाचार, सामाजिक न्याय और अवसरों की समानता भी जरूरी है। देश के श्रेष्ठ संस्थानों से निकलने वाले युवाओं के साथ-साथ छोटे शहरों, गांवों और सामान्य परिवारों से आने वाली प्रतिभाओं को भी आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने अगले 30-35 वर्षों में युवाओं के फैसलों के प्रभाव की बात कही है। यह बात केवल IIT के विद्यार्थियों तक सीमित नहीं है। आज का युवा जिस भारत का निर्माण करेगा, वही भारत आने वाली पीढ़ियों की पहचान बनेगा। इसलिए बाबा बागेश्वर का संदर्भ भले ही सभागार में मुस्कान लेकर आया हो, लेकिन असली भविष्यवाणी किसी बाबा को नहीं करनी है। भारत का भविष्य उसके युवाओं की सोच, मेहनत, ईमानदारी और फैसले तय करेंगे।
युवा अगर केवल यह पूछेगा कि देश मुझे क्या देगा, तो विकास अधूरा रहेगा। लेकिन जब वह यह भी पूछेगा कि मैं देश को क्या दे सकता हूं, तभी विकसित भारत का सपना वास्तविकता में बदलने की दिशा में आगे बढ़ेगा। दीक्षांत समारोह में मिली डिग्री केवल शिक्षा पूरी होने का प्रमाणपत्र नहीं, बल्कि जिम्मेदारी शुरू होने का दस्तावेज भी है। अब सवाल यह है कि इन डिग्रियों से कितने करियर बनेंगे, यह नहीं; बल्कि यह है कि इन प्रतिभाओं से कितना मजबूत, आत्मनिर्भर और संवेदनशील भारत बनेगा।
अधिक जानकारी के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट देखें।

