लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर। बिरसानगर स्थित प्रगति सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में बुधवार को महर्षि वेदव्यास जयंती एवं गुरु पूर्णिमा श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह, समिति सदस्य वी. जयशंकर एवं प्रधानाचार्य अभिलाष गिरि ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
महर्षि वेदव्यास जयंती एवं गुरु पूर्णिमा के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने गुरु महिमा पर आधारित गीत, भाषण, नृत्य और नाट्य प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। मुख्य वक्ता वी. जयशंकर ने भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को संस्कारित एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिक बनने का संदेश दिया।
भारती शर्मा ने महर्षि वेदव्यास के जीवन और गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि प्रधानाचार्य अभिलाष गिरि ने विद्यार्थियों को अनुशासन, संस्कार और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम का संचालन प्रीत सिंह एवं पृथिष भादुड़ी ने किया तथा अनुप सामंत ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। अंत में विद्यालय के आचार्य-दीदी एवं सेवक-सेविकाओं को सम्मानित कर शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
महर्षि वेदव्यास और गुरु पूर्णिमा का ऐतिहासिक महत्व
महर्षि वेदव्यास को हिंदू धर्म में आदिगुरु माना जाता है जिन्होंने चारों वेदों का विभाजन किया और महाभारत जैसे महाकाव्य की रचना की। गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है जो गुरु के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का पवित्र अवसर है। भारतीय संस्कृति में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान दर्जा दिया गया है। इस दिन शिष्य अपने गुरु का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। प्रगति सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में इस परंपरा को जीवंत रखते हुए प्रति वर्ष भव्य आयोजन किया जाता है जिसमें छात्र-छात्राएं बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं।
विद्यालय की उपलब्धियां और भविष्य की योजनाएं
प्रगति सरस्वती शिशु विद्या मंदिर जमशेदपुर के बिरसानगर क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कारों के संवर्धन के लिए विख्यात है। विद्यालय के प्रधानाचार्य अभिलाष गिरि के नेतृत्व में शैक्षणिक गतिविधियों के साथ सांस्कृतिक एवं नैतिक शिक्षा पर विशेष बल दिया जाता है। गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर विद्यालय परिवार ने संकल्प लिया कि वे गुरु-शिष्य परंपरा को और सशक्त बनाएंगे। विद्यालय प्रबंधन समिति के उपाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने घोषणा की कि आने वाले सत्र में संस्कृत एवं वेदिक शिक्षा को पाठ्यक्रम में अधिक प्रमुखता दी जाएगी।
गुरु पूर्णिमा के पौराणिक महत्व और परंपराओं के बारे में विस्तार से जानने के लिए विकिपीडिया का गुरु पूर्णिमा पृष्ठ देखें।

