आयुर्वेद प्राचीन विरासत ही नहीं, स्वस्थ भविष्य की मजबूत आधारशिला: केशव प्रसाद मौर्य
आधुनिक अनुसंधान, शिक्षा एवं नवाचार से आयुर्वेद को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर
राष्ट्र संवाद संवाददाता
लखनऊ। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन चिकित्सा विरासत ही नहीं, बल्कि स्वस्थ भविष्य की मजबूत आधारशिला भी है। आयुर्वेद, योग एवं भारतीय चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक अनुसंधान, शिक्षा, तकनीक और नवाचार से जोड़कर वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ भारत और स्वस्थ उत्तर प्रदेश के निर्माण में आयुर्वेद, योग, होम्योपैथी एवं यूनानी चिकित्सा पद्धतियों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उप मुख्यमंत्री बुधवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, गोमती नगर स्थित मर्करी हॉल में 11वें आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की समृद्ध आयुर्वेदिक ज्ञान परंपरा को वैश्विक पहचान मिल रही है। आयुर्वेद के प्रति बढ़ते विश्वास को मजबूत करने के लिए अनुसंधान और वैज्ञानिक प्रमाणिकता पर विशेष ध्यान दिया जाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि वे एलोपैथी चिकित्सा पद्धति के विरोधी नहीं हैं। प्रत्येक चिकित्सा पद्धति की अपनी उपयोगिता है। सभी पद्धतियों के बीच बेहतर समन्वय और ज्ञान के आदान-प्रदान से मरीजों को अधिक प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में प्रत्येक जनपद में चिकित्सा एवं आयुर्वेद शिक्षा सुविधाओं के विस्तार की आवश्यकता भी जताई।
श्री मौर्य ने कहा कि ‘पहला सुख निरोगी काया’ की भावना भारतीय जीवन पद्धति का मूल आधार रही है। योग और आयुर्वेद स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मार्गदर्शन देते हैं। उन्होंने आयुर्वेद के विद्यार्थियों, चिकित्सकों और शोधकर्ताओं से अनुसंधान एवं नवाचार को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में पद्मश्री प्रो. मनोरंजन साहू, पद्मश्री प्रो. चंद्रशेखर सिंह और पद्मश्री प्रो. केके ठकराल का सम्मान किया गया। योग कार्यक्रम, प्रतियोगिताओं, जनपदों एवं चिकित्सकों को पुरस्कार तथा आयुष प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए। उप मुख्यमंत्री ने आयुष क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन पोर्टल का शुभारंभ भी किया।
राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’ ने कहा कि ‘स्वस्थ भविष्य के लिए आयुर्वेद’ की थीम के अनुरूप प्राचीन चिकित्सा परंपरा, आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान और नवीन स्वास्थ्य तकनीकों के समन्वय से गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाना चाहिए। प्रमुख सचिव आयुष रंजन कुमार ने आयुर्वेद को शरीर, मन, जीवनशैली और पर्यावरण को समग्र रूप से स्वास्थ्य से जोड़ने वाली पद्धति बताया।
इस अवसर पर महानिदेशक आयुष गौरी शंकर प्रियदर्शी, विशेष सचिव आयुष मदन सिंह गर्ब्याल, आयुर्वेद निदेशक डॉ. नारायण दास, होम्योपैथी निदेशक प्रमोद कुमार सिंह, यूनानी निदेशक प्रो. जमाल अख्तर सहित चिकित्सक, विशेषज्ञ, शिक्षक, छात्र-छात्राएं एवं विभागीय अधिकारी मौजूद रहे।

