लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
झारखंड राज्य के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर समूचा झारखंड अपने प्रिय नेता को नमन करता नजर आया। पद्मभूषण से सम्मानित, पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन ने अपना संपूर्ण जीवन आदिवासी, मूलवासी, दलित, अल्पसंख्यक और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया। उनके नेतृत्व में चले लंबे झारखंड आंदोलन ने अंततः सन 2000 में अलग झारखंड राज्य के गठन का मार्ग प्रशस्त किया। आज उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर न केवल राजनीतिक दल बल्कि आम जनमानस भी उनके योगदान को याद कर भावुक हो उठा। जमशेदपुर में झामुमो की पूर्वी सिंहभूम जिला समिति द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि समारोह इस बात का प्रमाण था कि गुरुजी की विरासत आज भी जन-जन के हृदय में जीवंत है। जिला अध्यक्ष विक्टर सोरेन की अगुवाई में हुए इस आयोजन में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पथलगड़ी, स्मृति यात्रा और सभाओं का सिलसिला चला, जिसमें हजारों की संख्या में कार्यकर्ता और आम नागरिक शामिल हुए।
शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम
जमशेदपुर। झारखंड के जनक, पूर्व मुख्यमंत्री एवं पद्मभूषण दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पूर्वी सिंहभूम जिला समिति ने जिला अध्यक्ष विक्टर सोरेन के नेतृत्व में विभिन्न श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए। साकची स्थित झामुमो जिला संपर्क कार्यालय में गुरुजी के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके बाद जिला समाहरणालय के समीप जुबली पार्क गोलचक्कर में गुरुजी की प्रस्तावित प्रतिमा स्थापना स्थल पर पारंपरिक रीति-रिवाज से पथलगड़ी एवं पूजा-अर्चना की गई।
स्मृति यात्रा और वरिष्ठ कार्यकर्ताओं का सम्मान
इसके उपरांत सोनारी स्थित केंद्रीय सदस्य पवन कुमार सिंह द्वारा स्थापित गुरुजी की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। वहीं से मानगो डिमना तिलका माझी चौक से चाकुलिया विधायक समीर मोहंती एवं घाटशिला विधायक सोमेश चंद्र सोरेन ने गुरुजी की स्मृति यात्रा रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। स्मृति रथ का नरगा, फूलडुंगरी, धालभूमगढ़ होते हुए चाकुलिया में स्वागत किया गया तथा झारखंड आंदोलन से जुड़े पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया। चाकुलिया में आयोजित सभा में गुरुजी के संघर्ष, झारखंड आंदोलन में उनके योगदान तथा उनके आदर्शों को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि “गुरुजी हम सभी के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगे।” उन्होंने कहा कि आदिवासी, मूलवासी, दलित, अल्पसंख्यक और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए गुरुजी का संघर्ष सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा। जिला अध्यक्ष विक्टर सोरेन ने कहा कि गुरुजी के विचार और आदर्श झारखंड की आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।
कार्यक्रम में मोहन कर्मकार, हिदायतुल्लाह खान, राजू गिरी, कुणाल षाडंगी, लक्ष्मण टुडू, शेख बदरुद्दीन, प्रमोद लाल, बारी मुर्मू, आदित्य प्रधान, सागेन पूर्ति, अजय रजक, पवन कुमार सिंह, सुमन महतो, आर्तिक महतो, समीर मोहंती, सोमेश चंद्र सोरेन, वीर सिंह सुरीन, हीरामणि मुर्मू, खुद्दू उरांव, सुनील महतो, बाघराय मार्डी, महावीर मुर्मू, लालटू महतो, पंकज सिन्हा, विधा सागर दास, जलील खान, शेख नासिर खान, रतन महतो, कालीपदो गोराई, प्रीतम हेंब्रम, सुशील हेंब्रम, दलगोविंद लोहारा, चंद्रावती महतो, गंगा देवी, सविता दास, झरना पाल, रजनी दास, अंकित सिंह, बंटी सिंह, अभय पाण्डेय, गोपाल महतो, प्रह्लाद लोहारा, बिनोद डे, सपन राय, नान्तू सरकार, गोकुल मार्डी, राकेश राव, अरुण सिंह सहित बड़ी संख्या में झामुमो नेता, कार्यकर्ता एवं आमजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला उपाध्यक्ष सागेन पूर्ति तथा धन्यवाद ज्ञापन जिला सचिव रतन महतो ने किया।
दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर आयोजित यह श्रद्धांजलि समारोह महज एक रस्म अदायगी नहीं, बल्कि झारखंड की अस्मिता और संघर्ष के प्रतीक एक महानायक के प्रति कृतज्ञ राष्ट्र की भावपूर्ण अभिव्यक्ति थी। पथलगड़ी की परंपरा के माध्यम से गुरुजी की प्रस्तावित प्रतिमा स्थल को पवित्र करना, स्मृति रथ के जरिए उनके विचारों को गांव-गांव तक पहुंचाना और झारखंड आंदोलन के पुराने सिपाहियों को सम्मानित करना, ये सभी कार्यक्रम इस बात का संकेत हैं कि गुरुजी का संघर्ष आने वाली पीढ़ियों के लिए एक धरोहर के रूप में संरक्षित रहेगा। झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान और जिला अध्यक्ष विक्टर सोरेन के वक्तव्यों ने इस भावना को और बल दिया कि गुरुजी के विचार और आदर्श झारखंड की राजनीति और समाज को लंबे समय तक दिशा देते रहेंगे। इस अवसर पर उपस्थित विशाल जनसमूह ने यह संदेश दिया कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रथम पुण्यतिथि पर दी गई श्रद्धांजलि उनके अधूरे सपनों को पूरा करने के संकल्प का भी आह्वान है।

