लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
हिंदू धर्म और भारतीय संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत श्रद्धा और विश्वास के साथ मनाया जाता है। यह दिन महर्षि वेदव्यास के जन्मोत्सव के रूप में भी विख्यात है, जिन्होंने चारों वेदों का विभाजन, महाभारत की रचना और अठारह पुराणों का प्रणयन कर मानवता को ज्ञान का अमूल्य भंडार प्रदान किया। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु अपने शिष्यों को ज्ञान का प्रकाश देकर अज्ञानता के अंधकार को दूर करते हैं, इसी पावन परंपरा का निर्वहन करते हुए जमशेदपुर के बिरसानगर स्थित विद्यालय में भव्य आयोजन किया गया।
जमशेदपुर। बिरसानगर स्थित प्रगति सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में बुधवार को महर्षि वेदव्यास जयंती एवं गुरु पूर्णिमा श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, समिति सदस्य वी. जयशंकर एवं प्रधानाचार्य अभिलाष गिरि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
महर्षि वेदव्यास जयंती एवं गुरु पूर्णिमा पर सांस्कृतिक प्रस्तुतियां
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने गुरु महिमा पर आधारित गीत, भाषण, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। मुख्य वक्ता वी. जयशंकर ने भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को संस्कारित एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिक बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि चरित्र निर्माण कर राष्ट्र के सजग प्रहरी तैयार करते हैं।
महर्षि वेदव्यास: ज्ञान के अक्षय भंडार
महर्षि वेदव्यास को आदिगुरु माना जाता है। उन्होंने वेदों को चार भागों – ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद में विभाजित कर जनमानस के लिए सुगम बनाया। उनके द्वारा रचित महाभारत को पंचम वेद की संज्ञा दी जाती है, जिसमें गीता जैसा अमूल्य दर्शन समाहित है। गुरु पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से व्यास पूजा का विधान है, क्योंकि उन्होंने गुरु परंपरा की नींव रखी। गुरु पूर्णिमा का यह पर्व हमें याद दिलाता है कि ज्ञान की प्राप्ति गुरु कृपा के बिना असंभव है।
महर्षि वेदव्यास के जीवन पर प्रकाश
भारती शर्मा ने महर्षि वेदव्यास के जीवन और गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि प्रधानाचार्य अभिलाष गिरि ने विद्यार्थियों को अनुशासन, संस्कार और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे गुरुजनों का सम्मान कर उनके बताए मार्ग पर चलें, यही सच्ची गुरु दक्षिणा है।
प्रगति सरस्वती शिशु विद्या मंदिर: संस्कारित शिक्षा का केंद्र
प्रगति सरस्वती शिशु विद्या मंदिर लंबे समय से जमशेदपुर में भारतीय संस्कृति और मूल्य आधारित शिक्षा का अलख जगा रहा है। विद्यालय का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि छात्रों का सर्वांगीण विकास कर उन्हें देशभक्त, चरित्रवान और संस्कारी नागरिक बनाना है। गुरु पूर्णिमा जैसे आयोजन इसी उद्देश्य की पूर्ति में मील का पत्थर साबित होते हैं, जहां बच्चे गुरु महिमा को गीत, नृत्य और नाट्य के माध्यम से आत्मसात करते हैं।
कार्यक्रम का संचालन एवं समापन
कार्यक्रम का संचालन प्रीत सिंह एवं पृथिष भादुड़ी ने किया तथा अनुप सामंत ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। अंत में विद्यालय के आचार्य-दीदी एवं सेवक-सेविकाओं को सम्मानित कर शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस अवसर पर पूरा विद्यालय परिसर गुरु भक्ति के रंग में रंगा नजर आया, जिसने उपस्थित सभी जनों को भावविभोर कर दिया।

