
दीपावली के पाँच पर्व और उनसे जुड़ी धार्मिक परंपराएँ भारतीय संस्कृति का एक अनिवार्य हिस्सा हैं। भारतीय संस्कृति में दीपावली केवल एक दिन मनाया जाने वाला त्योहार नहीं है, बल्कि यह पाँच दिनों तक चलने वाला आस्था, उल्लास, परंपरा और पारिवारिक एकता का महापर्व है। धनतेरस से आरंभ होकर भाई दूज तक चलने वाला यह उत्सव जीवन में सुख, समृद्धि, स्वास्थ्य, प्रेम और सकारात्मकता का संदेश देता है। इन पाँच दिनों में प्रत्येक पर्व का अपना धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है।
दीपावली के पाँच पर्व और उनसे जुड़ी धार्मिक परंपराएँ का महत्व
दीपावली के उत्सव का आरंभ धनतेरस से होता है। वर्ष 2026 में धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन तेरह दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
धनतेरस के बाद नरक चतुर्दशी अथवा छोटी दीपावली का पर्व आता है, जो 8 नवंबर, रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन चौदह दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था। यह पर्व संदेश देता है कि सत्य और धर्म की विजय होती है।
दीपावली का मुख्य पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा। माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 54 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक है। दीपावली की रात्रि में इक्कीस दीपक जलाने की परंपरा है। घर के मुख्य द्वार, आँगन, तुलसी के पौधे और पूजा स्थल पर दीपक रखे जाते हैं।
दीपावली के अगले दिन गोवर्धन पूजा 10 नवंबर को मनाई जाएगी। इस दिन ग्यारह दीपक जलाने की परंपरा है। गोवर्धन पूजा में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है, जिन्होंने ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उँगली पर उठा लिया था। यह पर्व प्रकृति और पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।
अंत में, भाई दूज का पर्व भाई-बहन के स्नेह का प्रतीक है। इस दिन बहनें भाइयों के माथे पर तिलक लगाती हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे। इस दिन पाँच दीपक जलाने की परंपरा भी प्रचलित है। यह पर्व पारिवारिक रिश्तों के प्रति जिम्मेदारी को दर्शाता है।
दीपावली के अवसर पर धन की पोटली बनाने की लोकपरंपरा भी है। इसमें पीली सरसों, इलायची, लौंग, कपूर और सिक्का रखा जाता है। अंततः, दीपावली का अर्थ केवल दीपक जलाना नहीं है, बल्कि अपने भीतर के अंधकार को दूर कर प्रेम का प्रकाश फैलाना है। इन पाँचों पर्वों का मूल संदेश हमारे जीवन में सकारात्मकता और सद्भाव लाना है। दीपावली हमें मानवीय संवेदनाओं और सहयोग के महत्व की याद दिलाती है।
लेखक: महेन्द्र तिवारी

